चोर-चोर मौसेरे भाई, चैनलों पर फिर लौटा ड्रग्स का जीन

 चोर-चोर मौसेरे भाई, चैनलों पर फिर लौटा ड्रग्स का जीन 


                    प्रोफे. डां. तेजसिंह किराड़ 

            (वरिष्ठ पत्रकार व राजनीति विश्लेषक)

हंसते हंसते कट जाए रस्तें! ये तो सुना था किन्तु अब हंसाने वाली कामेडियन  भारतीसिंह और उनके पति हर्ष को भी ड्रग्स मामले में गिरफ्त में ले लिया हैं। अब तो हंसते हंसाते चल पड़े कामेडियन भी ड्रग्स के रास्ते! वालीवुड में ड्रग्स की दरिया का कोई अंत नहीं दिख रहा हैं। एक के बाद एक बड़े -बड़े खुलासे होते जा रहे हैं। आम लोगों की क्या विसात अब तो वालीवुड में  चरस, गांजा , कोकिन, हीरोइन,अफीम जैसे नशीलें मादक पदार्थों के सेवनकर्ताओं की लाईन बड़ती ही जा रहीं हैं। अब हर एक फिल्मी कलाकार को उनके दर्शक शक और संदेह की निगाहों से देखने लगा हैं। पहले किसी कलाकीर के लिए उनको चाहने वाली जनता सर आंखों पर बैठाती थी अब सुशांत की मौत और ड्रग्स में फंसें कलाकारों के कारण वह इज्जत भी धीरे धीरे खत्म हो रही हैं। यह एक कटू सत्य हैं जिसे अब वालीवुड ने भी समझना होगा।

