पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा का निधन

 

पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा का निधन

भंवरी हत्याकांड में रहे चर्चित 9 साल बाद मिली थी रिहाई


राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर

 वे लंबे समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे।


जयपुर,17 अक्टूबर। राजस्थान की राजनीति में खास पहचान रखने वाले दिग्गज पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा का निधन हो गया है। उन्होंने आज सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर ली अंतिम सांस ली है।

उल्लेखनीय है कि 70 वर्षीय मदेरणा पिछले लंबे समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे।
उनके निधन के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। वहीं परिवार भी गमजदा है।
मिली जानकारी के अनुसार मदरेणा के निधन के बाद अब उनके पार्थिव शरीर को 10 बजे उनके पैतृक गांव चाडी ले जाया गया । अंतिम संस्कार पैतृक गांव में ही किया गया ।
भंवरी मामले में 9 साल तक जेल में रहने के बाद हाल ही में उन्हें अन्य आरोपियों के साथ रिहा किया गया था।
महिपाल मदेरणा का जीवन परिचय
मारवाड़ की राजनीति में एक बहुत बड़ा नाम, बेबाक शैली, रौबदार आवाज जो सालों तक गरीबों, किसानों के लिए गरजती रही। सामंतो, राजाओं के राज में गरीबों को किसानों को उनको हक दिलाया । वह नाम था स्व. परसराम जी मदेरणा 'साहब'।
साहब के पुत्र महीपाल मदेरणा का राजनीतिक कैरीयर एक षड़यंत्र के जरिए खत्म कर दिया गया। और अब साहब की तीसरी पीढी से उनकी पौत्री दिव्या जी मदेरणा राजनीति में सक्रीय है। दिव्या मदेरणा जोधपुर के ओसियां विधानसभा क्षेत्र से विधायक है।
उनमें अपने स्व.दादाजी जैसी ही राजनीतिक चतुरता है,वही बेबाक और आक्रामक शैली।
5 मार्च 1952 को महिपाल मदेरणा का जन्म जोधपुर जिले के फैलोदी में श्रीलक्ष्मणनगर दिग्गज जाट नेता परसराम मदेरणा के घर हुआ। महिपाल मदेरणा ने जोधपुर विश्वविद्यालय, जोधपुर से बी.ए., एल.एल.बी तक शिक्षा प्राप्त की है।
महिपाल मदेरणा का विवाह 8 दिसंबर 1982 में लीलादेवी के साथ हुआ। जिनकी दो पुत्रियां बड़ी बेटी दिव्या मदेरणा और छोटी छोटी रूबल मदेरणा है।
जिनकी बड़ी पुत्री दिव्या मदेरणा वर्ष 2018 में जोधपुर के ओसियां विधानसभा क्षेत्र से विधायक का चुनाव में जीत हासिल की।
महिपाल मदेरणा वर्ष 2003 में जोधपुर जिले के भोपालगढ़ विधानसभा से 12वी राज्य विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए।
मदेरणा वर्ष 2000 से 2005 तक जनलेखा सीमित के सदस्य भी रहे।
ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज क्षेत्र में सक्रिय रहे मदेरणा वर्ष 1981, 88, 94, 2000 में लगातार चार बार जोधपुर जिला परिषद के जिला प्रमुख बने। महिपाल मदेरणा केन्द्रीय सहकारी बैंक जोधपुर, मार्केटिंग सोसायटी, भोपालगढ, ग्राम सहकारी समिति, चाडी, तहसील फलौदी के अध्यक्ष भी रहे।
महिपाल मदेरणा को भोपालगढ़ की सीट रिजर्वेशन जाने के कारण उसे छोड़ ओसियां विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लडा और 13वी राज्य विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए।
महिपाल मदेरणा की अध्ययन के साथ साथ बैडमिंटन व टेनिस खेल में विशेष अभिरुचि है।
महिपाल मदेरणा को 19 दिसंबर 2008 को राजभवन में महामहिम राज्यपाल ने गहलोत मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
महिपाल मदेरणा को जल संसाधन, इंदिरा गांधी नहर, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, भूजल, सिंचित क्षेत्र विकास विभाग का मंत्री बनाया गया।
वर्ष 2011 में महिपाल मदेरणा पर भंवरी देवी के लापता होने से संबंधित मामले में शामिल होने का आरोप लगाया गया। 1 सितंबर 2011 को भंवरी देवी लापता हो गई थी उसके बाद उनके पति अमरचंद  ने आरोप लगाया की महिपाल मदेरणा के आदेश पर उनका अपहरण किया गया था।
इसके बाद में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 26 अक्टूबर 2011 को महिपाल मदेरणा को मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया।
उसके बाद सीबीआई ने महिपाल मदेरणा को 3 दिसंबर को गिरफ्तार किया और पूछताछ की।
जिसमे बाद में मदेरणा को प्रमुख संदिग्धों सहीराम बिश्नोई , शहाबुद्दीन और सहीराम बिश्नोई के साथ जेल में बंद कर दिया गया था। बाद में पता चला की महिपाल मदेरणा और कांग्रेस विधायक मलखान सिंह का पूरी साजिश में हाथ था। क्योंकि, भंवरी देवी इन दोनो को ब्लैकमेल कर रही थी।
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भंवरी की कहानी का विस्तार



