करोड़ों की संपत्ति बांट ली, 90 साल के पिता को अकेला छोड़ दिया

करोड़ों की संपत्ति बांट ली, 90 साल के पिता को अकेला छोड़ दिया



दो दिन तक फ्लैट में पड़ा रहा शव, पड़ोसियों की सूचना पर पुलिस ने दरवाजा तोड़कर निकाला

अंतिम संस्कार के बाद भी चाबी को लेकर विवाद का आरोप; बुजुर्ग की मौत ने रिश्तों और इंसानियत पर खड़े किए गंभीर सवाल

जयपुर। राजधानी जयपुर में 90 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रिंसिपल की अकेले रहते हुए मौत का मामला सामने आया है। आरोप है कि बुजुर्ग पिता की करोड़ों रुपये की संपत्ति में हिस्सेदारी लेने वाली संतानें उनकी जिंदगी में उनकी देखभाल की जिम्मेदारी नहीं उठा सकीं। बुजुर्ग की मौत के बाद भी कथित तौर पर संपत्ति और फ्लैट की चाबी को लेकर विवाद सामने आया।

मृतक की पहचान हरिश चंद्र पालीवाल के रूप में हुई है, जो राजस्थान सरकार में प्रिंसिपल पद से सेवानिवृत्त थे। बताया जा रहा है कि उन्हें करीब डेढ़ लाख रुपये मासिक पेंशन मिलती थी। वे जयपुर में अकेले रहते थे। उनके एक बेटा और दो बेटियां हैं। आरोप है कि परिवार की करोड़ों रुपये की संपत्ति के बंटवारे के बाद बच्चों ने अपनी हिस्सेदारी ले ली, लेकिन बुजुर्ग पिता की देखभाल की जिम्मेदारी लेने से किनारा कर लिया।

दो दिन तक नहीं खुला दरवाजा, पड़ोसियों ने दी पुलिस को सूचना

पड़ोसियों के अनुसार, जब लगातार दो दिन तक हरिश चंद्र पालीवाल के फ्लैट का दरवाजा नहीं खुला और वे बाहर दिखाई नहीं दिए तो लोगों ने उनके परिजनों से संपर्क करने का प्रयास किया। बाद में शिप्रापथ थाना पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई।

पड़ोसियों के अनुसार, अंदर का दृश्य बेहद भयावह था। बुजुर्ग का शव बाथरूम में पड़ा मिला। पुलिस ने शव को बाहर निकलवाकर मोर्चरी पहुंचाया।

बच्चों को बुलाने की लगाते रहे गुहार

बताया जा रहा है कि बुजुर्ग पिता अपने बच्चों के आने का इंतजार करते रहते थे। पड़ोसियों से कई बार अपने बच्चों को बुलाने की बात कहते थे। आरोप है कि जब परिजनों से संपर्क किया गया तो बच्चों के आने को लेकर अलग-अलग जवाब मिले। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

अंतिम दर्शन से पहले भी चाबी का मुद्दा

घटना का सबसे संवेदनशील पहलू यह बताया जा रहा है कि बुजुर्ग की मृत्यु के बाद उनके अंतिम दर्शन के समय भी परिजन मौजूद नहीं थे। अगले दिन अंतिम संस्कार में परिजन पहुंचे, लेकिन आरोप है कि फ्लैट की चाबी को लेकर विवाद अधिक प्रमुख बन गया। आरोप लगाने वालों का कहना है कि पिता की चिता की आग ठंडी होने से पहले ही संपत्ति और चाबी का मुद्दा गर्म हो गया।

समाज के सामने बड़ा सवाल

राजस्थान सोशल प्रोटेक्शन एंड वेलफेयर काउंसिल की स्टेट प्रेसिडेंट हिरल राठौड़ ने घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि यह मामला समाज में तेजी से बदलते पारिवारिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग माता-पिता की संपत्ति और पेंशन तो सभी को चाहिए, लेकिन उनकी देखभाल की जिम्मेदारी लेने से संतान पीछे हट रही है।

विशेष गरिमा ने मृतक की पुत्री से भी उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, किन्तु उन्होंने हमारा फोन ही नहीं अटेंड किया।

इस घटना ने समाज के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या बुजुर्ग माता-पिता की कीमत अब सिर्फ उनकी संपत्ति और बैंक बैलेंस तक रह गई है?

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