चीन में अनाज का संकट

 चीन में अनाज का संकट 



दुनिया भर में अपनी झूठी शान का प्रचार करने वाला चीन इस समय अनाज के भारी संकट के दौर से गुजर रहा है। कुछ समय पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीन के नागरिकों से अनाज की बर्बादी न करने की अपील की थी। चीन अपने देश के नागरिकों से भी अनाज संकट को छुपाने का प्रयास कर रहा है। सीमा पर भारत से लड़ने वाले चीन ने अपने नागरिकों की भूख मिटाने के लिए 9 करोड़ किलोग्राम चावल भारत से खरीदा है। 30 साल बाद पहली बार चीन ने इतनी बड़ी मात्रा में भारत से चावल की खरीदारी की है। हालांकि अब तक चीन भारत के चावल को यह कहकर नकारता रहा है कि उसकी क्वालिटी अच्छी नहीं होती, किंतु अब उसी चावल को खरीदने के लिए चीन ने भारत के व्यापारियों से 9 करोड़ किलोग्राम चावल आयात करने का समझौता किया है जिसकी कीमत लगभग 221 करोड़ रुपए है।
          143 करोड़ आबादी वाले चीन में अपने नागरिकों की भूख मिटाने के लिए खेती से पर्याप्त अनाज पैदा न हो पाने के कारण चीन हर वर्ष लगभग 400 करोड़ किलोग्राम चावल का आयात करता है। चावल आयात करने के लिए चीन अब तक थाईलैंड, वियतनाम, म्यांमार और पाकिस्तान जैसे देशों पर निर्भर था, किंतु कोरोना संकट के कारण अब दुनिया के कई देशों ने चावल के निर्यात पर रोक लगा दी है। पिछले एक वर्ष में चीन ने अमेरिका से 40 हजार करोड़ रुपए से अधिक का अनाज आयात किया है, किंतु इस समय अमेरिका और चीन के बीच संबंध अच्छे न होने के कारण चीन को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
            भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है और चीन चावल का सबसे बड़ा आयातक। एक ओर चीन दुनिया भर से चावल का आयात कर रहा है किंतु उसके सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने इस वर्ष चावल की शानदार पैदावार होने का दावा किया है यानी चीन झूठे प्रचार के द्वारा अपने देश के अनाज संकट को छुपाना चाहता है।
           चीन में चावल की खपत बहुत है क्योंकि चीनी लोग अपने भोजन में चावल य उससे बने चाइनीज नूडल्स का प्रयोग अधिक करते हैं। चीन में हर 4 में से 3 लोगों का चावल ही प्रमुख भोजन है इसलिए चीन अधिक मात्रा में चावल का आयात करता है।
         भारत ने चीन को अनाज के मोर्चे पर भी झुका दिया है और इसका पूरा श्रेय हमारे भारतीय किसानों को जाता है। हमारे देश में "जय जवान जय किसान" का नारा बिल्कुल सार्थक है क्योंकि हमारे जवान सीमा पर डट कर देश की सुरक्षा करते हैं तो हमारे किसान देश के खेतों में सर्दी, गर्मी और बरसात को सहकर दिन-रात कड़ी मेहनत करके कम से कम लागत में अधिक से अधिक अनाज उत्पन्न करते हैं और देश को मजबूत बनाते हैं। इन्हीं किसानों के दम पर भारत दुनिया भर में चावल तथा अन्य अनाजों का इतना अधिक निर्यात कर पाता है और आर्थिक रूप से मजबूती प्राप्त कर पाता है तथा दुश्मन देश के सामने भी अपना सर गर्व से ऊंचा रख पाता है।
       वही किसान आज सड़कों पर उतर कर आंदोलन कर रहे हैं और सरकार को झुकने के लिए विवश कर रहे हैं। किसानों को मजबूत बनाने के लिए तथा उनकी समस्याएं दूर करने के लिए ही सरकार नए बिल लेकर आई है किंतु विरोधी पार्टियां तथा स्वार्थी तत्व इन बिलों को लेकर किसानों को भ्रमित करने पर लगे हुए हैं।

रंजना मिश्रा ©️®️
कानपुर, उत्तर प्रदेश

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