निचला सदन जमीन से जुड़ा है, तो ऊंचा सदन दूर तक देख सकता है


एजेंसी


नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा के 250वें सत्र के मौके पर सदस्यों को संबोधित किया। इस मौके पर मार्शलों की ड्रेस में बदलाव किया गया। मोदी ने कहा कि चर्चा चल रही थी कि सदन एक हो या दो हो। लेकिन, संविधान निर्माताओं ने जो व्यवस्था दी है, वह बेहद उपयुक्त है। निचला सदन जमीन से जुड़ा हुआ है, तो ऊंचा सदन दूर तक देख सकता है। निचले सदन में भारत की जमीनी स्थिति का प्रतिबिम्ब होता है, तो यहां पर दूरदृष्टि का पता चलता है। इस सदन ने कई ऐतिहासिक पल देखे। इतिहास बनाया भी और इतिहास बनते हुएदेखा। जरूरत पड़ने पर इतिहास को मोड़ने का भी काम किया। मोदी ने कहा- 'सभापतिजी जब आप दो घटनाओं को जोड़कर प्रस्तुत कर रहे थे। मुझे लगता है कि लेखन के शौकीन इस पर जरूर गौर करेंगे। 250 सत्र विचार यात्रा रही है। हर दिन के बाद नया दिन आया, समय बदला और परिस्थितियां बदलीं। सदन ने बदली हुई परिस्थितियों को आत्मसात करते हुए अपने आपको ढालने का प्रयास किया। इसके लिए सदन के सभी सदस्य बधाई के पात्र हैं। यह हमारी विकास यात्रा का प्रतिबिम्ब है। वैश्विक परिदृश्य में भारत किस तरह से नेतृत्व की क्षमता रखता है, यह इस सदन से पता चलता है।' 'राज्यसभा में मुझे कई चीजों को नए सिरे से देखने का मौका मिला': प्रधानमंत्री ने कहा- 'सदन के दो पहलू खास है। एक स्थायित्व और दूसरा विविधतालोग आते हैं और जाते हैं लेकिन, स्थायित्व बना रहता है। यह भारत के संघीय ढांचे की आत्मा हर पल प्रेरित करती है। भारत की अनेकता में एकता का जो सूत्र है, उसकी सबसे बड़ी ताकत सदन में नजर आती है। हर किसी के लिए चुनावी अखाड़ा पार करना बहुत सरल नहीं होता है, लेकिन देश में उन लोगों की उपयोगिता कम नहीं होती है। उनका लाभ देश के राजनीतिक जीवन, नीतिनिर्धारण में मिलता है।' 'देश की हस्तियों ने इस सदन का नेतृत्व किया है। आजादी के बाद बहुत सारी चीजें गढ़नी थीं, उस समय जिस परिपक्वता के साथ सबने नेतृत्व किया, यह बहुत बड़ी बात है। 250 सत्रों की यात्रा और अनुभव के बाद हमारा आने वाली पीढ़ियों के लिए दायित्व और बढ़ जाता है।


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