क्वाड शिखर सम्मेलन से चीन को लगी मिर्ची

 क्वाड शिखर सम्मेलन से चीन को लगी मिर्ची


क्वाड यानी 'क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग', इसके 4 सदस्य हैं भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया। क्वाड की स्थापना सन् 2007 में हुई थी, किंतु सन् 2017 में इसे पुनर्गठित किया गया, इसका मकसद चीन के विस्तारवाद पर लगाम लगाना व एशिया प्रशांत क्षेत्र में शांति और शक्ति की बहाली करना और संतुलन बनाए रखना है।
        सन् 2007 में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे द्वारा क्वाड का प्रस्ताव पेश किया गया था, इस प्रस्ताव का समर्थन अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और भारत ने किया। इसके बाद सन् 2019 में इन सभी देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक हुई, भारत क्वाड देशों का एक अहम सदस्य है।
      क्वाड के कारण चीन की बौखलाहट बढ़ गई है, क्योंकि भारत, अमेरिका, जापान सहित दुनिया के कई बड़े देश चीन के खिलाफ हैं, ऐसे में चीन के खिलाफ नाटो की तरह एक मजबूत मोर्चा बनाने की कवायद पेश की गई है। अक्टूबर में बीजिंग ने इसे मिनी नाटो बताया था और कहा था कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान क्वाड को चीन के खिलाफ मजबूत गठबंधन के तौर पर तैयार करने में जुटे हैं।
       नाटो यानी 'उत्तर अटलांटिक संधि संगठन' (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन), इसकी स्थापना 4 अप्रैल 1949 को 12 संस्थापक सदस्यों की तरफ से अमेरिका के वाशिंगटन में की गई थी और अभी इसके सदस्यों की संख्या 30 है। नाटो सामूहिक रक्षा के सिद्धांतों पर काम करता है, इसका मतलब है कि एक या अधिक सदस्यों पर आक्रमण सभी सदस्य देशों पर आक्रमण माना जाता है, नाटो में कोई भी फैसला सभी 30 सदस्यों की सामूहिक इच्छा के आधार पर लिया जाता है। नाटो का मुख्य मकसद सदस्य देशों के बीच एकजुटता और सामंजस्य की भावना बनाए रखना, आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार न करना, कोई हमला करे तो मिलकर उसका जवाब देना है और उसी तर्ज पर अब क्वाड को मिनी नाटो कहा जा रहा है, क्योंकि इसमें शामिल सभी देशों की सीधी जंग चीन से है।
       क्वाड गठबंधन ने चीन की नींद उड़ा दी है। 12 मार्च 2021 को क्वाड देशों का पहला ऑनलाइन शिखर सम्मेलन हुआ, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन, जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा और अमेरिका के राष्ट्रपति जोसेफ आर. बाइडेन शामिल हुए। क्वाड ग्रुप के सभी सदस्य देशों का चीन के साथ किसी न किसी रूप में झगड़ा चल रहा है, चीन भारत के साथ सीमा विवाद में उलझा है तो अमेरिका के साथ उसकी ट्रेड वॉर चल रही है, जापान के साथ उसका झगड़ा द्वीपों को लेकर है तो आस्ट्रेलिया के साथ उसकी कूटनीतिक लड़ाई है। दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद महासागर तक चीन अपनी ताकत के बल पर अतिक्रमण कर रहा है, इसलिए चीन के खिलाफ दुनिया भर में जबरदस्त गुस्सा है, उसके छोटे और कमजोर पड़ोसी देश डर की वजह से खुद को बेबस महसूस कर रहे हैं, लेकिन जिस तरह से भारत ने पूर्वी लद्दाख में चीन को पीछे धकेल दिया, उसने क्वाड के जरिए चीन को उसकी जगह दिखाने के मकसद को नई जान दे दी है। क्वाड के 8 मिनट के ओपनिंग सेशन में जिस तरह से चारों देशों के नेताओं की गर्मजोशी देखने को मिली, उससे चीन परेशान और झुंझलाया हुआ है, क्वाड की बैठक को लेकर चीन की प्रतिक्रिया से उसका खौफ साफ जाहिर हो रहा है। चीन का परेशान होना लाज़मी भी है क्योंकि इससे पहले चारों देश कभी इतने करीब नहीं आए। नेताओं से पहले भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान की सेनाएं समंदर में चीन को रोकने का अभ्यास कर चुकी हैं, लेकिन क्वाड का मकसद सिर्फ चीन की सैन्य ताकत को जवाब देना नहीं है, बल्कि चारों महाशक्तियां चीन पर निर्भरता खत्म कर उसे आर्थिक चोट देने की कोशिश कर रही हैं।
