*अमृता देवी एवं पर्यावरण दिवस*

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*अमृता देवी एवं पर्यावरण दिवस*



🌲राजस्थान की इस वीरांगना ने पेड़ के लिए कटवा दिया था सिर, आज भी लोगों के दिलों में बसी है महिला की कुर्बानी.


 


 जयपुर। हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) मनाया जाता है। जिसका मुख्य उद्देश्य है लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना। विश्व में लगातार प्रदूषण बढ़ा जा रहा है जिससे हमारे जीवन पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने 5 जून 1972 में इस दिवस की नींव रखी। जिसके बाद से हर साल इस दिन विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। जब भी पर्यावरण संरक्षण की बात की जाती है तो राजस्थान की वीर नारी *अमृता देवी'* को याद किये बगैर चर्चा समाप्त नहीं हो सकती।


राजस्थान के जोधपुर शहर से 28 किलोमीटर दूर खेजड़ली में हरे वृक्ष खेजड़ी के लिए अमृता देवी विश्नोई के एक आह्वान पर 363 लोगों ने खुद को बलिदान ( Khejarli Aandolan ) कर दिया और समूचे विश्व को प्रकृति और पर्यावरण बचाने की प्रेरणा दी। खेजड़ली गांव में *अमृतदेवी बिश्नोई तथा उनकी तीन मासूम पुत्रियों आसु, रतनी, भागु ने पेड़ों की रक्षा के लिए पेड़ों से लिपट कर यह आह्वान किया। 'पेड़ बचाने के लिए यदि शीश भी कट जाता है तो यह सौदा सस्ता है' और पेड़ों के लिए खुद को बलिदान ( Khejarli Sacrifice ) कर दिया। 363 महिला-पुरुषों ने पर्यावरण संरक्षण को अपना धर्म मानते हुए *28 अगस्त 1730 को अपने प्राणों का बलिदान कर समाज को पेड़ों को बचाने की प्ररेणा दी। सरकार का वन विभाग पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान देने वाले व्यक्तियों को *अमृता देवी विश्नोई स्मृति* पुरस्कार प्रदान करता है।


*भारतीय मजदूर संघ हर वर्ष 28 अगस्त को *अमृता देवी* के स्मृति में पर्यावरण दिवस मनाता है, इस अवसर पर भामस कार्यकर्ता द्वारा बृहत स्तर पर बृक्षारोपण एवं संगोष्ठी आदि के द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जाता है.


अमृता देवी के नाम पर खेजड़ली में पर्यावरण संरक्षण मेला लगता है और राजस्थान, वन विभाग पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार भी देता है। अमृतादेवी के लिए कई कवियों ने कविताएं भी लिखी हैं। 


 


आलेख: *यतींद्र कुमार 


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