डॉ० पी पी सिन्हा की कहानी अजूं दास की जुबानी

 डॉ० पी पी सिन्हा की कहानी अजूं दास की जुबानी 


 



मिलनसार व्यक्तित्व के धनी डॉ० पी पी सिन्हा भाई साहब से मेरी पहली मुलाकात अररिया जिला के एक कविसम्मेलन में हुई थी| उनके प्रभावी व्यक्तित्व की झलक उनके चेहरे पर साफ़ नज़र आया था। मुझे वाणी में इतनी मधुरता व शालीनता भरा अंदाज़ उनकी कर्मठता को बिना बयाँ किये हुए भी जैसे बयाँ कर रहा हो|उस कार्यक्रम के बाद तो अनेकों मंचों पर हम साथ – साथ रहे|


धीरे – धीरे भाई साहब को करीब से जानने का मौक़ा मिला|


कई आयोजन ऐसे भी आएं ,जहाँ से मैं और मेरे पति का भाई साहब के घर कुछ घंटों के लिए जाना भी हुआ| बातों – बातों मालुम हुआ भाई साहब “पूर्व कृषि उप निदेशक ( भारत सरकार ) / कृषि वैज्ञानिक रह चुके हैं |और अब अपने ही पैत्रिक गाँव में रहकर निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं| भाई साहब में कोई एक गुण हो तो कहूँ वो तो गुणों की खान हैं | भाई साहब ने कई फिल्मों में बतौर अभिनेता , फिल्म निर्माता , सहायक निर्देशक रहे हैं| इनकी एक ख़ास फिल्म नाम – “ दीवाना तोर बिना” में भाई साहब ने एक क्रांतिकारी नेता की भूमिका निभायी थी जो दर्शकों को काफी प्रभावित कर दिलों में छाप छोड़ गई| खासकर इस फिल्म में जब क्रांतिकारी नेता के रूप में जनता के मांगों को लेकर माननीय बी.डी.ओ. साहब को ज्ञापन सौंपने जाने के क्रम में वो इंकलाबी नारे व पीछे जन सैलाब का आक्रोश देखकर शरीर में क्रांति की लहर दौड़ जाती है| वहीँ आपकी इकोनोमिकोली बैकवार्ड क्लासेस के मुद्दे पर सुरजापूरी बिरादरी के आरक्षण पर फिल्म “ प्यारी सन बहिन” के निर्माता के साथ-साथ इस फिल्म में आपने M L A का किरदार निभाकर अपने अभिनय का लोहा मनवाया| आपने अपने जीवन में कुल चार फ़िल्में बनाई | वर्ष 2017 के बाद आपने फ़िल्में बनाना छोड़ दिया| क्योंकि - प्राप्ति ही समाप्ति है| भाई साहब अनगिनत साहित्यिक ,सामाजिक , सांस्कृतिक , कला,खेल जगत ,फिल्म जगत आदि - आदि जगहों पर ससम्मान मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किये गये हैं| न जाने कितने क्रिकेट मैच T- 20 डे नाईट , T- 10 क्रिकेट मैच में विशिष्ट अतिथि के रूप में जब पहुंचते तो टीम के कप्तान को खेल के महत्त्व को बारीकी से समझाते|और पहली ओवर की पहली बॉल डालकर मैच का शुभारंभ भी करते| वहीं 2003 में “एकीकृत प्रबंधन केंद्र” लेखक – डॉ पी पी सिन्हा द्वारा उत्तरप्रदेश के नरेन्द्रदेव कृषि विश्वविद्यालय ,फैज़ाबाद में किसान दिवस पर धान की खेती कार्यक्रम स्थल पर करीब 870 रजिस्टर्ड किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के समक्ष बतौर मुख्य अतिथि के रूप में मंच से संबोधित भी किया|और लगभग 140 किसानों को स्वरचित पुस्तक भी बांटे|                                                            आगे बताते चलूँ की रोम,नीदरलैंड,मिश्र,अल्जीरिया,नेपाल,सूडान,डेनमार्क,लंदन,( यु के ),नाइजर,पकिस्तान,आदि देशों के विद्वानों के साथ विदेशों में काम किया है|     


भाई साहब व्यक्तित्व की असल झलक अपनी आँखों से देखकर मैं दंग रह गई|जब उनके निवास पर आमजनों का आना- जाना देखने को मिला|उसी दौरान पता चला की भाई साहब किस तरह से निस्वार्थ भावना से लोगों की मदद के लिए खड़े रहते हैं|उनका बस चले तो ग़रीबों के लये अपना सब कुछ लुटा दें| विशेषतः गठिया का इलाज़ जिसमें पतंजली की की दवाई देते और परहेज़ की जानकारी देते| वहाँ जाकर मैंने देखा की भाई साहब किस तरह वस्त्र वितरण के साथ – साथ मुफ्त दवाइयाँ तक देकर लोगों का इलाज़ ही नहीं करते हैं बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण और उनकी महत्ता के बारे में भी बहुत बारीकी से बतलाते हैं|मुझे अच्छी तरह से याद है लौटने के क्रम में भाई साहब मुझे भी कुछ पौधे भेंट स्वरूप देकर अपने निवास से विदा किये थे|


अंजु दास गीतांजलि


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