चिकित्साकर्मी पूरे सेवाभाव के साथ उपचार उपलब्ध करवाएं।-अशोक गहलोत

  चिकित्साकर्मी पूरे सेवाभाव के साथ उपचार उपलब्ध करवाएं - अशोक गहलोत 


                                                                                                                                                                     जयपुर 20 नवंबर । प्रदेश के सभी अस्पताल और चिकित्साकर्मी कोविड-19 महामारी के इस दौर में जीवन रक्षा के लक्ष्य को सर्वोपरि रख पूरे सेवाभाव के साथ उपचार उपलब्ध करवाएं। निजी अस्पताल सामाजिक, नैतिक एवं व्यावसायिक दायित्वों को निभाते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों एवं सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप निर्धारित दरों पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करें। इस विषम परिस्थिति में हमारा सर्वोच्च उद्देश्य जीवन बचाना हो, लाभ कमाना नहीं। 

मुख्यमंत्री निवास पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कोविड-19 को लेकर निजी अस्पताल के प्रतिनिधियों से जुड़े। सभी संभागीय आयुक्त, जिला कलक्टर, मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा प्रमुख चिकित्सा अधिकारी भी वीसी से जुड़े। करीब ढाई घंटे तक चली वीसी में विभिन्न अस्पतालों के प्रतिनिधियों से संवाद कर चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार तथा कोविड-19 के प्रबंधन को और प्रभावी बनाने पर चर्चा की। 

निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के बेहतर तालमेल से किसी भी चुनौती का सामना करना आसान हो जाता है। निजी क्षेत्र के सहयोग से प्रदेश में अब तक कोविड-19 का बेहतरीन प्रबंधन रहा और रोगियों को समय पर उपचार मिल सका है। सर्दी, त्यौहारी सीजन सहित अन्य कारणों से पिछले कुछ दिनों से पॉजिटिव केसेज बढ़ रहे हैं तथा गंभीर रोगी भी अधिक सामने आ रहे हैं। इसे देखते हुए ऑक्सीजन एवं आईसीयू बैड की संख्या बढ़ाना जरूरी है। राज्य सरकार राजकीय अस्पतालों में लगातार चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार कर रही है। निजी अस्पताल भी बैड्स की संख्या बढ़ाएं ताकि एक भी कोविड रोगी उपचार से वंचित न हो। 

आपदा में मिलजुल कर सेवाभाव से काम करना राजस्थान की परंपरा रही है। हमने जनप्रतिनिधि, उद्यमी, भामाशाह, सामाजिक कार्यकर्ता, स्वयंसेवी संस्थाओं सहित हर वर्ग को इस लड़ाई में साथ लिया है। मास्क लगाने के लिए बनाए गए कानून तथा आतिशबाजी पर रोक जैसे कदमों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। लोगों में इससे जागरूकता बढ़ी है। 

बीमारी गांव-शहर, धर्म-जाति या आम और खास देखकर नहीं आती, इसलिए कोई भी इस बीमारी को हल्के में न ले। गांव में भी इस महामारी के कारण मौतें हो रहीं हैं। इसे देखते हुए वहां भी पूरी सतर्कता रखते हुए लोगों को हैल्थ प्रोटोकॉल की पालना तथा समय पर जांच एवं उपचार के लिए जागरूक किया जाए। समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने के कारण कई रोगियों में संक्रमण का प्रभाव बढ़ जाता है और मृत्यु तक हो जाती है। 

ऑक्सीजन लेवल की जांच के लिए राज्य सरकार ने एएनएम स्तर तक के चिकित्साकर्मियों को ऑक्सीमीटर उपलब्ध करवाए हैं। अब आशा सहयोगिनियों को भी ऑक्सीमीटर दिए जा रहे हैं ताकि गांव-ढाणी तक लोगों को ऑक्सीजन लेवल जांच की सुविधा मिल सके और वे इस महामारी के खतरे से बच सकें। नेगेटिव हुए लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं के निदान के लिए हर जिले में पोस्ट-कोविड क्लिनिक शुरू करने का प्रयास कर रहे हैं। 

