नौकरी मांगने वाले नहीं नौकरी देने वाले बनें


-किसान होर्टिकल्चर के जरिए अपनी आय को सैंकड़ों गुना बढ़ा सकते हैं
जयपुर। आज का ग्रामीण युवा शहरों की तरफ भाग रहा है। किसान परिवार के युवा को किसानी की जगह नौकरी चाहिए लेकिन आज जिस तरह से तकनीकी ने प्रगति की है उससे किसान युवा अपनी आय को सैकड़ों फीसदी बढ़ा सकते हैं।
ये निष्कर्ष शनिवार को जगतपुरा स्थित विवेकांनद ग्लोबल युनिवर्सिटी के प्रबंधन विभाग में शुरू हुई एग्री बिजनेस इन ग्लोबल इकोनॉमी: एंटरप्रेन्योरियल अपारच्यूनिटी विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमीनार में वक्ताओं की चर्चा में निकल कर आया है। नाबार्ड द्वारा प्रायोजित इस सेमिनार का एजेंडा कृषि व्यवसाय सेटअप की दिशा ने वर्तमान उद्यमशीलता पर्यावरण प्रणाली के चारों और घूमेगा। इसका लक्ष्य उद्योग के दृष्टिकोण को लाना है। प्रो. राजेश शर्मा, कृषि अर्थशास्त्र विभाग, कृषि महाविद्यालय एस.के. राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर, डॉ. माथुर साध्यक निदेशक, राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान, डॉ. विजेन्द्र सिंह परिहार, डॉ. अतुल गुप्ता, डा. कविता शर्मा जैसे विशिष्ट व्यक्ति सम्मिलित हुए।
सेमीनार के उद्देश्य कृषि उद्यमिता की अवधारणा और महत्व पर चर्चा करना और कृषि-व्यवसाय क्षेत्र में सहायक उद्यमियों में वित्तीय संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा करना और ग्लोबल इकोनामी में कृषि-उद्यमिता को बढ़ावा देने के तरीके व साधनों का पता लगाना है। इस संगोष्ठी में विभिन्न प्रबंधन कॉलेज और विश्वविद्यालयों से आधे अंतिम वर्ष के 300 से अधिक छात्रों ने भाग लिया व 150 शोधपत्र सम्मिलित किए गए।
डॉ. पीएम उडानी व डॉ. एम.रा. सिंघानी ने अपने प्रेरणादायक शब्दों से सहयोगियों को संबोधित किया। डॉ. डीपी धरमोरा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
डॉ. राजेश गुप्ता ने कृषि व्यवसाय के बारे में बताया की आज के समय में सबसे बड़ी आवश्यकता व चुनौती है। इसमें उपभोक्ता वस्तुओ की क्वालिटी के प्रेति जागरुक हो चुका है। जिसमें उपभोक्ता गुणवत्ता का पैदावार बढ़ाकर प्रसंस्करण एवं मूल सवंर्धन करके किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। 
इसके अलावा कृषि पर्यटन भी इस कउ़ी में कृषि व्यवसाय के विद्यार्थियों के लिए नई सोच दे सकता है जिससे किसानों की आय बढ़ेगी व विद्यार्थी नेटवर्किंग द्वारा नया व्यवसाय कर ग्रामीण पलायन को राकेंगे। डॉ. विजेन्द्र सिंह परिहार ने ओरगेनिग फार्मिग के बारे में बताया। आयोजन में भी ओंकार बगाडिया, जो डॉ. प्रवीण चौधरी, प्रो. डीपी धरमोरा, डीन. बेसिक और एप्लाइड साइंस, डा. मनिषा चौधरी, ऐसोसिएट प्रोफेसर व प्रमुख प्रबंधन अध्ययन, डॉ. नकृल, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रमुख, कृषि व्यवसाय विभाग प्रबंधन दीपलता शर्मा एवं सेमीनार संयोजक मधुबाल कौशिक, डॉ. गरिमा अवस्थी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


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