        क्वाड शिखर सम्मेलन में वैक्सीन डिप्लोमेसी के मोर्चे से लेकर, जलवायु परिवर्तन और हिंद प्रशांत महासागर में चीन की समुद्री साजिशों के खिलाफ अहम रणनीतियों पर चर्चा हुई। वर्तमान दौर में क्वाड ग्रुप दुनिया के नक्शे पर एक महागठबंधन के रूप में उभरा है, जो विश्व की हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है और इस महागठबंधन की मौजूदा चुनौतियों से लेकर बनने वाली रणनीति में भारत की हिस्सेदारी हर लिहाज से बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत है। क्वाड समूह के सदस्य इन चारों देशों ने, क्वाड के जरिए हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र में शांति और शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए आपस में बहुपक्षीय समझौते किए हैं, क्वाड ग्रुप आज के दौर का दुनिया का सबसे बड़ा कूटनीतिक मंच बन गया है।
        अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद जो बाइडेन का क्वाड के साथ यह पहला विदेशी सम्मेलन था, इससे पहले जो बाइडेन ने न तो अभी तक नाटो के साथ मीटिंग की है और ना ही यूरोपियन यूनियन के साथ, ऐसे में क्वाड सम्मेलन में शामिल होकर जो बाइडेन ने भारत के साथ मजबूत दोस्ती का संदेश दिया है और क्वाड सम्मेलन में शामिल होकर जो बाइडेन ने चीन के खिलाफ भारत का साथ देने वाला बड़ा कूटनीतिक संदेश भी दिया है। क्वाड ग्रुप के जरिए चीन की दो तरफा घेराबंदी होगी, पहली यह कि क्वाड ग्रुप को लेकर चीन कूटनीतिक दबाव में है, दूसरी घेराबंदी चीन और प्रशांत सागर में चीन की बढ़ती घुसपैठ और सैन्य साजिशों को रोकने के लिए है।
         कोरोना वैक्सीन को लेकर चीन ने बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन दुनिया के देशों ने चीन पर नहीं बल्कि भारत पर अपना भरोसा जताया है, क्वाड के देशों ने साफ संकेत दे दिया है कि इस बड़े गठबंधन में भारत की भूमिका सबसे ज्यादा है। क्वाड देशों के पहले वर्चुअल शिखर सम्मेलन में कोरोना वैक्सीन को लेकर सबसे अहम रणनीति बनाई गई। क्वाड देशों ने ग्लोबल वैक्सीन योजना पर जोर दिया और इंडो-पैसिफिक रीज़न में वैक्सीन की मांग और आपूर्ति को पूरा करने, व दुनिया को कोरोना महामारी के दुष्प्रभावों से बचाने की रणनीति तैयार की, इस रणनीति के तहत वैक्सीन अमेरिका में विकसित की जाएगी, भारत में वैक्सीन का निर्माण होगा, जापान और अमेरिका आर्थिक व्यवस्था करेंगे और ऑस्ट्रेलिया वैक्सीन विकास योजना में मदद करेगा। क्वाड ग्रुप की इस पहल से भारत की वैक्सीन उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। क्वाड ग्रुप के सम्मेलन में दुनिया के चार बड़े देशों का होना और उसमें भी भारत पर सब का भरोसा जताना यह बताता है कि देश अब विश्व गुरु बनने की राह पर आगे बढ़ रहा है।



                               रंजना मिश्रा ©️®️
                             कानपुर, उत्तर प्रदेश

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