दुष्कर्म कानून की समीक्षा करेगा सुप्रीम कोर्ट, केंद्र समेत देश भर के हाईकोर्ट को नोटिस जारी


एजेंसी


नई दिल्ली। यौन अपराधों और दुष्कर्म के मामले में देश की आपराधिक न्याय प्रणाली का मूल्यांकन करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। अदालत ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। बुधवार को अदालत ने देश के सभी हाईकोर्ट से भी जांच, सबूत इकठ्ठा करने की प्रक्रिया और मामले की सुनवाई से जुड़े तथ्यों का ब्यौरा देने को कहा। चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने बुधवार को केंद्र सरकार से गृह सचिव के जरिए इस मुद्दे पर अपना जवाब फाइल करने को कहा। वहीं, राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश अपने मुख्य सचिवों के जरिए जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 7 फरवरी, 2020 को तय कर दी। इस तारीख तक सभी को अपना जवाब दाखिल करना होगा।


एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा को न्याय मित्र नियुक्त सुप्रीम कोर्ट ने कहा- निर्भया मामले ने देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया। ऐसे मामलों में कार्रवाई और फैसले में देरी से लोगों के मन में चिंता और अशांति पैदा हुई। इसी वजह से लोग आंदोलन करते हैं। कोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म की स्थिति में कानून के प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने के लिए उपलब्ध सूचनाओं और परिस्थिति का एक साथ अध्ययन करना होगा। अदालत ने सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा को इस मामले में सहायता के लिए 'एमिकस क्यूरिया' यानी न्याय मित्र नियुक्त किया। दुष्कर्म के दोषियों को दया याचिका का अधिकार न मिलेः राष्ट्रपति 6 दिसंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राजस्थान के जोधपुर में कहा था कि महिला सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है। पॉक्सो एक्ट (नाबालिगों के साथ यौन अपराध) के तहत दुष्कर्म के दोषियों को दया याचिका दायर करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। संसद को इस मामले की समीक्षा करना चाहिए। अप्रैल में पॉक्सो एक्ट में संशोधन को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलीअप्रैल में राष्ट्रपति ने पॉक्सो एक्ट में संशोधन को लेकर लाए गए अध्यादेश को मंजूरी दी थी। इसके मुताबिक, 12 साल से कम उम्र के बच्चों से दुष्कर्म करने वालों को मौत की सजा तक का प्रावधान है। 16 साल से कम उम्र का लड़की से रेप करनेवाले की न्यूनतम सजा भी 10 से बढ़ाकर 20 साल की गई है। दोषी को उम्रकैद भी हो सकती है। अध्यादेश में यह प्रावधान भी किया गया है कि 12 साल से कम उम्र बच्चे से दुष्कर्म करनेवाले को कम से कम 20 साल की जेल या उम्रकैद या मौत की सजा दी जाएगी।


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