निजी स्कूल संचालक अपना एकाउंट करे सार्वजनिक, बताये कितना खर्चा करते है हर साल - संयुक्त अभिभावक संघ

स्कूल फीस मुद्दा ....


निजी स्कूल संचालक अपना एकाउंट करे सार्वजनिक, बताये कितना खर्चा करते है हर साल - संयुक्त अभिभावक संघ



--- शिक्षकों को सैलरी देने के लिए फंड नही है, कन्सट्रेक्शन करवाने के लिए कहा से फंड आ रहा है



जयपुर 11 नवंबर । संयुक्त अभिभावक संघ ने निजी स्कूल संचालकों पर डराने-धमकाने कर फीस वसूलने के आरोप के साथ कहा कि संचालक केवल अपनी हठधर्मिता का प्रदर्शन कर लोगो को बरगला रहे है। शिक्षकों को सैलरी का डर दिखाकर निजी स्कूल संचालक उनका इस्तेमाल धरने-प्रदर्शनों में भीड़ दिखाने के लिए कर रहे है। जिस बकाया आरटीआई पैसों की ये लोग मांग कर रहे है पिछले 3 साल से कहा सोये हुए थे जो अब इस आपदा में जाग गए। जबकि एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 9394 से अधिक निजी स्कूल संचालकों ने आरटीई की गाइडलाइन के तहत गरीब बच्चों को स्कूलों में दाखिला तक नही दिया तो जबकि हकीकत में यह संख्या 12 हजार से अधिक है, अगर सरकार आरटीई के तहत कार्यवाही करती है तो इन निजी स्कूल संचालकों की पोल खुलकर सामने आ जायेगी। ऐसी स्थिति में स्कूल संचालक कैसे सरकार से आरटीई फंड की मांग कर रहे है। राज्य सरकार से एक अपील और है जिन स्कूल संचालकों ने आरटीई गाइडलाइन को फॉलो किया है उन स्कूल संचालकों को फंड रिलीज कर इस विकट स्थिति में राहत प्रदान करे।


संयुक्त अभिभावक संघ प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू एवं संगठन मंत्री चन्द्रमोहन गुप्ता ने जानकारी देते हुए कहा कि निजी स्कूल संचालक केवल हठधर्मिता का परिचय दे रहे है, यह लोग इस कोरोना महामारी में " आपदा को अवसर " की तरह इस्तेमाल कर प्रदेश के 2 करोड़ से अधिक अभिभावकों की भावनाओ के साथ खिलवाड़ कर, उन्हें जबर्दस्ती जिज्जत झेलने पर मजबूर कर रहे है। आज भी स्थिति ऐसी है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने फीस वसूली पर अभी तक कोई निर्णय नही दिए है 7 सितम्बर के एकलपीठ के आदेश पर भी डिवीजन बैंच ने रोक लगा रखी है उसके बावजूद स्कूल संचालक शिक्षकों के माध्यम अभिभावकों को प्रलोभन दे रहे है, धमकियां दे रहे है, अभिभावकों को डरा रहे है। इन सब बातों की शिकायत करने के बावजूद ना शिक्षा विभाग कार्यवाही कर रहा है और ना ही राज्य सरकार। मंत्रियों और अधिकारियों को शिकायत की जाती है तो कहते है शिकायत आएगी तो तत्काल कार्यवाही की जाएगी। ऐसी स्थिति में आखिरकार अभिभावक जाए तो जाए कहा। 


मंत्री युवराज हसीजा और संगठन मंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि निजी स्कूल संचालकों को इस विपदा की घड़ी में अभिभावकों के साथ खड़े होकर इंसानियत का परिचय देना था किंतु उन्होंने अपनी हठधर्मिता दिखाई। संयुक्त अभिभावक संघ निजी स्कूलों और राज्य सरकार से मांग करती है कि वह निजी स्कूल संचालकों को एकाउंट सार्वजिनक करे, स्कूलों को बताना चाहिए कि इस विपदा की घड़ी ने इनके कितने खर्चे हुए और गत वर्ष कितने खर्चे किये व कितनी इनकम की। आज जिस प्रकार निजी स्कूल संचालक अभिभावकों पर शिक्षकों और स्टाफ के सैलरी देने का दबाव बनाकर फीस वसूल रहा है। वह नाजायज है। एक तरह स्कूल संचालक पैसा ना होने का दुखड़ा रो रहा वही दूसरी तरह स्कूलों में कंस्ट्रक्शन करवाने के लिए उनके पास भरपूर फंड है। जब स्कूल खुल ही नही रहे है तो कन्ट्रेक्शन किस काम का, क्या वह शिक्षकों की सैलरी देने में उपयोग नही हो सकता। सरकार को निजी स्कूल संचालकों की प्रत्येक वर्ष ऑडिट करवाने व सार्वजनिक करने के आदेश देने चाहिए। जिससे निजी स्कूल संचालकों की वास्तविकता की जानकारी सभी अभिभावकों को प्राप्त होती रहे।


 


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