मंसूरी समाज ने दिया किसान आंदोलन को पूर्ण समर्थन

 मंसूरी समाज ने दिया किसान आंदोलन को पूर्ण समर्थन


अब किसानों कि बारी आई है, ज़िद पे खुन कि खुद्दारी आई है

तुफां भी हार रहा अब कश्तियां जब ज़िद पे आई है

बचपन से सुनते आए हैं और किताबों में पढ़ते आए हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है जहां की अर्थव्यवस्था और जीडीपी कृषि पर निर्भर है। जनसंख्या में दुनिया में दूसरे नंबर पर भारत देश का नाम आता है, यहां की मुस्लिम जनसंख्या में सक्रिय भागीदारी और अग्र पंक्ति में भागीदारी निभाने वाली मुस्लिम बिरादरी मंसूरी समाज है जिसका पारंपरिक कार्य कपास की खेती (कृषि), कपास से रुई निकालना, रुई पिजंना, बिस्तर भरना, तेल निकालना (तेली काम) आदि रहे हैं।

आज 8 दिसंबर 2020 को किसान महा आंदोलन ने भारत बंद रखा है चुकी मंसूरी समाज कृषि से जुड़ा है 80% मंसूरी समाज कृषि कार्य या कृषि से जुड़े हुए कार्य करता है आज भारत में किसानों के अधिकारों का हनन व अतिक्रमण हो रहा है जोकि सीधे तौर पर किसानों की फसलों को चौपट करना और जमीनों को हथियाने का षड्यंत्र है।

आज किसान कई हफ्तों से कड़कड़ाती सर्दी में सड़कों पर उतरा हुआ है जिस पर कभी ठंडे पानी की बौछार तो कभी लाठीचार्ज कभी आंसू गैस के गोले तो कभी बड़बोली बोली भी बोले नेताओं के षड्यंत्र में फंसा हुआ है आज जरूरत है किसान को उनका हक उनका अधिकार दिलाने के इस संघर्ष में सहयोग करने की उनको संविधान से जो अधिकार प्राप्त है उनके अधिकार उनके पास होने चाहिए ऐसा सहयोग करने की उनके ऊपर जो दबाव की राजनीति से अत्याचार किए जा रहे हैं उन्हें रोकने की।

आज अगर किसान आंदोलन कर रहा है तो क्यों कर रहा है इस बात को समझने की जरूरत है सरकार को भी और आम जनता को भी क्योंकि जब किसान खेतों में हल चलाएगा बीज बोएगा धान उगायेगा फसल उगायेगा तभी आपके पेट की भूख मिट पायेगी नहीं तो आप के हालात और हश्र बहुत बुरे होंगे। अगर आज आप किसानों के अधिकार और हक के लिए नहीं बोलेंगे तो कल यह दिन आपको देखना पड़ सकता है।

मंसूरी समाज में जो कि ज्यादातर लोग कृषि कार्य, कृषि से जुड़े कार्य से जुड़े हैं तो यह लड़ाई यह संघर्ष हमारे भाइयों का ही है।इस संघर्ष में राष्ट्रीय मंसूरी समाज पूरी तरह किसानों के साथ है जब तक कि किसानों को उनका अधिकार प्राप्त नहीं होता।

राष्ट्रीय मंसूरी समाज और पूरे भारत का मंसूरी समाज भारत सरकार से यह निवेदन और आग्रह करता है कि जल्द से जल्द किसानों की बात सुनी जाए और समझी जाए और अगर रास्ता निकल सकता है तो रास्ता निकाले नहीं तो तीनों बिल वापस लेकर भारत के इस सबसे बड़े किसान महा आंदोलन को सफल बनाएं।

हम भारत देश के स्वाभिमानी इंसाफ पसंद भारतीयों से अनुरोध करते हैं कि इस किसान महा आंदोलन को सफल बनाने के लिए तन मन धन से सहयोग करें।


राष्ट्रीय अध्यक्ष यूनुस मंसूरी की कलम से

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