सरकार से नई आबकारी नीति पर राहत देने की अपील 


जयपुर। पर्यटन के चहुमुंखी विकास के लिए देश एवं विदेश में अच्छी मार्केटिंग की जरुरत है। इस उद्देश्य से राज्य के पर्यटन विभाग को दिया जाने वाले बजट को गत वर्ष के मुकाबले दुगुना किया जाना चाहिये। शहर में सिविल लाइन स्थित एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में इंडियन हेरिटेज होटल्स एसोसिएशन (आईएचएचए) के महासचिव रणधीर विक्रम सिंह ने राज्य सरकार से यह अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन विभाग के बजट की इस बढ़ोतरी की भरपाई प्रदेश मे चल रहे हजारों होटल व गेस्ट हाउस को नियमित कर हो सकती है।



प्रेसवार्ता में आईएचएचए के अतिरिक्त होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान, रेस्तरो बार वेलफेयर एसोसिएशन, जयपुर होटल एसोसिएशन, फेडरेशन ऑफ हॉस्पिटैलिटी एंड टूरिज्म ऑफ राजस्थान और राजस्थान एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। रणधीर विक्रम सिंह ने बताया कि राज्य में चल रहे हेरिटेज होटलों से राज्य के गाँवों का विकास हो रहा है और गाँवों के युवाओं को रोजगार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हेरिटेज होटल्स के आबकारी लाइसेंस फीस में 500 से 800 प्रतिशत बढ़ोतरी और होटल एवं रेस्टोरेंट्स की आबकारी लाइसेंस फीस में 3 से 8 गुणा बढ़ोतरी की गई है, जो कि राज्य के पर्यटन उद्योग एवं हेरिटेज होटल्स पर विपरीत प्रभाव डालेगा। इससे हेरिटेज देखने एवं इनमें ठहरने वाले पर्यटकों में कमी आएगी जिससे ग्रामीण इलाकों में पर्यटन का विकास रुक जायेगा। उन्होंने कहा कि आबकारी लाइसेंस फीस को विगत वर्ष 2019-20 कि नीति के तहत ही रखना चाहिये। इस अवसर पर होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष कुलदीप सिंह चंदेला ने कहा कि वर्तमान में चल रहे होटलों को नियमित करने हेतु, यथा स्थिति में चल रहे होटलों की भूमि का आरक्षित दर का 25 प्रतिशत राशि वसूल कर नियमित करने से राज्य सरकार को लगभग 2 हजार करोड़ तक का राजस्व मिलेगा। इस राशि को पर्यटन विकास, मातृ एवं शिशु चिकित्सा के आधुनिकीकरण के लिये खर्च किया जा सकता है।


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