मामूली लिगामेंट इंजरी के लिए अब रेडियो फ्रीक्वेंसी शिक्रेज



कार्यालय संवाददाता


जयपुर। खिलाडियों को पैर की छोटी लिगामेंट इंजरी के लिए अब पट्टे का सहारा लेने की जरूरत नहीं है। अब रेडियो फीक्वेंसी शिंक्रेज तकनीक से मामूली मगर गंभीर बन जाने वाली चोटों का उपचार किया जा सकता है। वहीं घुटने, कंधों की जटिल चोटों के इलाज की अत्याधुनिक ऑर्थोस्कोपी तकनीक से अब एंकल की सर्जरी भी की जा सकती है। एंकल प्लेटफॉर्म व राजस्थान ऑर्थोस्कोपी सोसायटी की ओर से शुक्रवार से शुरू हुई दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने एंकल (टखना) की चोटों के इलाज की ऐसी ही नई तकनीकों के बारे में जानकारी दी। भारत में पहली बार आयोजित इस कॉन्फ्रेंस के आयोजन अध्यक्ष डॉ. विक्रम शर्मा ने बताया कि पहले दिन एंकल के छोटे लिगामेंट्स में चोट के प्रबंधन के बारे में चर्चा की गई। कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के 150 से अधिक विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस दौरान विशेषज्ञों ने कई केसों की स्टडी पर चर्चा करते हुए उनके उपचार के लिए इस्तेमाल की गई नई तकनीकों के बारे में जानकारी दी। आयोजन सचिव डॉ. कपिलदेव गर्ग ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में नीदरलैंड, चाइना समेत देश के विभिन्न भागों से विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। मामूली चोटों को बढ़ने से रोकेगी नई तकनीकः कॉन्फ्रेंस में नीदरलैंड से आए विश्व प्रसिद्ध स्पोर्ट्स इंजरी विशेषज्ञ डॉ. निक वॉन डिक ने बताया कि एंकल के छोटे लिगामेंट्स में कई बार मामूली चोटें लग जाती हैं जिनमें लगातार दर्द बना रहता है। इस समस्या को एंटीरियर इम्पिंजमेंट कहते हैं। अब पट्टा बांधने की बजाय इस चोट को रेडियो फिक्वेंसी शिंक्रेज तकनीक से ठीक करछोटे स्तर पर ही रोक लिया जाता है। इस तकनीक में ढीले हुए लिगामेंट को फिर से टाइट कर दिया जाता है जिससे खिलाड़ी के लगातार दर्द होने की समस्या ठीक हो जाती है। इसके अलावा टखने की चोटों को स्टेम सेल तकनीक से ठीक करने के बारे में भी जानकारी दी गई। इस कॉन्फ्रेंस में चाइना के डॉ. यिनगुइया हुआ, अहमदाबाद से डॉ. राजीव शाह, दिल्ली के डॉ.अभिषेक बंसल समेत कई विशेषज्ञों ने विभिन्न सेशन में जानकारियां दी।


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