पाक की चौकियां व बंकर नेस्तनाबूद इमरान सरकार की चुप्पी

पाक की चौकियां व बंकर नेस्तनाबूद इमरान सरकार की चुप्पी 



             प्रोफे. डां. तेजसिंह किराड़ 


      (वरिष्ठ पत्रकार व राजनीति विश्लेषक)


किसी भी व्यक्ति और देश की सहन करने की अपनी एक स्वाभाविक सीमा और मर्यादा होती हैं। अति सर्वत्र वर्जयते! अति की सर्वत्र निंदा ही होती हैं। लगातार कई महिनों से भारत में आतंकियों की घुसपैठ और सीमा पर शर्तों के विरूद्ध गोलीबारी करके पाक अपनी ना पाक हरकतों को अंजाम दे रहा था। किन्तु भारत की सेना ने पाक की कई चौकियों और बंकरों को नेस्तनाबूद करके चीन और पाक को कड़े शब्दों स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि अब भी पाक अपनी ना पाक हरकतों से बाज नहीं आया तो ईशारा मिलते ही सेना कड़े कदम उठाने से कभी पीछे नहीं हटेगी। पीएम मोदी ने दो टूक दीपावली मनाते हुए सीमा पर भाषण में साफ कह दिया हैं।



चोरी और ऊपर से सीना जोरी ! वाली कहावत हम सबने सुनी ही हैं। पाक ने भी यही दोहराते हुए सीमा पर आतंकियों की घुसपैठ करवाना और ऊपर से गोलीबारी भी करना पाक की फिदरत में ये हरकतें आजादी के बाद से ही एक विकृत मानसिकता के रूप में कूट- कूट कर भरी हुई हैं। पिछलें एक वर्ष का रिकार्ड देखें तो पाकिस्तान ने अबतक नौ अडसठ बार सीजफायर करके आपसी राजनैतिक संबंधों को बिगाड़ने के अलावा कोई बड़ा अन्तर्राष्ट्रीय सराहनीय काम नहीं किया हैं। भारत, भारतीयों और सेना के प्रति केवल जहर उगलनें के अलावा पाक ने कभी पड़ौसी के नाते रिश्तों को सुधारनें और विकास के मुद्दों पर मानवीय हितों की पहल नहीं की हैं। दीपावली के ठीक एक दिन पहलें पाक को भारतीय सेना ने ऐसा मुंहतोड़ जवाब दिया हैं कि उसकी कई चौकियों और बंकरों को मलवें के ठेर में तब्दील कर दिया हैं। खबरों के अनुसार पाक के 13 से अधिक सैनिक और 2 कमांडों भी ठेर हो गये और कई सैनिक घायल होकर भारत की सेना का खौफ खाएं गीदड़ की तरह भाग खड़ें हुए। दुनिया के महाशक्ति देश बेहत्तर समझ चुकें हैं कि भारत ने अहिंसा परमो धर्म: और वसुदेव कुटुम्बकम की विचारधारा को ही प्राथमिकता दी हैं यदि इसके बावजूद पाक,चीन और नेपाल कोई ना पाक हरकतें हैं तो भारत अपने स्वाभिमान और देश की रक्षा कि खातिर किसी भी बड़े कदम उठानें से पीछें नहीं हटनें वाला हैं। चीन की सीमा पर जंग की तैयारी की नौटंकी का नाटक कई महिनों तक चला। पूरी दुनिया ने यह सब देखा और समझा भी। अन्तोत्वगत्वा चीन को भी दुनिया भर में उलटे मुंह की खानी पड़ी और चीन को भारत की सैन्य ताकत के आगे झुकना भी पड़ा हैं। पाक ने अपनी आजादी के बाद से सदैव भारत की शांति में जहर उगलनें और आपसी रिश्तों में वैमनस्या पैदा करने जैसे हालात पैदा करके कभी पड़ौसी का मानवीय और इंसीनियत वाला फर्ज नहीं निभाया। आज पाक के आंदरूनी हालात इस कदर बिगड़ चुकें हैं कि पाक अपनी ही दोगली नीतियों के कारण खुद की करनी और कथनी पर आंशु बहा रहा हैं। आत्मनिर्भरता कि और तेजी से बढ़ता भारत आज महाशक्ति देशों का एक हमदर्द दोस्त बन चुका हैं। यही कारण हैं कि भारत को लेकर दुनिया के कई देशों का यथेष्ठ सहयोग अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर मिल रहा हैं और यह सब मुमकिन हो रहा हैं राजनैतिक रूप से त्वरित निर्णय लेने की अदम्य क्षमता वाले सशक्त और दूरदृष्टा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी के कारण। दुनिया भी अब कहने लगी हैं कि भारत में मोदी हैं तो सब संभव हैं। यह बात पीक और चीन के कई समझदार राजनैतिक नेताओं ने भी दबें स्वरों में स्वीकारा हैं कि भारत अब 1962 और 1975 वाला भारत नहीं हैं। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाले इस भारत ने दुनिया को जता और बता भी दिया हैं कि कठोर विपत्तियों से लड़ना और उससे निकलना भी बेहत्तर रूप से भारत जानता हैं। यही कारण हैं कि चीन की विस्तारवादी दोगली नीतियों को भारत से करारा झटका लगा हैं। सीमा पर चीन का उलटें पैर लौटना इसका ज्वलंत उदाहरण हैं। चीन को पीछे हटते देख पाक की हर एक ना पाक हरकतों को मांनों सांप सूंघ गया हैं। पाक को अब अधिकृत काश्मीर के बलूचिस्तान और गिलकिस्ट क्षेत्र भी हाथ से जाने का खौफ सता रहा हैं। इसलिए पाक वहां कि जनता पर अमानवीय अत्याचारों,शोषण और उत्पीड़न की एक नई परिभाषा भी इन अधिकृत क्षेत्रों में लिख चुका हैं।


