29 जनवरी तक चलेगा दस दिवसीय मल्टी- जॉनर कल्चर फेस्टिवल


o शिल्प, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और रंगमंच का संयोजन
o कला एवं संस्कृति मंत्री ने सोमवार शाम जेकेके के शिल्पग्राम में किया पिंकसिटी फेस्टिवल का उद्घाटन


‘हस्तशिल्प व कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित करना हमारी जिम्मेदारी : कल्ला


जयपुर, 20 जनवरी। भारत जैसे देश में कुटीर उद्योगों का महत्व कभी भी समाप्त नहीं होगा। हस्तशिल्प, कुटीर व खादी उद्योगों को प्रोत्साहित करना हमारी जिम्मेदारी है। हस्तशिल्प से जुड़े सभी कारीगरों को एक मंच पर लाना, उनके कार्यो को प्रेरित करना और लोगों को दैनिक जीवन में इनके उत्पादों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना पिंकसिटी फेस्टिवल का उद्देश्य है। इस फेस्टिवल में आगंतुक यह भी देख सकेंगे कि विभिन्न हस्तशिल्प उत्पाद कैसे तैयार किए जाते हैं। यह बात राजस्थान सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने सोमवार शाम जवाहर कला केंद्र (जेकेके) के शिल्पग्राम में पिंकसिटी फेस्टिवल के उद्घाटन के अवसर पर कही। यह फेस्टिवल 29 जनवरी तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक चलेगा। इस अवसर पर जेकेके के अतिरिक्त महानिदेशक (टेक्निकल) श्री फुरकान खान ओर अतिरिक्त महानिदेशक (प्रशासन) श्री ललित भगत भी उपस्थित थे।



जेकेके की महानिदेशक श्रीमती किरण सोनी गुप्ता ने स्वागत भाषण के तहत कहा कि नई पीढ़ी विभिन्न पारंपरिक कलाओं व शिल्पों को धीरे-धीरे भूल रही है। हमारे युवाओं को विलुप्त हो रहे विविध कला रूपों को संरक्षित करने के लिए सशक्त बनाना भी इस फेस्टिवल का उद्देश्य है।
उद्घाटन के बाद मुश्ताक खान के ‘मांगणियार सिम्फनी‘ की ओर से विशेष प्रस्तुति दी गई। सिम्फनी द्वारा लोकप्रिय राजस्थानी लोक गीत ‘निम्बूड़ा निम्बूड़ा‘ और ‘केसरियो हजारी गुल रो फूल‘ गाया गया। सिम्फनी के कलाकारों में निसार, अशरफ, सलीम (गायन); स्वरूप (ढोलक), अलादीन (वीणा), दिलावर व मंज़ूर (खड़ताल); निजाम (अलगोजा); माजिद (मुरली); घेवर (मोरचंग); हुसैन (सारंगी); तयम (ढोल); खैती (चीप) व भूरा (मटका) शामिल थे। उपस्थित दर्शकों ने राजस्थान के चकरी, तेराताली, भवई, घूमर, भपंग व कालबेलिया सहित विभिन्न पारंपरिक नृत्यों व संगीत का भी आनंद लिया।
जेकेके में दोपहर में राज्य के विभिन्न भागों की लोक कला की प्रस्तुतियां दी गई। आगंतुकों ने कठपुतली शो का आनंद लिया जिसमें कठपुतलियां चमकीली व रंग-बिरंगी पोशाक पहने हुए थीं। ‘बहरूपिया’ बने युवक-युवतियों को कृष्ण, शिव जैसे पौराणिक किरदारों व शिकारी सहित विभिन्न रूपों में तैयार किया गया था। फेस्टिवल में जादूगर ने भी आगंतुकों के लिए मनोरंजक जादू का प्रदर्शन किया।



इनके अलावा लोक संगीतकार, बनवारी लाल द्वारा अलगोजा वादन के तहत राजस्थानी शास्त्रीय धुनों की सुमधुर प्रस्तुति दी गई, वहीं राजस्थानी लोक गायकों द्वारा ‘भोपा गायन‘ पेश किया गया। फेस्टिवल के प्रथम दिन का एक अन्य मुख्य आकर्षण ‘कच्छी घोड़ी’ रहा। यह नृत्य का एक विशिष्ट रूप था, जिसमें चमकदार वस्त्र पहनेे पुरुषों ने लोक धुनों पर नृत्य किया।


एग्जीबिशन -
पिंकसिटी फेस्टिवल के तहत लगाई गई एग्जीबिशन में करीब 100 स्टाल पर मिट्टी के बर्तन, हस्तशिल्प उत्पाद, पारंपरिक आभूषण, पारंपरिक पोशाक, मसाले व अन्य सामग्रियां उपलब्ध हैं। ये उत्पाद बिक्री के लिए भी उपलब्ध हैं। एग्जीबिशन में हस्तकला से बनाई जाने वाली विभिन्न सामग्रियों के निर्माण का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।


21 जनवरी के कार्यक्रम -
फेस्टिवल के दूसरे दिन (21 जनवरी को) दोपहर 2.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक कठपुतली, ‘बहरूपिया‘, जादूगर, अलगोजा प्रस्तुतियां, भोपा गायन व कच्छी घोड़ी नृत्य होंगे। शाम 4 बजे से 5.30 बजे तक ’रम्मत’ पेश किया जाएगा। शाम 6.30 बजे से रात्रि 8.30 बजे तक नगाड़ा प्रदर्शन, मांगणियार सिम्फनी - ‘मुश्ताक’, डेरू, बाड़मेर के लाल अंगी गेर, चूरू के भपंग, भवई और ढप थाली जैसी प्रस्तुतियां होगी।


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