एक अप्रैल यानी मूर्ख दिवस

                             एक अप्रैल यानी मूर्ख दिवस



हम सभी जानते हैं कि एक अप्रैल का दिन पूरी दुनिया में अप्रैल फूल के रूप में मनाया जाता है। वैसे तो हम अपने मित्रों व करीबियों को कभी भी बेवकूफ बनाकर हंसी मजाक कर सकते हैं, पर एक अप्रैल का दिन इसके लिए खास रूप से मनाया जाता है। इस दिन खुराफाती दिमाग सक्रिय हो जाते हैं कि किस प्रकार दूसरों को मूर्ख बनाकर मजा लूटा जाए और अच्छे खासे समझदार और प्रतिभाशाली लोग भी मूर्ख बनने और बनाने में पीछे नहीं रहते। वैसे किसी दिन तो चाहे लोग इसका बुरा भी मान जाएं, किंतु एक अप्रैल को अप्रैल फूल बनाने पर, लोग बुरा भी नहीं मानते और अप्रैल फूल बनाने वाला भी अप्रैल फूल बनाया, अप्रैल फूल बनाया कहकर बड़े से बड़े मजाक को भी हंसी में उड़ा देता है। किंतु इस दिन एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी हंसी-मजाक ऐसा न हो, जो किसी को परेशान करे या उसका नुकसान कर दे, इस दिन को हल्के-फुल्के मजाक करके, आपसी प्रेम और सद्भाव को बढ़ाने के नजरिए से ही मनाना श्रेयस्कर होगा।
       ब्रिटिश लेखक चॉसर की किताब 'द कैंटरबरी टेल्स' में कैंटरबरी नाम के एक कस्बे का जिक्र है, जिसमें इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय और बोहेनिया की रानी एनी की सगाई की तारीख 32 मार्च 1981 को होने की घोषणा की गई थी, जिसे वहां के लोगों ने सही मान लिया और मूर्ख बन गए, कहते हैं तभी से 1 अप्रैल को मूर्ख दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
       कुछ लोग इसकी शुरुआत सत्रहवीं सदी से भी मानते हैं। 1564 से पहले यूरोप के सभी देशों में प्रचलित कैलेंडर में नया वर्ष 1 अप्रैल से मनाया जाता था, किंतु 1564 में वहां के राजा चार्ल्स नवम ने एक नया कैलेंडर जारी किया, इसके अनुसार नया वर्ष एक जनवरी से शुरू होने लगा, अधिकतर लोगों ने इसे स्वीकार कर लिया, किंतु कुछ लोगों ने इसे मानने से इनकार कर दिया और कुछ लोगों को इसकी सही जानकारी ही नहीं थी और वह 1 अप्रैल को ही नए वर्ष के रूप में मनाते रहे, जिससे नए कैलेंडर को स्वीकार करने वाले लोगों ने, ऐसे लोगों को मूर्ख बनाने के लिए तरह-तरह के मजाक करने और झूठे उपहार देने की शुरुआत कर दी और तभी से फूल्स डे मनाया जाने लगा।
      फूल्स डे को मनाने के पीछे कई अन्य कहानियां भी प्रचलित हैं, जिनमें से एक यह है कि प्राचीन समय में यूनान के एक मजाकिया राजा मोक्सर ने एक दिन सपने में देखा कि एक चींटी ने उन्हें जिंदा निगल लिया है, सुबह जागने पर उन्होंने अपनी रानी को यह बात बताई और दोनों राजा-रानी जोर-जोर से हंसने लगे, जब एक ज्योतिषी को इस बात का पता चला तो उसने राजा से कहा कि इस स्वप्न का अर्थ यह है कि आज का दिन हंसी-मजाक के साथ बिताया जाए, उस दिन 1 अप्रैल थी और तब से 1 अप्रैल को हंसी-मजाक भरा दिन मनाने का प्रचलन हो गया।
        एक अन्य लोक कथा के अनुसार एक अप्सरा ने अपने एक किसान मित्र से कहा कि यदि तुम एक मटकी पानी एक ही सांस में पी जाओगे तो मैं तुम्हें वरदान दूंगी और किसान के ऐसा करने पर अप्सरा ने उसे वरदान दिया कि तुम अपनी चुटीली बातों से लोगों को खूब हंसाओगे और उनका मनोरंजन करोगे, कहते हैं तभी से अप्रैल फूल डे मनाया जाने लगा।
         एक अन्य लोक कथा के अनुसार प्राचीन समय में चीन के एक सनन्ती नामक संत की दाढ़ी जमीन तक लंबी थी, एक दिन उनकी दाढ़ी में आग लग गई और वे बचाओ-बचाओ कहकर उछलने लगे, बच्चों ने जब उन्हें उछलते देखा तो वे जोर-जोर से हंसने लगे, संत ने यह कहते हुए अपने प्राण त्याग दिए, कि मैं तो मर रहा हूं, पर तुम लोग आज के ही दिन खूब हंसोगे।
        जातक ग्रंथों में इस बात का विवरण पाया जाता है कि प्राचीन काल में भारत में काशी, राजगीर और श्रावस्ती में सुरान भवन नामक मूर्खोत्सव प्रतिवर्ष मनाया जाता था, यह उत्सव एक सप्ताह तक चलता था। बनारस में आज भी वरनाप्याला नामक महोत्सव हर साल मनाया जाता है।
      पुराने समय में यूरोप में 1 अप्रैल को मालिक नौकर बन कर और अपने नौकर को मालिक बनाकर उसके हर आदेश का पालन करता था और उसकी सेवा करता था‌। फ्रांस के नारमेडी में 1 अप्रैल को एक अनोखा जुलूस निकाला जाता था, इसमें घोड़ा गाड़ी में सबसे मोटे आदमी को बैठाया जाता था, जिसे देखकर लोग हंसते और नाचते गाते थे।
       प्राचीन समय में थाईलैंड में कुलिसिका नामक मूर्खों का मेला हर वर्ष आयोजित किया जाता था, जिसमें फिनिशिया, पार्थिया, इस्राइल लीबिया आदि देशों के लोग भाग लेते थे ,इसमें एडोनिस देवता की मृत्यु एवं उसके पुनर्जन्म के उपलक्ष्य में एक उत्सव होता था, इसमें पहले देवता की मृत्यु का शोक मनाया जाता था, कई स्त्रियां विलाप करती हुई अपना मुंडन तक करवा लेती थीं और पुरुष रोते हुए एक-दूसरे पर चप्पलें चलाते थे, फिर देवता का पुनर्जन्म मनाया जाता था। देवता की नंगी मूर्ति का जुलूस निकालकर लोग हल्ला मचाते हुए घूमते थे। 
      इस तरह पूरी दुनिया में प्राचीन काल से ही 1 अप्रैल को तरह-तरह से मूर्ख दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है। कुछ देशों में इस दिन छुट्टी भी होती है, किंतु भारत व अन्य कई देशों में इस दिन छुट्टी नहीं होती, किंतु इस दिन हर तरह का मजाक करने की पूरी छूट होती है और कोई इसका बुरा भी नहीं मानता। अप्रैल फूल डे अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरह से मनाया जाता है, कुछ देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और ब्रिटेन में केवल दोपहर तक ही अप्रैल फूल डे मनाया जाता है, जबकि कुछ देशों में जैसे जापान, इटली, रूस, आयरलैंड और ब्राजील में अप्रैल फूल डे पूरे दिन मनाया जाता है।

                                        रंजना मिश्रा ©️®️


                                    कानपुर, उत्तर प्रदेश

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