आपके द्वार, पहुँचा हरिद्वार

                     आपके द्वार, पहुँचा हरिद्वार       


                      
विश्व गायत्री परिवार की पहल.                     जयपुर। कोरोना संक्रमण के कारण लगाई गई प्रशासन की सख्त गाइड लाइन के चलते जो श्रद्धालु वहां जाकर पतित पावनी मां गंगा नदी में डुबकी लगाकर पुण्य नहीं कमा पा रहे हैं उनके लिए अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से आपके द्वार पहुंचा हरिद्वार अभियान चलाकर घर-घर गंगा जल की शीशी भेंट की जा रही है। रविवार को करीब 100 स्थानों पर गायत्री यज्ञ के माध्यम से देव स्थापना करा कर गंगाजलि की भी स्थापना कराई गई। सांगानेर के मोहनपुरा में 84 स्थानों पर देव स्थापना कराई गई।



गायत्री शक्तिपीठ वाटिका की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शांतिकुंज प्रतिनिधि  राजस्थान प्रभारी  जय सिंह  यादव, गायत्री परिवार जयपुर के संयोजक ओम प्रकाश अग्रवाल , मुख्य ट्रस्टी गायत्री शक्तिपीठ वाटिका  राजेंद्र माचीवाल, ट्रस्टी भौंरीलाल बड़ाया, रामप्रसाद शर्मा ने हरिद्वार महाकुंभ और गंगा जल का महत्व बताया। इससे पूर्व सभी यजमान और यज्ञ के आचार्य एक ही स्थान पर एकत्र हुए। यहां आचार्य वरण के बाद हम बदलेंगे युग बदलेगा, हम सुधरेंगे युग सुधरेगा जैसे जयघोष लगाते हुए प्रभात फेरी निकाली गई।


दामोदर शर्मा, शांति देवी शर्मा, भीम सिंह भाटी, रेणु भट्ट, अभिषेक शर्मा, अनिल पाराशर, डॉ. हेमलता सारस्वत, चंदा पांडे, पिंकी शर्मा, कैलाश , चंद्रशेखर पारीक, परमिंदर भदोरिया, कृष्णा जामवाल, शकुंतला चौधरी, उमा गौतम, के पी सिंह, बृजेश रावत दिनेश सारोलिया, सुमन खंडेलवाल, अनसूया शर्मा, अनीता मालपानी, दीक्षा, पूजा सैनी, नियति सक्सेना, दीपिका, नीलम, बृजपाल सिंह, पांचाल, सीताराम , अशोक , जबर सिंह, अशोक आर्य, मोतीलाल शर्मा, रजनी दीदी, अनिल पाराशर ने सहयोगी की भूमिका निभाई। मोहनपुरा की सरपंच  मधु शर्मा  ने सभी आचार्यों का स्वागत किया।  उधर, गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी के व्यवस्थापक रणवीर सिंह चौधरी की अगुवाई में चार चारदीवारी के विभिन्न स्थानों पर गायत्री यज्ञ करवाए गए। इससे पूर्व सरस्वती वंदना, व्यास वंदना, साधन पवित्रीकरण, मंगलाचरण, पवित्रीकरण, आचमन, शिखावंदन, प्राणायाम, न्यास, पृथ्वी पूजन, संकल्प, चंदन धारण, कलश पूजन, कलश प्रार्थना, दीप पूजन, देव आह्वान, षोडशोपचार पूजन, स्वस्तिवाचन, रक्षाविधान, अग्नि स्थापन, गायत्री स्तवन, अग्निी प्रदीपन, समिधाधान, जलप्रसेचन, आज्याहुति की क्रियाएं हुई। इसके बाद गायत्री और महामृत्युंज मंत्र के साथ यज्ञ देवता को विश्व कल्याण की कामना के साथ आहुतियां अर्पित की गई।                                                     


स्विष्टकृत होम के बाद एक बुराई छोडऩे और एक अच्छाई ग्रहण करने के संकल्प के साथ देवदक्षिणा पूर्णाहुति हुई। कुछ अन्य क्रियाएं संपन्न करवाने के बाद यज्ञ रूप प्रभो हमारे भाव उज्जवल कीजिए छोड़ देंवे छल कपट को मानसिक बल दीजिए की प्रार्थना के साथ यज्ञशाला की परिक्रमा की गई। शांतिपाठ के साथ यज्ञ संपन्न हुआ।

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