प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला देने वाला भंवरी देवी अपहरण और हत्याकांड फिर सुर्खियों में है।
इस मामले में हाईकोर्ट ने एक दशक से जेल में बंद आरोपियों में शामिल भंवरी के पति अमरचंद व पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा समेत सात लोगों को मंगलवार (24 अगस्त) को जमानत दे दी थी। तत्कालीन विधायक मलखान सिंह और महिपाल मदेरणा समेत कुल 17 आरोपी इस प्रकरण में जेल में थे। मामले के सबसे अंत मे मलखान की बहन इंद्रा विश्नोई को भी जमानत दे दी गई है। इसके सहीत सभी 16 आरोपियों को जमानत दी जा चुकी है। 
जोधपुर के जलीवाड़ा गांव के एक उपकेंद्र में सहायक नर्स के पद पर तैनात भंवरी देवी साधारण परिवार से थी, लेकिन राजस्थानी फिल्मों में नाम कमाने की महत्वाकांक्षा के चलते ड्यूटी छोड़कर शूटिंग पर चली जाती थी।
ड्यूटी से गायब रहने पर उसे सस्पेंड कर दिया गया, लेकिन मलखान सिंह व मंत्री महिपाल मदेरणा की मदद से उसने निलंबन को रद्द करवा लिया। इसके बाद से तीनों के बीच नजदीकियां शुरू हों गईं। दोनों नेताओं से नजदीकियों के चलते भंवरी पर ग्लैमर से ज्यादा राजनीति का नशा चढ़ने लगा था।
चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं देने पर वह दोनों को धमकाने लगी थी। 
मुश्किलें बढ़ती देख मलखान सिंह और महिपाल मदेरणा ने उससे दूरी बना ली। इस बीच एक सीडी वायरल हुई, जिसने पूरे प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया। 
इसी सीडी के दम पर भंवरी तीन दिन में सरकार गिराने का दावा करती थी।
इसी कारण मलखान व महिपाल से उसकी दुश्मनी बढ़ गई और फिर उसका अपहरण कर हत्या कर दी गई।
भंवरी के साथ मदेरणा की सीडी सार्वजनिक हुई तो तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मदेरणा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था। 
यूं रची थी साजिश
भंवरी देवी सितंबर 2011 में लापता हो गई थी। पति अमरचंद ने आरोप लगाया कि जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा के इशारे पर भंवरी का अपहरण किया गया है। हालांकि बाद में अमरचंद भी इस मामले में लिप्त पाया गया था।
सीबीआई जांच में सामने आया कि बोरुंदा निवासी भंवरी देवी एक सितंबर 2011 को दोपहर एक बजे अपने घर से रवाना हुई। वह सोहनलाल विश्नोई से कार सौदे के पैसे लेने जा रही थी। करीब चार बजे सोहनलाल ने उसे अपनी गाड़ी में बैठाया और कई घंटे एक से दूसरे स्थान पर घुमाता रहा।
कार में शहाबुद्दीन व कुंभाराम उर्फ बलदेव भी मौजूद थे। 
सोहनलाल जयपुर में महिपाल मदेरणा के मकान के आसपास मंडरा रहे सहीराम व उमेशाराम से भी बात करता रहा। दरअसल, सहीराम ने भंवरी को ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी विशनाराम विश्नोई व उसकी गैंग को सौंप रखी थी। 
इनका काम भंवरी को विशनाराम को सौंपना था, लेकिन कार में शहाबुद्दीन के मौजूद रहने के कारण विशनाराम, भंवरी को नहीं लेना चाहता था।
