19 जनवरी को आखर' में राजस्थानी साहित्यकार तेजसिंह जोधा होगें रूबरू


कार्यालय संवाददाता


जयपुर। प्रभा खेतान फाउण्डेशन द्वारा ग्रासरूट मीडिया फाउण्डेशन के सहयोग से राजस्थानी साहित्य, कला व संस्कृति से रूबरू कराने के उद्देश्य से 'आखर' श्रृंखला में रविवार, 19 जनवरी को राजस्थानी भाषा के साहित्यकार डॉ. तेजसिंह जोधा से उनके साहित्यिक सफरनामे पर चर्चा की जायेगी। श्री सीमेंट द्वारा समर्थित इस कार्यक्रम का आयोजन होटल आईटीसी राजपुताना में किया जायेगा। उनके साथ संवाद डॉ गजादान चारण। इससे पूर्व आखर सीरीज़ में प्रतिष्ठित राजस्थानी साहित्यकारों डॉ. आईदान सिंह भाटी, डॉ. अरविंद सिंह आशिया, रामस्वरूप किसान, अंबिका दत्त, कमला कमलेश और भंवर सिंह सामौर, डॉ. ज्योतिपुंज, डॉ. शारदा कृष्ण, डॉ. जेबा रशीद, देवकिशन राजपुरोहित, मोहन आलोक, मधु आचार्य, जितेन्द्र निर्मोही, डॉ मंगत बादल, दिनेश पंचाल, मनोहर सिंह राठौड़, पं. लोकनारायण शर्मा, बुलाकी शर्मा, कुंदन माली, बसंती पंवार, आनंद कौर व्यास और किशन लाल वर्मा के साथ चर्चा की जा चुकी हैं।


परिचयः डॉ तेजसिंह जोधाः डॉ तेजसिंह जोधा का जन्म 7 जुलाई 1950 नागौर, राजस्थान में हुआ। तेजसिंह जोधा ने 'स्वातंत्रयोत्तर राजस्थानी काव्य की नई प्रवृत्तियां' तथा 'सन् 1857 की क्रान्ति और राजस्थानी काव्य' पर शोध प्रबन्ध पर लघु शोध कर डॉक्टर की उपाधि प्राप्त की है। यह कॉलेज शिक्षा में प्रोफेसर के पद से सेवानिवत्त हुये है। इनकी राजस्थानी व हिन्दी भाषा में अनेकों पुस्तकें प्रकाशित हुई है। राजस्थानी भाषा में "ओळयूं री ओळयां", "डूंगजी-जवाहरजी'', "राजस्थान अक", "सिरजण' इत्यादि कवितायें व कहानियां प्रकाशित हुयें है। इनके अलावा तेजसिंह जोधा ने राजस्थानी मासिक 'माणक', 'जागती जोग' और 'दीठ में सम्पादन भी किया है। डॉ तेजसिंह जोधा को क्षेत्रीय, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर लगभग अनेकों संस्थाओं द्वारा साहित्यिक योगदान के लिए पुरस्कृत व सम्मानित किया गया है। सन् 2018 में इन्हें "कन्हैयालाल पारख राजस्थानी साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया।


Comments

Popular posts from this blog

जानिए छिपकली से जुड़े शगुन-अपशगुन को

मुख्यमंत्री सोमवार को जारी करेंगे कोरोना की नई गाइड लाइन

शिक्षा विभाग ने स्कूल सफाई कर्मचारियों की उपेक्षा की-शासन नया परिपत्र जारी करे - कर्मचारी संघ