सत्ता और प्रशासन में उलझा कोरोना और बेखौफ जनता 

सत्ता और प्रशासन में उलझा कोरोना और बेखौफ जनता 



       प्रोफे. डां. तेजसिंह किराड़ 


(वरिष्ठ पत्रकार व राजनीति विश्लेषक) 


कोरोना वायरस का दुनिया से समूल नष्ट ना होना आज हर किसी के जीवन के लिए एक सबसे बड़ी सामाजिक, आर्थिक,शैक्षणिक और राजनैतिक क्षति हैं। कोरोना खात्में को लेकर जो भ्रम जाल कई देशों में तेजी से फैलता जा रहा हैं इससे कई देशों की जमी जमाई सत्ता की जड़े तक हिल चुकी हैं। यहीं नहीं महाशक्ति बनने की होड़ में शामिल कई देश कोरोना के कारण चारों खाने चित्त हो चुके हैं। टूटी हुई अर्थव्यवस्था के कंधों पर देश के विकास को लेकर समूल अर्थतंत्र लगभग लड़खड़ा चुका हैं। कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ हैं। समुद्र की शांति किसी बड़े तूफान की आशंका को अवश्य ही जन्म दे सकती हैं।


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एक वायरस और खौफनाक मौत के मंजर को पूरी दुनिया ने अपनी खुली नग्न आंखों से बहुत ही करीब से देखा हैं। दुनिया की पंच महाशक्तियों के होश उड़ चुके हैं। अमेरिका,चीन, रूस,ब्रिटेन और फ्रांस के विकास की रीड़ व्यापारिक अर्थव्यवस्था पूरी तरह टूट चुकी हैं। आज इन देशों में रोजगार के सारे दरवाजें धीरे -धीरें बंद होते जा रहे हैं। व्यापारिक और मौद्रिक प्रणाली के बहुत बड़े नुकसान से चीन की बोलती बंद हो चुकी हैं। दुनिया पर शासन करने की क्षमता रखने वाला चीन टूट टूटकर बिखर चुका हैं।कोरोना को बेहत्तर तरीके से नियंत्रित नहीं कर पाने के कारण डोनाल्ड ट्रम्प को सत्ताई बहुत बड़ा झटका लग चुका हैं। समुदंर में दहाड़ने वाले ट्रम्प अब जोसेफ बाईडेन को सत्ता सौंपने वाले है। वहीं ब्रिटेन और रूस के पीएम और राष्ट्रपति अपने बार- बार बिगड़े स्वास्थ्य के चलते आज एक नई मुशीबत में पड़ चुके हैं। ऐसे हालात में देश की जनता के विश्वास को बहुत बड़ा आघात पहुंचा हैं। अमेरिका,चीन,रूस और ब्रिटेन के लोगों ने कोरोना काल में ही होटलों में बेरोक टोक सामूहिक पार्टियों,जश्न और नियमों को धता बताकर बेखौफ सड़कों पर विचरने से आज कई देशों में कोरोना ने एक नई मुसीबत ने जन्म ले लिया हैं। जिसे दुनियाई आम भाषा में अब कोरोना का वापस आना कहा रहा हैं। हाल ही में, अमेरिका में केवल 10 दिनों में रिकार्ड तोड़ 10 लाख से ज्यादा नए केस दर्ज हो चुके। ये संख्या सच में दुनिया के सामने एक बार फिर से भयानक अशुभ संकेत के समान महसूस की जा रही हैं। मानव जाति के साथ अब वैज्ञानिकों ने अन्य जैव जगत के लिए भी सबसे बड़ा खतरा बताया हैं। ऐसे में यदि त्यौहारें बीच बेखौफ सड़कों पर सरपट दौड़ती जिंदगी तमाम नियमों की धज्जियां उड़ाकर आम नागरिकों के लिए खतरा पैदा कर रही हैं तो यह देश और राज्यों की सरकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी हैं। कल्पना कीजिए जब कोरोना महामारी ने दुनिया में दस्तक दी थी तब ना पमाणु बम काम आएं और ना लड़ाकू विमान और ना ही समुद्रीय युध्द पोत कुछ काम आएं। केवल एक इंसान की इंसानियत और सबके प्रति समभाव वाली मानवीयता ही संकट में सबसे बड़ी सुरक्षा और मददगार साबीत हुई हैं। कोरोना दुनिया से अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ हैं। आम लोगों में मन से डर त्याग दिया हैं। ना केवल अशिक्षित वरन पढ़े लिखें और बुध्दिजीवियों ने भी मास्क को उतार भीड़ के अंग को अपना लिया हैं। जैसे कुछ डर की कोई बात नहीं हैं। किन्तु कोरोना के खौफ से खफा अब भयभीत केन्द्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी प्रचार प्रसार आरंभ कर दिया हैं कि - मास्क के लिए टोकना हैं और कोरोना को रोकना हैं। आज हालात ऐसे बन चुकें हैं कि परिवार,संस्था को छोड़कर अन्य लोगों को मास्क के लिए टोकना झगड़े को बुलावा देना साबीत हो रहा हैं। ऐसे में कोरोना के प्रति लापरवाही त्योंहारों में किसी के लिए सबब तो किसी अन्य के लिए मुशीबत बनता जा रहा हैं।


