सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भी दरकिनार किया राज्य सरकार नेे

                सेवानिवृत्त कर्मचारियों का दर्द


सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भी दरकिनार किया राज्य सरकार नेे  श्री करनपुर 16 सितम्बर। जीवन के अंतिम पड़ाव पर सेवानिवृत्त कर्मचारी जो अनुदानित शिक्षण संस्थाओं से राजकीय सेवा मे समायोजित हुए थे उन्हें लम्बे न्यायिक संघर्ष के पश्चात सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से न्याय मिला परन्तु सितंबर 2018 में देश के शीर्षस्थ न्यायालय के निर्णय के दो साल बाद भी राज्य सरकार ने पुरानी पेंशन योजना के अनुसार उनकी पेंशन नही शुरू की। सेवानिवृत्त हो चुके कुछ कर्मचारी तो इसी अधूरी उम्मीद को लिए जीवन यात्रा पूर्ण भी कर चुके हैं।


  सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारीयों के बहुत दुष्कर था कि सात साल पहले प्राप्त लाखों रुपये ब्याज सहित सरकारी खजाने में जमा करवाना जमा परन्तु उच्च न्यायालय के निर्णय की अनुपालना मे गंगानगर माध्यमिक शिक्षा कार्यालय के अधीन आने वाले कर्मचारियों ने अनुदानित संस्थाओं से प्राप्त पी एफ फण्ड के लाखों रुपये ब्याज सहित जमा करवा दिये । यद्यपि अन्य शिक्षा कार्यालयों ने न्यायालय के आदेशों की अनुपालना ही नहीं की।


   न्यायालय पर भरोसा कर अपनी जमा पूंजी अथवा जैसे तैसे व्यवस्था कर अनुदानित संस्थाओं से प्राप्त लाखों रुपये ब्याज सहित सरकारी खजाने मे जमा करवाने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारी का दर्द कोढ मे खाज समान पीड़ादायक हो चुका है। परिवार मे आय का कोई अन्य स्त्रोत नहीं पर बजुर्ग सेवानिवृत्त कर्मचारियों की बेबसी अकथनीय है। कुछ कर्मचारियों ने अपनी शादी लायक लड़कियों के लिए एकत्रित सारी उम्र की पूंजी जमा करवा दी तो कुछ ने उधार मांग कर भी खजाने मे धन जमा किया। 


     दुर्भाग्य यह कि न तो विभाग सेवानिवृत्त बजुर्ग कर्मचारियों को खजाने मे जमा उनके लाखों रुपये वापिस लौटा रहा है एवं न ही राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को लागू कर पेंशन शुरू कर रही है।


      राजस्थान समायोजित शिक्षाकर्मी वैलफेयर सोसायटी के प्रदेशाध्यक्ष सरदार सिंह बुगालिया के आह्वान पर राज्य सरकार से सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को लागू करवाने हेतु जागृति अभियान चलाया जा रहा है ।


इसी अभियान के अन्तर्गत संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष कमलजीत शर्मा ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को तुरंत लागू करने की मांग की व राज्य सरकार द्वारा देश की सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध राजस्थान उच्च न्यायालय मे पुनः विचार याचिका के आवेदन को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया व इसे न्याय व्यवस्था के नाम पर क्रूर मजाक बताया। उम्र के अंतिम पड़ाव पर बैठे व्यक्ति के पास सांसो की पूंजी भी बहुत कम है। कोई नही जानता कि अंतिम सांस व अंतिम लडा़ई मे से पहले कौन रुकेगी । अब तो यक्ष प्रश्न यही है सरकार की संवेदनशीलता कब जागेगी व देश की सर्वोच्च अदालत के निर्णय को कब लागू किया जायेगा।    


 उक्त वेदनाओं का ज्ञापन उपजिलाधीश महोदय के माध्यम से मुख्यमंत्री महोदय को प्रेषित किया गया। ज्ञापन सौपने वाले शिष्टमंडल मे संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष कमलजीत शर्मा ,सेवानिवृत्त कर्मचारी अशोक पांधा, विजय गावा, शंकर लाल वर्मा बनारसी दास आदि शामिल थे। 


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