विवाह तबाही की जड़ है

विवाह तबाही की जड़ है - श्री विराग सागर महाराज


भिण्ड/कोडरमा 24 सितंबर l परम पूज्य गणाचार्य 108 श्री विरागसागर जी महाराज ने परमात्मा प्रकाश में बताया विषय वासना में आसक्त प्राणी हर गुण से रहित होता है ना उसमें वेदुस्यता होती है ना मनुष्यता गाड़ी में पेट्रोल ना हो तो गाड़ी नहीं चलती पुण्य हो तभी इच्छाएं सफल होती है स्वप्न ऐसे देखो जो साकार हो पुण्य कमाओ पर उसकी आकांक्षा ना करो कल्पवृक्षों से मांगना पड़ता है भोग भूमि में मुगलिया ही जन्म लेते हैं आकांक्षाएं पाप है पुण्य है तो अभिलाषा करना ही नहीं पड़ता विवाह तबाही की जड़ है अतः मैंने बचपन से ब्रह्मचर्य का संकल्प ले लिया था शादी स्वेच्छा से ना करें वह बाल ब्रह्मचारी थे सील में जो आनंद है वह वासना में नहीं है तृष्णा नागिन का विष नहीं उतरता भेद विज्ञानी पश्चाताप करते हैं पाप के बाद दुनिया पक्षताती है पहले विचार करें तो व्यक्ति पाप नहीं कर सकता मिथ्या दृष्टि पाप के बाद पश्चाताप भी नहीं हैl इज्जत परिवार तक की और प्राण ब्याज में गई आनंद से उत्पन्न समृद्धि भाव कि नहीं जानोगे तो सुख ना मिलेगा खाली दिमाग शैतान का होता है चिंतन सत्य संगति में रहने से बढ़ते हैं l मंदिर मूर्ति सूत्र पाठ जाप में गतिशीलता आएगी तो फुर्सत ना मिलेगी भगवान शीतलनाथ जी का भदौली भद्रपुर इटखोरी वर्तमान विशालतम मंदिर बनने जा रहा है l वैष्णव जैन धर्मों का संगम है आशीर्वाद है सुरेश झंझरी जी को समस्त समाज देश को लेकर चले धर्म ही आपको अंत में पार लगाएगा l उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा, नवीन गंगवाल कोडरमा ने दीी l


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