मिलावटी तेल, नकली देशी घी बिक रहा धड़ल्ले से, जांच के नाम पर रस्म अदायगी 

मिलावटी तेल, नकली देशी घी बिक रहा धड़ल्ले से, जांच के नाम पर रस्म अदायगी 



संभागीय आयुक्त डाॅ समित शर्मा के निर्देश पर हुई कार्रवाई


 


बालोतरा 11 सितम्बर(कैलाश पुरी गोस्वामी) । बाज़ार में मिलावटी खाध्य पदार्थों की बिक्री धड़ल्ले से जारी है मुनाफाखोरों को इस बात की कतई परवाह नहीं होती कि आदमी की जान जाए या रहे। वे मिलावट कर मुनाफा कमाएंगे ही। इसी चक्कर में बालोतरा के बाजार में मिलावटी मावा और घी धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। जिम्मेवार इस ओर से आंखें मूंदे बैठे हैं। कार्रवाई के नाम पर कभी कभार नमूने ले लिए जाते हैं। मगर बाद में क्या हुआ, इसका पता किसी को नहीं चलता। 



 


घी हर घर तक पहुँचता है मगर वह मिलावटी है या शुद्ध, इसका पता नहीं चलता। जबकि मावा सिंथेटिक कपड़ा धोने का सर्फ पाम आॅयल आदी मिलाया जाता है। पाम ऑयल सस्ता मिलता है। मिलावटी एसेंस मिलाकर इसे असली दिखाया जाता है। पाम ऑयल पचास से साठ रुपए लीटर के हिसाब से मिल जाता है, 


उजाला के नाम पर बिक रहा घी नकली ही होता है 


पूजाभंडारों में जो घी मिलता है वह नकली ही होता है। दुकानदार भी कह देते हैं कि यह खाने के लिए नहीं है। इसे सिर्फ पूजा के लिए इस्तेमाल करें। ऐसे घी बहुत ही सस्ते में बाजार में मिल जाते हैं। 


पैदाकरते हैं कई रोग : डॉ. अर्जुन विश्नोई का कहना है कि मिलावटी सरसों तेल और घी खाने से बचना चाहिए। क्योंकि ऐसे तेल और घी हृदय रोग और लीवर के रोगों के जनक होते हैं। नकली घी से कोलेस्ट्राॅल बढ़ेगा। इससे हृदयाघात की संभावना पचास फीसदी ज्यादा हो जाती है। मिलावटी तेल से लीवर से संबंधित रोगों के होने की आशंका भी 30 से 35 प्रतिशत बढ़ जाती है। 


 


नकली घी को पहचाना जा सकता है आसानी से 



बाजारमें नकली घी 200 रुपए से लेकर 250 रुपए किलो के भाव मिल जाएगा। जबकि असली घी पांच सौ छः सौ रुपए किलो मिलेगा। फिर नकली घी को थोड़ा हाथ में लेकर मसलें। उसमें दाने-दाने से दिखाई देंगे। अगर वह भी दिखे तो उसे सूंघने पर उसमें तेज महक आएगी। लेकिन जल्द ही यह महक चली जाएगी। ऐसा सिर्फ नकली घी के साथ होता है। असली और शुद्ध घी की महक कभी कम नहीं होती। 


 


प्रशासन द्वारा बीच-बीच में कहीं से भी नमूने लिए जाते हैं। इसके बाद इन्हें जयपुर जांच के लिए भेजा जाता है। अगर ये मिलावटी पाए जाते हैं तो कार्रवाई भी होती है। मगर नियम थोड़े और कड़े बनाए जाने चाहिए, जिससे कारोबारी को जेल से निकलने में समय लगे। तभी जाकर मिलावट का गोरखधंधा बंद होगा। 


कैसे पहचानें मिलावटी तेल 


मिलावटीतेल की सबसे बड़ी पहचान है कि जब हम उसे गर्म करेंगे तो पानी की तरह उसमें बुलबुले उठते दिखाई देंगे। ऐसा तेल हवा के संपर्क में आने पर उड़ जाता है। इससे बने सब्जी या पराठे खाएंगे तो स्वाद में थोड़ी कड़वाहट महसूस होगी। 


घी में मिलाते हैं डालडा और आलू, फिर खुश्बू के लिए सेंट 


घी में डालडा और आलू मिलाया जाता है। इसके अलावा नकली घी की पहचान मिटाने के लिए उसमें तेज सेंट को मिला दिया जाता है। जिससे असली घी की खुशबू के भ्रम में नकली घी की पहचान मिट जाए। 


क्षेत्रफल की दृष्टि से बाड़मेर लम्बा चोड़ा है लेकिन एक ही अधिकारी के भरोसे चल रहा है



 


नकली घी एवं मावा किया जब्त


 संभागीय आयुक्त जोधपुर डा. समित शर्मा के निर्देश पर शुक्रवार को विशेष दल द्वारा बाडमेर जिले में नकली मावे की गोपनीय सूचना पर जिले में जॉच के दौरान नकली घी एवं मावा जब्त किया गया।


उन्होंने पचपदरा तहसील के ग्राम कुडी में नरसींग पुत्र राधाकिशन पालीवाल, बुधाराम पुत्र जगराम विश्नोई एवं पपीयाराम पुत्र भीखाराम पालीवाल द्वारा चलाए जा रहे मावे के भट्टे का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मावा संदिग्ध पाए जाने पर जांच हेतु मावे के सैम्पल लिये गये। इसी प्रकार तहसील सिवाना के ग्राम कुण्डल गांव के बीचोबीच बेधड़क होकर खुल्ले आम स्थानीय एक दो लोगो की मदद से नकली घी का कारोबारी सुरजीत कुमार पुत्र रामराज यादव हाल निवासी कुण्डल के मावे का भी सैम्पल लिया गया। इस दौरान 40 लीटर घी जब्त कर जॉच हेतु घी का सैम्पल लिया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार व्यक्ति लंबे समय से काम कर रहे हैं लेकिन औपचारिकता निभाने के लिए प्रशासन यदा-कदा कार्रवाई करता है और फिर वापस पनाह देकर शुरू करवा दिया जाता है ।


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