महाराष्ट्र: शपथ ग्रहण पर सुप्रीम कोर्ट कल फैसला सुनाएगा


नई दिल्ली महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक उठापटक के बीच रविवार को सुप्रीम कोर्ट में विपक्षी दलों की याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने सुनवाई की। बेंच ने मामले में केंद्र, महाराष्ट्र सरकार, देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि राज्यपाल के लिखे पत्र कल सुबह 10.30 बजे अदालत के सामने पेश करें ताकि उस आधार पर आदेश जारी किया जा सके। अदालत कल ही उचित आदेश देगी??????इस बीच ?शरद पवार राकांपा विधायकों से मिलने रेनेसां होटल पहुंचे। शिवसेना की तरफ से सिब्बल की दलीलें: "रविवार को आप लोगों को तकलीफ दी, इसके लिए माफी मांगते हैं। विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 145 का हैचुनाव पूर्व गठबंधन को पहले मौका मिलता है। लेकिन चुनाव पूर्व गठबंधन टूट गया। अब हम चुनाव बाट बने गठबंधन पर निर्भर हैं।" "शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस ने 22 नवंबर को शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का ऐलान किया गया था आर कहा गया था कि सरकार उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में बनेगी। लेकिन इसके बाद जो हुआ, वो अजीब था। मैंने कभी ऐसी चीज देश में नहीं देखी। उन्होंने राष्ट्रपति शासन हा लिया। इस पर कैबिनेट मीटिंग दो जिनोमीटिंग नहीं हुई तो यह जरूर नेशनल इमरजेंसी हुई। सुबह करीब 8 बजे फडणवीस के हुई। सुबह करीब 8 बजे फडणवीस के नेतृत्व में सरकार बन गई। लेकिन सरकार के पास बहुमत था या नहीं यह रहस्य ही रहा। कोई भी दस्तावेज पब्लिक रिकॉर्ड पर नहीं रखा गया। गवर्नर सीधे निर्देशों पर काम कर रहे थे, वरना ऐसी चीजें न होतीं।" "शनिवार को सुबह 5:17 बजे राष्टपति शासन हटा लिया गया। सुबह 8 बजे दो लोगों ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। उनकी तरफ से कौनसे दस्तावेज दिए गए? जब किसी ने शाम 7 बजे यह घोषणा कर दी थी कि हम सरकार बनाने जा रहे हैं तो फिर राज्यपाल का दूसरों को शपथ दिलाने का कदम पक्षपातपूर्ण, गलत नीयत से विधायकों भरा और इस अदालत द्वारा तय नियमों के विपरीत है। कैबिनेट की बैठक के बिना ही राष्ट्रपति शासन हटाए जाने की सिफारिश करना बहत अजीब है। राज्यपाल दिल्ली से मिल रहे निर्देशों पर काम कर रहे थे। अदालत आज ही फ्लोर टेस्ट कराने का निर्देश दे। अगर भाजपा के पास बहुमत है तो वह विधानसभा में उसे साबित करे। अगर उसके पास बहुमत नहीं है तो हमें सरकार बनाने का दावा पेश करने दिया जाए।" "हमने यह कर्नाटक में भी देखा । बहुमत साबित करने दीजिए। महाराष्ट्र की जनता एक सरकार चाहती है। हमारे पास बहुमत है और हम इसे साबित करने को तैयार हैं। हम कल मुंबई ही बहुमत साबित करने को तैयार हैं।" "राज्यपाल ने सत्तारूढ दल को बहुमत साबित करने के लिए 30 नवंबर का जो वक्त दिया है, उसके मायने कुछ और नजर आ रहे हैं।" महाराष्ट्र भाजपा की तरफ से विधायकों मुकल रोहतगी ने पैरवी की: "मुझे समझ नहीं आ रहा कि रविवार को विधायकों सुनवाई क्यों हो रही है। रविवार को ऐसे सुनवाई नहीं होनी चाहिए। मेरे लिए हिसाब से यह मामला लिस्टेड ही नहीं होना चाहिए था। यह याचिका पहले बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल होनी थी।" विधायक "क्या सुप्रीम कोर्ट एडवांस "क्या सुप्रीम कोर्ट एडवांस फ्लोर टेस्ट का आदेश दे सकता है? याचिका में जरूरी दस्तावेज नहीं हैं। इन लोगों को कुछ नहीं पता। ये लोग तीन हफ्ते तक सो रहे थे। उनके दावों के समर्थन में कोई दस्तावेज मौजूद नहीं है।"


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