फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल ने सल्फास खा चुके युवक की एकमो  द्वारा इलाज कर बचाई जान


·        रेनवाल निवासी मरीज ने अपनी पारिवारिक समस्याओं के चलते सल्फास नामक जहरीला पदार्थ खा लिया था, जिससे उसका ब्लड प्रेशर सामान्य ब्लड प्रेशर से भी बहुत कम हो गया था और इजेक्शन  फ्रेक्शन 10% तक गिर गया था । मरीज़ मरणासन्न अवस्था में पहुंच  गया था ।


·        एक्स्ट्रा-कॉरपोरियल मैम्ब्रेन ऑक्सीजेनेशन यानि की ECMO डिवाइस आधुनिक  लाइफ सपोर्ट सिस्टम  है। यह डिवाइस शरीर को उस वक्त ऑक्सीजन सप्लाई करने में मदद करता है, जब किसी मरीज के फेफड़े या दिल काम नहीं कर पाते हैं।  इस डिवाइस का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब मरीज सांस ले पाने के प्राकृतिक तरीकों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा हो, या हृदय अत्यधिक कमजोर हो ।


·        इस मरीज के इलाज के लिए चिकित्सा दल में डॉ प्रवीण कनोजिया, कंसलटेंट- इंटरनल मेडिसिन, डॉ राकेश चित्तौड़ा, एडीशनल डायरेक्टर- एडल्ट सीटीवीएस ,डॉ मुमताज अली, सीनियर कंसलटेंट इंटेन्सिव केयर एंड क्रिटिकल केयर, इमरजेंसी  मेडिसिन, डॉ मुक्ता भटनागर, कार्डियक एनेस्थीसिया, डॉ विनीता शर्मा, कार्डियक सर्जरी एवं डॉ रोहित सक्सैना, पर्फ्युज़निस्ट  शामिल  थे ।


 जयपुर:  22 वर्षीय युवक की जहर खाने के 36 घंटे बाद भी एकमो  द्वारा सफलतापूर्वक इलाज कर जान बचा कर, फॉर्टिस हॉस्पिटल जयपुर ने फिर एक बार अपनी उत्कृष्ट सेवाओं का उदाहरण दिया है।


फॉर्टिस हॉस्पिटल के विशेषज्ञों की टीम ने एक्स्ट्रा-कॉरपोरियल मैम्ब्रेन ऑक्सीजेनेशन यानि की ECMO डिवाइस आधुनिक  लाइफ सपोर्ट सिस्टम द्वारा मरीज का इलाज कर उसकी जान बचाई है। एसे केस में जहर का सेवन करने के बाद मृत्यु की संभावना 100% होती है। रेनवाल निवासी की स्थिति बहुत गंभीर थी क्योंकि उसका ब्लड प्रेशर सामान्य से भी बहुत कम था । तथा हृदय का  फ्रेक्शन 10% तक गिर गया था।


इस बारे में डॉ प्रवीण कनोजिया, कंसलटेंट-  इंटर्नल मेडिसिन, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर ने बताया, "रेनवाल निवासी मरीज ने अपनी पारिवारिक समस्याओं के चलते एक प्रकार का जहरीला पदार्थ "सल्फास" का सेवन कर लिया था। यह जहर  काफी असर कारक है और मरीज को जहर का सेवन के 36 घंटे बाद अस्पताल लाया गया । आमतौर पर इस प्रकार का जहर खाने वाले रोगी के बचने की संभावना बहुत कम होती है लेकिन हमारे विशेषज्ञ चिकित्सकों ने एक टीम का गठन किया जिसमें कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर  (सीटीवीएस), इंटरनल मेडिसिन और क्रिटिकल केयर के दल ने एकमो नामक तकनीक का प्रयोग किया जिसे उपयोग में लेने के लिए विशेष कुशलता की आवश्यकता होती है। हमें इस बात की खुशी है कि मरीज को बचा लिया गया है और अब उसकी हालत में सुधार है"।


एकमो तकनीक के लिए हृदय  शल्य चिकित्सक (हार्ट सर्जन ) एवं क्रिटिकल केयर टीम  की  पारंगत टीम द्वारा शरीर के जांघों को नसों मे नलिया डालकर, मशीन (एकमो) से  जोड़ दिया जाता है। इन नलियों  के द्वारा शरीर के अशुद्ध रक्त को मशीन द्वारा शुद्ध कर वापस  शरीर मे भेजा जाता है । साथ ही मरीज के खून के तापमान का नियंत्रण भी मशीन दवारा किया जाता है । यह मशीन मरीज के दिल व फेफड़ो का काम करती है ताकि उन अंगो को आराम दिया जा सके। एक बार दिल व फेफड़े स्वस्थ होने लगते है , तो मशीन को धीरे-धीरे कम करके हटा लिया जाता है।


यह तकनीक न सिर्फ जहर के केसों  के लिए  कारगर है अपितु कोई भी स्थिति  जिसमे हार्ट या फेफड़े सुचारु रूप से काम कर रहे हो, उनमें भी मरीज को बचाने का एकमात्र उपाय है, जैसे कि एडवांस निमोनिया, स्वाइन फ्लू , गंभीर हृदयाघात  या अत्याधुनिक  कमजोर दिल कि स्थिति इत्यादि।


Comments

Popular posts from this blog

जानिए छिपकली से जुड़े शगुन-अपशगुन को

शिक्षा विभाग ने स्कूल सफाई कर्मचारियों की उपेक्षा की-शासन नया परिपत्र जारी करे - कर्मचारी संघ

मुख्यमंत्री सोमवार को जारी करेंगे कोरोना की नई गाइड लाइन