निजी अस्पतालों के साथ समन्वय के लिए राज्य सरकार ने नोडल अधिकारी लगाए हैं ताकि कोविड रोगियों को उपचार में किसी तरह की असुविधा नहीं हो। निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि इन नोडल अधिकारियों के साथ समन्वय कर अस्पताल में आ रही समस्याओं से भी अवगत करवा सकते हैं। उनके फीडबैक के आधार पर उपचार की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जा सकेगा। राज्य सरकार कोविड से संबंधित आंकड़ों में पूरी पारदर्शिता रख रही है, क्योंकि आंकडे़ छिपाने से जिंदगी नहीं बचती। आगे भी हर स्तर पर आंकड़ों में पारदर्शिता रखी जाए। 


मुख्य सचिव  निरंजन आर्य ने कहा कि राज्य में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार में किसी तरह की कमी नहीं रखी जा रही है। मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर को लगातार मजबूत किया गया है। दो हजार चिकित्सकों का चयन कर लिया गया है, जो शीघ्र सेवाएं देना प्रारंभ करेंगे। साथ ही कम्यूनिटी हैल्थ ऑफिसर्स का भी जल्द चयन कर लिया जाएगा। 

शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य  सिद्धार्थ महाजन ने कहा कि प्रदेश में कोविड रोगियों के उपचार के लिए 12 हजार से अधिक ऑक्सीजन बैड तथा 26 हजार ऑक्सीजन सिलेंडर प्रतिदिन आपूर्ति की क्षमता उपलब्ध है, जबकि वर्तमान में करीब 12 हजार सिलेंडर्स की आवश्यकता पड़ रही है। उन्होंने कहा कि निजी अस्पताल आगामी आशंकाओं को देखते हुए कोविड बैड्स की संख्या 30 से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करें और इसके बाद भी आवश्यकता पड़ने पर नॉन कोविड बैड को कोविड बैड में बदलें। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने कम्यूनिटी हैल्थ वर्कर्स के चयन की प्रक्रिया आरम्भ की है, जिसमें 84 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं। उनका डाटाबेस निजी अस्पतालों को भी उपलब्ध करवा दिया जाएगा, ताकि वे आवश्यकता के अनुरूप उनकी सेवाएं ले सकें। 

राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजा बाबू पंवार ने कहा कि कोविड को दृष्टिगत रखते हुए निजी अस्पताल अपनी क्षमताओं में वृद्धि करें। वे भी अपने यहां पोस्ट-कोविड क्लिनिक शुरू करें। 

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर भंडारी ने कहा कि आरटीपीसीआर टेस्ट नेगेटिव आने के बावजूद भी अगर सीटी स्केन में फेफड़ों में संक्रमण नजर आता है या कोरोना के अन्य कोई लक्षण हों तो ऐसे रोगी का उपचार कोविड प्रोटोकॉल के आधार पर किया जाए। साथ ही आईएलआई क्लिनिक में आमजन के लिए चौबीस घंटे कोविड जांच की सुविधा है। यहां प्रतिदिन करीब 700 लोगों की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 के मेडिकल प्रोटोकॉल को लगातार अपडेट करने के लिए दस रिसर्च टीम भी कार्य कर रही हैं। जयपुर में कोविड रोगियों के लिए सरकारी क्षेत्र में बैड्स की संख्याा अब 1700 तक पहुंच गई है। 

चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि कोरोना का यह दौर मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए एक सैनिक की तरह अपनी प्रतिबद्धता दर्शाने का समय है। सभी चिकित्साकर्मी पूरे समर्पण के साथ सेवाएं देकर लोगों का जीवन बचाएं।

कॉन्फ्रेंस में निजी अस्पताल के प्रतिनिधियों ने कोविड प्रबंधन के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि निजी अस्पताल इस चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार को हरसंभव सहयोग प्रदान करेंगे। बैठक में चिकित्सा शिक्षा सचिव वैभव गालरिया तथा सूचना एवं जनसम्पर्क आयुक्त महेन्द्र सोनी भी उपस्थित थे।

              

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