फडणवीस मेरे लिए विपक्ष के नेता नहीं, हमेशा अच्छे दोस्त रहेंगे


मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने रविवार को विधानसभा के सत्र में कहा एजेंसी कि वे आज भी हिंदुत्व विच लैंकर गए। सीएम ने कहा कि साथ हैं और इसे कभी नहीं छोड़ सकते हैं। उन्होंने विपक्ष के नेता चुने गए पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तारीफ करते हुए उन्हें जिम्मेदार नेता और अच्छा दोस्त बताया। इससे पहले कांग्रेस के नाना पटोले विधानसभा के निर्विरोध स्पीकर चुने गए। उद्धव उन्हें स्पीकर की चेयर तक किसान परिवार से आते हैं। उम्मीद है कि वह सबके साथ न्याय करेंगे। भाजपा ने शनिवार को किशन कठोरे को स्पीकर पद के लिए नामित किया थालेकिन आज सर्वदलीय बैठक के बाद पार्टी ने उम्मीदवारी वापस ले ली। फडणवीस ने कहा कि हमने सर्वदलीय बैठक में दूसरे दलों की अपील पर कठोरे का नाम वापस लिया, क्योंकि महाराष्ट में निर्विरोध स्पीकर चुनने की परंपरा रही है। 5 साल में कभी सरकार के साथ धोखा नहीं किया: मुख्यमंत्री ठाकरे ने कहा, 'मैं हिंदुत्व विचारधारा के साथ हूं और इसे कभी नहीं छोडूंगा। सबसे भाग्यशाली मुख्यमंत्री हूं, क्योंकि मेरा विरोध करने वाले अब सरकार के साथ हैं और जो पहले साथ थे, अब वे विपक्ष में हैं। फडणवीस से मैंने कई अच्छी बातें सीखीं। हमेशा उनका दोस्त रहूंगा। उन्हें विपक्ष का नेता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नेता कहूंगा। पिछले 5 साल में मैंने कभी सरकार के साथ धोखा नहीं किया। अगर वे (फडणवीस) अपने वादे पर कायम रहते तो हमारे बीच कभी टकराव नहीं होता। मैंने यहां आने के बारे में कभी नहीं सोचा था, लेकिन जनता के आशीर्वाद से यह असवर मिला।' पटोले विदर्भ की सकोली सीट से चार बार के विधायक: नाना पटोले (56) विदर्भ की सकोली सीट से चार बार के विधायक हैं। 2014 में उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थामा था और लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। हालांकि, दिसंबर 2017 में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ अनबन के कारण उन्होंने भाजपा छोड़कर वापस कांग्रेस का हाथ थाम लिया था। शिवसेना ने शनिवार को फ्लोर टेस्ट पास किया था: महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (शिवसेना-राकांपा और कांग्रेस) सरकार ने विधानसभा के विशेष सत्र में शनिवार को 169 वोटों से विश्वास मत (फ्लोर टेस्ट) हासिल कर लिया था। भाजपा ने इस सत्र पर सदन में आपत्ति जताई और विश्वास मत से पहले उसके 105 विधायकों ने वॉकआउट कियाजबकि वोटिंग के दौरान एआईएमआईएम, माकपा और मनसे के 4 विधायक तटस्थ रहे। सरकार के विरोध में कोई वोट नहीं पड़ा। गठबंधन में शामिल तीनों दलों के पास 154 विधायक हैं, सरकार को इससे 15 वोट ज्यादा मिले।


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