 *त्यौहार की खुशी और कोरोना का खौफ :*


देश और दुनिया के बाहर हर भारतीय के दिलों में अपनों को खोने का गम अभी तक खत्म नहीं हुआ हैं। शिक्षा,रक्षा,समाज,धर्म,संगीत, राजनीति,साहित्य हर क्षेत्र से जुड़ी ख्यातनाम नायाब हस्तियों को कोरोना लील चुका हैं। यह सिलसिला बदस्तुर अभी भी जारी हैं। किन्तु लोगों में मौत का कोई खौफ साफ नजर नहीं आ रहा हैं।


 *केन्द्र और राज्यों की अनदेखी से पसर रहा कोरोना :* सच्चाई को झूठलाया नहीं जा सकता हैं। नियम पालन के लिए बनें हैं किन्तु नियमों के प्रति कठोरता और सजा प्रावधान का शक्ति से अमलीकरन ना होने से आम लोगों के मन और दिलों से कोरोना का खौफ लगभग खत्म हो चुका हैं। आजाद पंछी की भांति लोगों ने भी स्वतंत्र चलना, घुमना और सरपट दौड़नें में दूसरों की जिंदगी को भी खतरें में डाल दिया हैं। दिल्ली के अलावा अब कई राज्यों से कोरोना के तेजी से दर्ज होते प्रकरणों ने कोरोना रिटर्न की दस्तक दे दी हैं। केन्द्र और राज्यों की सरकारों को चाहिए कि मानवीय जिंदगियों के खिलवाड़ करने वालों को कड़ी सजा सुनिश्चित करें।


 *_जबतक दवाई नहीं तबतक ढिलाई नहीं :_* नारेबाजी के ढोल से कोरोना का कहीं भी सफाया नहीं हो रहा हैं। देश की जनता के सामने अभी तक दवाई का ना पहुंचना भी कई शक और संदेहों को जन्म दे रहा हैं। आज तमाम चैनलें इस मुद्दें पर चुप हैं। बिकाऊ मीडिया से जनता का विश्वास खत्म हो चुका हैं। सत्ता के गलियारों की खबरों में कोरोना का खौफ दबकर रह गया हैं। चीन से युध्द की आशंका में देश के गंभीर और ज्वलंत मुद्दों से जनता का ध्यान भटका दिया गया सा प्रतीत होने लगा हैं। चुनावों की राजनीति में कोरोना अब नये स्वरूप में पोषित और पसरने की तैयारी में हैं ऐसी आशंका विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी देते हुए दुनिया के लोगों को आगाह किया हैं। इसलिए सावधानी और जिम्मेदारियों की अनदेखी कहीं पुरी दुनिया को एक बार कहीं बहुत भारी ना पढ़ जाएं यही खौफ सामने आ रहा हैं। अमेरिका इसका ताजा उदाहरण हैं। 


 *शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी और भविष्य की शिक्षा :* स्कूल,कालेजेस,अन्य तमाम शिक्षण संस्थाओं में विगत आठ महिनों से परम्परागत शिक्षा की कक्षाऐं सुनी पढ़ी हुई हैं। केवल आन लाईन शिक्षा और आन लाईन कार्यालयीन कार्यों ने कई नवीन समीकरणों को जन्म दे दिया हैं,असुविधा,दुविधा और तकनीकि यंत्रों में चलाई जा रही शिक्षा प्रणाली पर ही अब शत प्रतिशत विश्वास करके शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने की तमाम कोशिशें की जा रही हैं। पाठयक्रमों से दूर होता विद्यार्थी और घर पर बैठें बेकाम शिक्षक नई शिक्षा नीति के पैराग्राफ को पढ़कर अपने पैसे को कोस रहा हैं। देश में अब तक लाखों शिक्षकों को कोरोना काल का वेतन तक नसीब नहीं हुआ हैं। सरकारें केवल सत्ता के मोहपाश में उलझीं तमाशबीन बनकर रह गयी हैं। खोखलें दावों में उलझीं नवीन शिक्षा नीति पर अमलीकरन करना अब दूर के ढोल सुहावनें जैसे लग रहा हैं।


कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ हैं। कई देशों में यह महामारी दबें पैर फिर दस्तक देकर मौत की तबाही का मंजर पैदा करने के संकेत दे चुकी हैं। अब केवल हम सबका एक ही नारा बनना चाहिए वह यह कि - मास्क के लिए टोकना हैं और कोरोना को रोकना हैं।


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