घूघट हो या बुर्का आधुनिक समाज में इसका क्या तुक? गहलोत बोले......


कार्यालय संवाददाता


जयपुर। बुधवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निवास पर गुरु नानक साहब के 550वें आगमन पर शब्द कीर्तन आयोजित किया गया। इस मौके पर गहलोत ने महिला सशक्तिकरण की बात की। उन्होंने कहा- अब चूंघट हटाओ का अभियान चलना चाहिए। देशभर की महिलाओं को इसके  लिए आगे आना चाहिए।


गहलोत ने कहा कि सिर्फ महिलाओं को  ही नहीं बल्कि इस प्रथा को खत्म करने के लिए पुरुषों को भी आगे आना चाहिए। क्योंकि, पुरुष प्रधान मुल्क होने से महिलाओं पर दबाब रहता है| इस कारण महिलाओं को घुंघट निकालना पड़ता है |  घूघट हो या बुर्का आधुनिक युग में दुनियां जहाँ चाँद तक जा पहुंची है, मंगल ग्रह पर जा रही है ऐसे में इसका क्या तुक ?


मुख्यमंत्री ने कहा जिनकी कोख में से हम पैदा हुए हैं उन्हें सम्मान देना हमारा परम धर्म बनता है राजस्थान जैसे प्रदेश में जहाँ घुंघट एक प्रथा है, एक महिला को आप घूघट में कैद रखो, यह कहां की समझदारी है? हम विज्ञान के युग में हैं। मोबाइल फोन है और दुनिया मुट्ठी में है। पर एक महिला चूंघट में कैद रहती है, कल्पना करो क्या बीतती होगी?


उन्होंने कहा कि गुरुनानक देव जी ने उस जमाने के अंदर महिलाओं की बात की। उन्होंने हिंदू मुस्लिम एकता पर बल दिया। वे अपने उपदेशों में कहा करते थे कि मैं न तो हिंदू हूं ना मुसलमान हूं मैं ईश्वर का भक्त हूँ । वह सत्य के पुजारी थे। वह कहा करते थे 'सच सुनैसी सच की बेला' अर्थात को बिना भय के सत्य बोलना चाहिए असत्य का पक्ष नहीं लेना चाहिए।


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