ऐसे में विशनाराम को मनाने में समय निकलता चला गया। इस बीच भंवरी के दबाव देने पर ये लोग बोरुंदा रवाना हो गये थे
सीट के बीच दबा दिए थे गर्दन और सिर
बोरुंदा पहुंचने से पहले विशनाराम भंवरी को ले जाने के लिए तैयार हो गया।
उसी समय बलदेव ने गाड़ी को घुमाया तो भंवरी को शक हो गया और उसने चलती गाड़ी का दरवाजा खोल नीचे कूदने की कोशिश की।
यह देख सोहनलाल व शहाबुद्दीन ने उसे आगे की सीट की तरफ खींचा।
दोनों ने भंवरी का सिर व गर्दन सीटों के बीच में दबा दिया। दम घुटने भंवरी निढाल हो गई।
उसके मरते ही गाड़ी में सवार तीनों लोगों के हाथ-पैर फूल गए। थोड़ी देर में ये जालोड़ा क्षेत्र में पहंचे और विशनाराम से मिले।
भंवरी को मरा देख विशनाराम ने शव लेने से मना कर दिया। सहीराम ने अपने फोन से ही विशनाराम की महिपाल मदेरणा से बात कराई।
महिपाल ने विशनाराम से शव ठिकाने लगाने में मदद मांगी और उसे हरसंभव सहयोग का भरोसा दिाया।
इस पर रात करीब 9 बजे विशनाराम ने भंवरी के शव को अपनी गाड़ी में रखवाया और अज्ञात स्थान पर ले जाकर जलाने के बाद नहर में फेंक दिया। इस दौरान उसके साथ अशोक, कैलाश व ओमप्रकाश भी थे।
एफबीआई ने पुष्टि की अस्थियां भंवरी की ही है
सीबीआई ने नहर की तलाशी करवाई तो अस्थियां विसर्जित करने वाला बोरा एक जगह अटका मिल गया। इसमें कुछ ही अस्थियां बची थीं।
जांच के लिए सीबीआई ने भंवरी के बेटे व बेटी के डीएनए के साथ भंवरी की अस्थियों को अमेरिका में एफबीआई के पास भेजा। 
एफबीआई ने जांच के बाद पुष्टि कर दी कि ये अस्थियां भंवरी की ही हैं। इससे स्पष्ट हो गया कि भंवरी अब जिंदा नहीं है। 
यूं खुलता गया राज
सीबीआई ने कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए जांच शुरू की तो कई नाम सामने आए, लेकिन चुनिंदा लोगों पर ही ध्यान केंद्रित किया। आखिरकार, सहीराम, उमेशाराम, महिपाल मदेरणा, विशनाराम, सोहनलाल, मलखान सिंह विश्नोई, उसका भाई परसराम और भंवरी के पति अमरचंद सहित 17 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। सबसे अंत में इंद्रा विश्नोई पुलिस के हत्थे चढ़ी। 
हत्या, शव जलाने और ठिकाने लगाने के आरोपी
अपहरण व हत्या की साजिश: सीडी कांड के बाद महिपाल मदेरणा, मलखान सिंह, परसराम विश्नोई, इंद्रा विश्नोई, भंवरी के पति अमरचंद, सोहनलाल, कुंभाराम, शहाबुद्दीन ने अपहरण व हत्या की साजिश रची।
इसका मुख्य सूत्रधार सहीराम था। उमेशाराम ने सहीराम का सहयोग किया था।
लाश ठिकाने लगाने के लिए
विश्नाराम, कैलाश जाखड़, अशोक, ओमप्रकाश ने मिलकर भंवरी के शव को जलाया और उसकी राख को नहर में बहा दिया था।
पैसों का लेनदेन:
दिनेश और पुखराज की पैसों के लेनदेन में भूमिका सामने आई। एक आरोपी रेशमाराम भी था, जो इंद्रा का सहयोगी था। उसे पूर्व में जमानत मिल चुकी थी

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