 *पाक सरकार की नाकामी और सेना की गुलामी :* पूरी दुनिया जानती हैं कि इमरान के कई बड़बोले मंत्रियों ने ही इमरान और सेना की छवि को तारतार करके इतना कमजोर कर दिया हैं कि कोई भी देश ना तो ऋण देने को तैयार हैं और ना ही कोई बड़े व्यापारिक सौंदे पाक से करना चाहता हैं। कब इमरान की सत्ता का तख्त सेना हथिया लेगी कुछ पता नहीं। ऐसे में पाक हैं कि अपनी गलतियों पर गलतियां करके पूरी दुनिया में सेना को भी बदनाम कर चुका हैं।पाक की सत्ता कुल मिलाकर सेना की गुलाम बन चुकी हैं। 


 *भारत के आत्मनिर्भर एजेन्डे से पाक और मेहबूबा की बुजदिली उजागर :* दुनिया जानती हैं कि भारत स्वयं आत्मनिर्भता की एक नवीन परिभाषा लिख चुका हैं। बैकों की उदारता से सुलभ ऋण योजना ने लाखों बेरोजगारों को उद्यमी बनाकर अब दूसरों को भी रोजगार देने लायक खड़ा कर दिया हैं। देश के कुछ अलगाववादियों और पाक परस्त भारत के देशद्रोहियों को यह आत्मनिर्भरता रास नहीं आ रहीं हैं। चौकियां बंकर नेस्तनाबूद हुए तो पीडीपी की मेहबूबा को पाक के प्रति सहानुभूति उमड़ने लगी। मेहबूबा और पाक को डर है कि एक दिन काश्मीर में और पाक अधिकृत गिलगिस्ट और बलूचिस्तान में भी जल्दी बड़े उद्योग जन्म लेने वाले हैं।


 *सेना और युवाओं ने ठाना हैं पाक को सबक सीखाना हैं :* मोदीजी ने दीपावली पर जैसलमेर की सीमा से जयघोष कर दिया हैं कि देश की सेना राष्ट्र की रक्षा,सुरक्षा और स्वाभिमान की खातिर अब कोई भी पाकि हरकतों को बर्दाश्त नहीं करने वाली हैं। मेहबूबा ने तिरंगे झंडें का अपमान किया और अपने चार मंत्री रहे नेताओं से हाथ धो बैठी। क्योंकि सेना ने देश द्रोहियों को सबक सीखानाआरंभ कर दिया हैं। देश का युवा एक आग बन चुका हैं। ना अब पाक की परमाणु गीदड़ भभकियों से डरने वाला हैं और ना ही चीन की दोगली नीतियों। 


 *मेहबूबा मुफ्ती की पाक नीतियों के प्रति गंभीर जांच जरूरी :* पाक की जमीन पर उसकी ही चौकियां और बंकर ध्वस्त होने पर मेहबूबा आगबबूला हो उठी और पाक से बात करने की नसीहत दे डाली। वहीं उमर और फारूख अब्दुल्ला मौन साधे बैठे हैं। उन्हें पता हैं कि काश्वीर में हालात बदल चुके हैं। कुछ भी पाक परस्त अलगाववादी हरकत करके देशद्रोह में कहीं पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे ना गुजारना पड़े इसलिए बाप -बेटे चुप बैठे हैं। मेहबूबा को भी यह पाक प्रेम एक दिन बहुत भारी पड़ सकता हैं।


पाक में आगे जो घटने वाला हैं वह सारी दुनिया ने महसूस कर लिया हैं क्योंकि पुख्ता खबर हैं कि पाक की सरकार अब चंद दिनों की ही मेहमान हैं। बदले कि भावना में पाक सेना पहले सरकार हथियानें कि कोशिश करेगी ताकि इमरान की हरकतों पर बंदिशें लगा सकें।


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