मरूगंगा की कोख झलनी करने पर उतारू बजरी खनन माफिया


- बाड़मेर जिले में जिम्मेदार बेपरवाह, मिलीभगत से देते हैं अवैध बजृरी खनन अंजाम।
- एक रवाना पर रातभर दनदनाते बजरी से भरे अवैध वाहन। 
- फोन से होती है बजरी से भरे अवैध वाहनों की एस्कॉर्टिंग।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बडे़ पैमाने पर हो रहा है अवैध बजरी खनन।


बाड़मेर (कैलाश गोस्वामी)। बालोतरा, पचपदरा, समदडी़, सिणधरी व आर जीटी गुड़ामालानी थाना क्षेत्र में दिन-रात बजरी से भरे अवैध वाहनों का परिवहन दिनोदिन जोर पकड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट के बजरी खनन पर रोक के बावजूद अवैध बजरी खनन में लिप्त लोगों को कानून का कतई डर नहीं है। इसे संबंधित विभागों के जिम्मेदारों की लापरवाही कहे या फिर मिलीभगत कि बेखौफ दिन दहाड़े खुल्लेआम बडे़ पैमाने पर अवैध बजरी का परिवहन किया जा रहा हैं। हर रोज दिन व रात में सेकडो़ं ट्रेक्टर और डम्पर बजरी माफियाओं की ओर से बजरी का अवैध परिवहन कर मरूगंगा लूनी नदी की कोख झलनी की जा रही है। ज्ञातव्य रहे कि ये अवैध बजरी खनन माफिया मोहनगढ़ (जैसलमेर) का एक रवाना बजरी लीज धारक से कटवाते है और इस एक रवाना पर रातभर दर्जनों डम्पर बजरी का अवैध परिवहन कर रहे हैं। एक बात और है कि लीज धारक को 500 सौ मीटर नदी से दूर स्थित खेत में बजरी होने पर लीज दी गई है, मगर ये लीजधारक लूनी नदी के बीचोबीच से दिन-रात में करीब 100 सौ से अधिक ट्रेक्टर व डम्पर बजरी के अवैध रूप से भरवाते है। इसके बारे संबंधित विभागों के जिम्मेदारों को भलीभांति जानकारी में है।


सुप्रीम कोर्ट की रोक के आदेश का उल्लंघन-
दिन-रात बजरी का परिवहन लूणी नदी से समदड़ी, सिणधरी थाना व आरजीटी थाना क्षेत्र के चारों ओर से अवैध बजरी से भरी गाड़िया डम्पर, ट्रेक्टर-ट्रॉली बडी़ संख्या में निकलते है। ये अवैध बजरी खनन माफिया दिन और रात में अच्छा खासा मुनाफा कमाते है। ऐसा नहीं कि किसी को मालूम नहीं है ।माफियाओं के गुर्गे 24 घंटे निगरानी करते है,प्रशासन को पूरी जानकारी है  लेकिन उनकी मिलीभगत या अनदेखी की वजह से यह सब खेल खेला जाता है। पुलिस के साथ ही बजरी माफियाओं ने खनन विभाग के अधिकारियों से साठ-गांठ कर रखी है। खनन माफिया की प्लानिंग के आगे खनन व पुलिस विभाग बौना साबित हो रहा है। खनन विभाग व पुलिस की छतरछाया में बजरी माफिया जमकर चांदी कूट रहे है। बजरी माफिया अपने लग्जरी वाहनों के साथ बाइक से अपने वाहन को एस्कोर्ट करते है। करीब छह किलोमीटर की दूरी में आगे व पीछे वाहन को त्रिस्तरीय एस्कोर्ट उपलब्य करवाते है। बाड़मेर जिले की पुलिस व खनिज विभाग, राजस्व विभाग शांतिपूर्ण तरीके से काली कमाई करने में लगा हुआ है।


शर्मसार करता सिस्टम का रवैया-
बजरी खनन पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना करवाने में संबंधित महकमों के अधिकारी-कर्मचारी कतई गंभीर नजर नहीं रहे हैं। उल्टा इनकी उगाही का रवैया सारे सिस्टम को शर्मसार कर रहा है। 


कब होगी कार्यवाही, बाड़मेर जिले की पुलिस की नाक के नीचे से गुजर रहे अवैध बजरी भरे वाहन-
जहां एक ओर सरकार के दिशा-निर्देश पर आला अधिकारियों द्वारा कानून व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रखने, सड़क हादसों को कम करने के स्थानीय कस्बा, थानों को ओवरलोड वाहनों पर शिकंजा कसने के लिए सख्त दिशा निर्देश दे रखे है। मगर बाड़मेर जिले के समदड़ी पचपदरा आरजीटी थाना क्षेत्र में स्थानीय थाना के जिम्मेदार आला अधिकारियों के निर्देशो की खुलेआम धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे है। आरजीटी, समदड़ी व पचपदरा पुलिस के लिए सरकार व आला अधिकारियों के नियम कानून कोई मायने नही रखता। बाड़मेर जिले के थाने में तो राजनीतिक चादर ओढ़ने वालो के ही बनाये नियम कानून चलते है। पुलिस व खनिज विभाग की नाक के नीचे से सुबह से शाम तक सैकडो़ं बजरी से भरे वाहन जाते हुए देखे जा सकते है। अगर सूत्रों की माने तो  उपखण्ड क्षेत्र से होकर निकलते इन वाहनों से मोटी रकम वसूल होने के कारण कोई ठोस कार्यवाही नही होती है। इसके चलते बजरी माफियाओं व ठेकेदारों, दलालों व वाहन मालिकों के हौसले बुलंद है।
- ओवरलोड वाहनों पर नहीं लग रहा अंकुश-
आर.टी.ओ. व पुलिस व खनिज विभाग के ढुलमुल रवैये के कारण ओवरलोड डंपरों एवं ट्रकों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। यही कारण है कि रामजी के गोल से फलोदी  की ओर जाने वाले मेगा हाइवे से ओवरलोड ट्रक एवं ट्राले दिनरात गुजर रहे हैं जिनसे जान-माल का खतरा बना हुआ है। सड़क का नुकसान होना तो जैसे आम बात हो गई है। दिनरात बजरी से भरे ओवरलोड टेक्टर-ट्रॉली ही नहीं, अपितु ट्रक, डंपर भी खूब दौड़ते हैं। इनमें ओवरलोड डंपरों का तो बुरा हाल है। डंपर खतरनाक तरीके से ओवरलोड भरे होते हैं। इनके चालकों द्वारा डंपरों को तेज एवं गफलत में चलाना तो जैसे आम बात है। यही गति एवं गफलत अनेक बार हादसों का कारण बन चुकी है, लेकिन अब तक इन पर सही ढंग से अंकुश नहीं लग पाया है।


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