कोरोंना  का भय 

कोरोंना  का भय 


 


          ( डॉ. विमलेश विनोद कटारा).    वरिष्ठ चिकित्सक                         कोरोना सबको होगा, ये ध्यान रहे. अमेरिका मे एक कैदी को जब फांसी की सजा सुनाई, तब वहां के कुछ वैज्ञानिकों ने विचार किया कि इस कैदी पर एक प्रयोग किया जाये, तब उस कैदी को बताया गया कि उसे फांसी की बजाय विषधर कोबरा से डसवा कर मारा जाएगा. फांसी वाले दिन उसके सामने एक बड़ा विषधर सांप लाया गया तथा कैदी की आँखो पर पट्टी बांध कर कुर्सी पर बाँध दिया गया. इसके बाद उसे साँप से ना डसवा कर सेफ्टी पिन चुभाई गई. आश्चर्य की बात यह हुई कि कैदी की 2 सेकंड मे ही मौत हो गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट मे कैदी के शरीर मे "व्हेनम सदु्श्यम" विष मिला. ये विष कहाँ से आया जिससे कैदी की मृत्यु हुई ? पोस्टमार्टम के बाद पता चला कि ये विष कैदी के शरीर मे मानसिक डर की वजह से उसके द्वारा ही उत्पन्न हुआ था. अतः तात्पर्य ये है कि हमारी अपनी मानसिक स्थिति के अनुसार पॉजिटिव अथवा नेगेटिव एनर्जी उत्पन्न होती है, तदनुसार ही हमारे शरीर मे हार्मोन्स पैदा होते है. 90 फीसदी बीमारी का मूल कारण नकारात्मक विचार उर्जा का उत्पन्न होना है. आज मनुष्य गलत विचारो का भस्मासुर बना कर खुद का विनाश कर रहा है. मेरे मतानुसार कोरोना को मन से ना लगाओ. 5 वर्ष से लेकर 80 वर्ष तक के लोग नेगेटिव हो गये है. आंकड़ों पर ना जावे, आधे से ज्यादा लोग व्यवस्थित है. मृत्यु पाने वाले केवल कोरोना की वजह से नही बल्कि उन्हे अन्य बीमारियां भी थी, जिसका मुकाबला वे कर नही सके. ये याद रखे कोरोना की वजह से कोई भी घर पर नही मरा, सबकी मृत्यु अस्पताल मे ही हुई.


कारण अस्पताल का वातावरण एवं मन का भय इसलिए अपने विचार सकारात्मक रखे ओर आनंद से रहे l


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