जेके लोन के 77% वार्मर काम नहीं कर रहे थे


जयपुर। कोटा के जेके लोन अस्पताल के एसएनसीयू में 3087 बच्चे भर्ती किए गए जिनमें से 622 से अधिक बच्चों की मौत हुई। यह आंकड़ा 20.2 प्रतिशत है जबकि अन्य अस्पतालों में बच्चों की मौत का आंकड़ा 10.5 रहा है। यानि कि अन्य अस्पतालों की तुलना में कोटा के जेके लोन अस्पताल में दोगुना बच्चों की मौत हुई। दिल्ली से कोटा के जेके लोन अस्पताल पहुंची जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। कमेटी ने रिपोर्ट में कहा है कि अस्पताल के 77 प्रतिशत वार्मर काम नहीं कर रहे थे। साथ ही कहा है कि बच्चों की मौत रोकने के लिए जल्दी से जल्दी रोकने के लिए जो भी संभव हो, वह करना होगा। यदि कोई भी जरूरत हो तो उसके लिए केन्द्र तैयार है। जेके लोन अस्पताल में 33 दिन में 105 बच्चों की मौत के मामले के उजागर के बाद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, दिल्ली की टीम जेके लोन अस्पताल पहुंची। यहां निरीक्षण कर तथ्यात्मक रिपोर्ट ली।


डिप्टी सीएम मृत बच्चों के परिजनों से मिले: पायलट शनिवार को छत्रपुरा में संजय रावल के घर पहुंचे। जिनके 5 माह के बेटे तेजस की 23 दिसंबर को जेकेलोन में निमोनिया से मृत्यु हुई थी। रावल ने बताया कि बेटे के इलाज में हमारी जमा पूंजी खत्म हो गई। इसके बाद पायलट विज्ञाननगर में शुभम हाड़ा के घर पहुंचे। हाड़ा ने बताया कि उसकी पत्नी कोमल हाडा के सिजेरियन हुआ था। वहां की खिड़की-दरवाजे ट्टे पड़े थे। साहब एक तरफ तो सरकार कहती कि बेटी बचाओ और जब हम हमने बेटी को बचाने के लिए संघर्ष किया तो जेकेलोन अस्पताल की अव्यवस्थाओं ने हमारी बेटी को छीन लिया। ये हमारी पहली संतान थी।


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