सेलिब्रेटिंग इंडियन लैंग्वेजेज-द लर्निंग कर्व' पेंटिंग एग्जीबिशन ने जीता दर्शकों का दिल



'विदेशी भी भारतीय भाषाओं के मुरीद'
जयपुर, 7 दिसम्बर। इसे भाषा की जीत ही कहा जाएगा कि ब्राजील के आर्टिस्ट वाल्मीर बिन्होटी अपनी पेंटिंग में 'गुरुमुखि' लिखें। तो, यूएसए की ल्युसिडा कूपर की उपनिषद के महावाक्यों से श्रृंगारित कलाकृति भाषा को सरहदों से परे साबित कर दे। यही खूबी है जेकेके की अलंकार आर्ट गैलरी में लगी पेंटिंग एग्जीबिशन 'सेलिब्रेटिंग इंडियन लैंग्वेजेज-द लर्निंग कर्व' की।
यहां लगी कुछ पेंटिंग्स जहां चित्रकारी का अनुपम नमूना तो है ही, मन को झंकृत करने वाला कोई न कोई संदेश भी देती है।
कल्पना से परे लगता है कि ऑस्ट्रिया और ब्राजील के चित्रकार अपनी पेंटिंग्स में 'गुरमुखि' में संदेश दें। ऑस्ट्रिया की क्रिस्टिन कर्ट्ज़ ने भी ब्राज़ीलियन बिन्होटी की तरह  गुरमुखि का मनभावन प्रयोग किया है। तो, यूएस की ल्युसिडा ने उपनिषद के महावाक्यों, 'अयम् आत्मा ब्रह्म', 'अहम् ब्रह्म अस्मि', 'तत्त्वमसि' और 'प्रज्ञानम ब्रह्म' से अपनी कलाकृति को पूर्णता प्रदान की है।
इतना ही नहीं, एग्जीबिशन में लगी हर पेंटिंग रंगों का अनूठा और नयनाभिराम मिलन तो है ही, 'शब्द ब्रह्म है' दर्शन की साबित भी करती है। चाहे मणिपुरी हो या गुरमुखि या और कोई भाषा एक-एक शब्द में कहानी रचती है। गौर करें तो लगेगा कि ये सभी  चित्र प्रत्येक शब्द का अर्थ प्रकट करते हुए किसी रिश्ते या भावना या घटना को दर्शाते हैं।
जाहिर है, शब्द ने संसार को जोड़ा है, रिश्तों को नाम दिया है। शब्द न होते तो न 'माँ' होता न 'पा' ही सम्भव था।


सुकून देने वाली पेंटिंग्स-


सही मायने में 'वसुधैव कुटुम्बकम' के दर्शन पर खरी उतरती इस प्रदर्शनी में सभी पेंटिंग्स दर्शकों का दिल जीत रही है।
तभी तो एग्जीबिशन देखने वाले सभी पेंटिंग्स के प्रति अपनी भावनाओं का खुलकर इज़हार भी कर रहे हैं।
एक दर्शक वर्षा कोठारी ने लिखा, 'कलर्स एन्ड देयर वैरायटी मैक्स इट ऑल मोर सूदिंग' यानी रंग और उनकी विविधता इन सबको और सुकून देने वाली बनाती है।
एक दर्शक विक्रम जांगिड़ ने इस एग्जीबिशन को 'जीवंत शब्द संसार' की उपमा दी है।


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