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नशा शराब में होता तो नाचती बोतल! अब तो ये सिध्द हो चला हैं कि नशा करके नाचना,गाना और कामेडी करना एक फैशन सा हो चुका हैं। वालीवुड में सुशांतसिंह राजपूत की मौत के बाद से कई पर्दे खुलते जा रहे हैं।नामचीन हस्तियों की गिरफ्तारी और चैनलों का रातदिन उनका गुणगान देश के दर्शकों को अब कुछ भी नयापन सा महसूस नहीं हो रहा हैं। चैनलों ने ड्रग्स के दफन जीन को एक बार फिर से जिंदा कर दिया हैं। एनसीबी कई महिनों से केवल यह पता लगाने में अभी सफल नहीं हो सकी हैं कि सुशांत और दिशा की मौत का रहस्य क्या हैं ? अंधेरें में हाथ पैर मार रही सीबीआई पर से जनता का विश्वास उठने लगा हैं वहीं एनसीबी तमाम वालीवुड की छोटी बड़ी मछलियों को ड्रग्स के नाम पर धरपकड़ करने में जुटी हुई हैं। परन्तु बड़े बड़े रसूकदार कलाकार अभी भी पकड़ से बाहर ही हैं। देश के कुछ राज्यों में चुनावी सरगर्मीं के चलते सुशांतसिंह की फाइल को पेंडिंग में पटक कर कुछ राजनेताओं के ईशारें पर लटका दिया गया। चैनलों पर तू-तू, मैं- मैं करने वाली कंगना राणावत और   मीडियाई चर्चाओं से दरकिनार कर दी गई। सच्चाई अभी भी कहीं ना कहीं कफन में लिपटी हुई हैं। कहते हैं कि सत्य विचलित हो सकता हैं पराजित नहीं। आखिर देर सबेर सुशांतसिंह और दीया की मौत से पर्दा जरूर उठेगा। देश में राजनीति गरमाई हुई हैं। जल्दी ही काश्मीर,पश्चिम बंगाल और तमिलनाडू में चुनाव के शंखनाद होने वाले हैं। ऐसे में भाजपा कोई भी ब्रम्हाअस्त्र के प्रयोग से चुकने वाली नहीं हैं। महाराष्ट्र में भी सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा हैं। यहां कब कौन सा राजनैतिक मुद्दा गरम जाएगा अभी कहना मुश्किल हैं। साधु संतों का आक्रोश अभी ठंडा नहीं हुआ हैं। कोरोना ने एक बार फिर पैर पसारना आरंभ कर दिए हैं। देश भर में स्कूल कालेज सब बंद पड़े हुए परन्तुसड़कों की भीड़ और नेताओं की राजनीति महत्वाकांक्षा ने भीड़ के सारे नियमों,करम और धरम की सरासर धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। सच तो यह हैं कि जितना खतरा आम नागरिक के सड़कों पर चलने से नहीं हैं उससे कहीं ज्यादा खतरा हाट,बाजारों और नेताओं की सभाओं से बड़ने लगा हैं। मुम्बई में सीबीआई ने क्या खोजा यह देश जानना चाहता हैं। देश की सबसे बड़ी जांच एजेन्सी भी अब कटघरें में खड़ी हो गयी हैं। इतने दिनों से सुशांतसिंह और उनसे जुड़े लोगों से सच्चाई ना उगलपाना य कोई सुराग हाथ ना लग पाना एक बड़े शक और संदेह को जन्म दे चुका हैं। कई राज्यों में कोरोना के दूसरे व तीसरी बार रिटर्न ने सबकी नींद उड़ा दी हैं। सावधानी बरतनें के बड़े बड़े संदेश और करोड़ों अरबों का विज्ञापन खर्च सब बेकार पानी की तरह बहता और बर्बाद होता नजर आ रहा हैं। मप्र में कोरोना ने बड़ी तेजी से रिटर्न किया हैं। दिल्ली के हालात बदसे बत्तर हो चुके हैं। कई राज्यों में सरकारें मौन और  तमाशबीन बनी हुई हैं। सत्ता और प्रशासन की लापरवाही के चलते आम लोगों की जिंदगी खतरें पड़ चुकी हैं। पश्चिम बंगाल में  राजनैतिक तूफान की आहट ने दस्तक दे दी हैं। कैसे और किस रूप में राजनैतिक परिदृश्य बदलनें वाले हैं इस और सबकी निगाहें लगा हुई हैं। मुम्बई का वालीवुड अब एक नई दिशा में आगे बढ़ चुका हैं।स्वस्थ्य मनोरंजन देने वाला फिल्मीस्तान अब पूरी तरह ड्रग्स की चपेट में आ चुका हैं। कई जाने ड्रग्स की भेंट चढ़ चुकी हैं। क्या युवा! क्या महिला! और क्या बड़े सीनियर कलाकार! अब ड्रग्स के लपेटे में नाम उजागर हो रहे हैं। यह उन लोगों के मुंह पर एक करारा चमाचा हैं जो ऐसे ड्रग्स एडिक्ट लोगों को अपना आदर्श मानकर उनसे बहुत कुछ सीखने और प्रेरणा लेकर जीवन में एक प्रेरणामयी इंसान बनना चाहता हैं! ढ़ाक के तीन पात वाली वालीवुड अब ड्रग्स के सांये में घिर चुकी हैं। काले और गौरख धंधोए में लिप्त लकाचोंध वाली फिल्मी मायावी नगरी में मौत से जुड़े कई अनसुलझें राज दफन पड़े हैं। जो अब परत दर परत उजागर हो रहे हैं। कहावत भी हैं कि चोर चोर मौसेरे भाई  अर्थात इस फिल्मीस्तान की अंधेरी मायावी नगरी में चारों तरफ गलत की अनुकरण करने वालों की एक नई जमात खड़ी होती जा रही हैं। रिया चक्रवर्ती अब गुमनामी के अंधेरे में छिप चुकी हैं। जब यहीं रिया कुछ चैनलों के लिए सबसे बड़ी ब्रेकिंग न्यूज हुआ करती थी। किन्तु सच्चाई की तह में जाकर सुशांतसिंह कि मौत पर से अभी पर्दा उठना बाकी हैं। कोरोना काल की यह सुशांत कहानी अब कई वर्षों तक ड्रग्स पैडलर और ड्रग्स लेने वालों और फिल्मी दुनिया के कई कलाकारों के इर्द गिर्द ही घुमती रहेगी। परन्तु राज्यों की सरकारों ने रिटर्न हो रहे कोरोना को बड़ी मुश्तैदी से यदि नहीं संभाला तो हालत बदसे बदत्तर होने में देर नहीं लगेगी। यह एक चेतावनी ना केवल केन्द्र व राज्यों की सरकारों के लिए हैं वरन एक जागरूक आम नागरिक के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।

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