मधुशाला में ताला न पड़ जाए

मधुशाला मेें ताला न पड़ जाए ...
हालातों के मद्देनजर मिले लीकर कारोबारियों को छूट- पीड़ित कारोबारी
जयपुर  . देशभर में भय का माहौल खड़ा करने वाले कोरोना ने कारोबार की कमर तोड़कर रख दी है। प्रदेश में भी कोरोना व्यापार पर कहर ढाता नजर आ रहा है। सरकारें लोगों की जान बचाने में जी-जान से जुटी हैं, लेकिन इस फिक्र में कारोबारों का गल घुट गया है। खास तौर से शराब व्यवसायी इस संकट से उबरते नजर नहीं आ रहे हैं। वजह, लॉटरी प्रक्रिया के बाद शराब व्यवसायियों को १८ प्रतिशत राशि चुकानी है, लेकिन 31 मार्च तक हुए लॉकडाउन से यह राशि चुकाना उनके लिए भारी साबित हो रहा है।
यूं तो सरकारें लोगों की जिंदगी बचाने के लिए कई कड़े कदम उठा रही हैं। सूबे के मुखिया अशोक गहलोत ने इसी के मद्देनजर प्रदेश में 31 मार्च तक लॉकडाउन घोषित किया है। इसमें आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सब कुछ बंद रखने का आह्वान किया गया है। इसका असर अब शराब कारोबारियों को खासा खल रहा है। खासकर ऐसे व्यवसायी जिन्होंने अपना भाग्य आजमाने के लिए इस बार आबकारी विभाग की लॉटरी प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। शराब कारोबारियों को इस बार नए वित्तीय वर्ष में भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ सकता है। इससे शराब कारोबारियों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। इस बार हुई लॉटरी प्रक्रिया के बाद शराब व्यवसायियों को  31 मार्च तक 18 प्रतिशत राशि जमा करानी है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से घोषित किए गए लॉक डाउन के चलते नए आबकारी ठेकेदारों इससे खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। कारोबार थमने के कारण आमदनी शून्य है। ऐसे में 18 प्रतिशत राशि चुकाने को अब लाले पड़ सकते हैं। लॉक डाउन के बाद प्रदेश में बने हालातों को लेकर कारोबार ठप पड़े हैं। ऐसे में शराब व्यवसायी गारंटी की भारी भरकम राशि कैसे जमा करा पाएंगे, इसको लेकर कारोबारियों में चिंता है। शराब कारोबारियों को यह राशि तय तारीख तक जमा कराना मजबूरी है। इस गारंटी राशि को जमा कराने के बाद अगले माह की पहली तारीख को शराब उठाना भी शर्तों में शुमार है।
यूं झलक रही पीड़ा
शराब व्यवसायी  ने बताया कि एक कम्पोजिट शराब की दुकान की गारंटी 3 करोड़ रुपए आबकारी विभाग द्वारा वार्षिक निर्धारित की है। आबकारी ठेकेदार द्वारा 4 परसेंट अमानत राशि 12 लाख 2 किस्तों में 25 मार्च तक आबकारी विभाग में जमा करानी है। वहीं 14.5 पर्सेंट यानी 42 लाख एक्साइज ड्यूटी 31 मार्च तक जमा करानी है। यह दोनों राशि 3 करोड़ गारंटी के हिसाब से है। जानकारों की मानें तो 3 करोड़ की कंपोजिट दुकान पर आबकारी विभाग द्वारा कंपोजिट फीस करीब 25 लाख एकमुश्त वसूली जाएगी, जिसे भी नए आबकारी ठेकेदारों को 31 मार्च तक जमा कराना है। ऐसी स्थिति में 3 करोड़ गारंटी की कम्पोजिट दुकान को 25 लाख रुपए प्रतिमाह देशी शराब की एक्साइज ड्यूटी के चुकाने होंगे। चाहे वह शराब का उठाव करें या ना करें। साथ ही अंग्रेजी शराब के उठाव ना करने पर भारी-भरकम पेनल्टी का सामना करना पड़ेगा। इस विषम परिस्थिति में शराब का व्यापार करने वाले व्यवसायी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उन्हें भी इन हालातों में गारंटी की राशि के लिए छूट दी जाए। शराब व्यवसायी प्रदेश में बने हालातों को लेकर मुख्यमंत्री से इस मामले में छूट दिए जाने की मांग कर रहे हैं।


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