ऑक्‍सीजन, बेड, दवाओं की पोस्‍ट करने वाले मीडिया पर कार्रवाई नहीं करें - सुप्रीम कोर्ट

ऑक्‍सीजन,बेड,दवाओं की पोस्‍ट करने वाले मीडिया पर कार्रवाई नहीं करें - सुप्रीम कोर्ट 




नई दिल्ली, 30 अप्रैल। सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश देते हुए कहा है कि सोशल मीडिया पर ऑक्सीजन, बेड, दवाओं आदि की पोस्ट करने वालों पर कार्रवाई नहीं होगी। कोई भी सरकार किसी नागरिक द्वारा सोशल मीडिया पर डाली जानकारी पर कार्रवाई नहीं करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों व डीजीपी को आदेश देते हुए कहा है कि अगर अफवाह फैलाने के नाम पर कार्यवाही की तो अवमानना का मामला चलाएंगे.कोरोना मामले को लेकर सुनवाई करते हुए SC ने दोटूक लहजे में सवाल किया है कि रेमेडेसिविर जैसी दवाओं को कब उपलब्ध कराया जाएगा. कल झारखंड को यह दवा बांग्‍लादेश से लानी पड़ी. कोर्ट ने यह भी पूछा कि राज्यों और केंद्र के बीच वैक्‍सीन की अलग-अलग कीमत के पीछे क्या तर्क है और कोरोना को काबू करने के लिए केंद्र किन प्रतिबंधों, लॉकडाउन पर विचार कर रहा है ?. SC ने शुक्रवार को कहा कि हमने देश के विभिन्न मामलों के विभिन्न मुद्दों की पहचान की हैऔर हमारी सुनवाई का उद्देश्य राष्ट्रीय हित के मुद्दों की पहचान करना और संवाद की समीक्षा करना है. इसे फैसला करने वालों के लिए विचार के लिए किया जा रहा है. इस दौरान केंद्र सरकारक की ओर से कहा गया कि हम इस पर पॉवर प्वाइंट  प्रेजेंटेशन दे सकते हैं। 

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ये  मुद्दे हैं जिनकी हमने पहचान की है- ऑक्सीजन की आपूर्ति का मुद्दा, राज्यों को प्रदर्शित करने के लिए और वास्तविक समय पर अपडेट, राज्यों को कितनी आपूर्ति की जा रहि है, इसका मैकेनिज्म क्या है, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स के उपयोग पर योजना और भारत के बाहर से प्राप्त होने वाली ऑक्सीजन / चिकित्सा सहायता की क्या उम्मीद है. उन्‍होंने कहा कि कोरोना को काबू करने के लिए केंद्र किन प्रतिबंधों, लॉकडाउन पर विचार कर रहा है?. SC ने पूछा कि सरकार ने ऑक्‍सीजन टैंकर, सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाने के संदर्भ में क्या प्रयास किए हैं और किससे 800 अतिरिक्त टैंकर की आपूर्ति की उम्मीद है? ( दरअसल सरकार ने ये नहीं लिखा है कि टैंकर कहां से आएंगे). कोर्ट ने केंद्र पर सवाल उठाया कि आखिर वो वैक्सीन की 100  फीसदी डोज क्यों नहीं खरीद सकता. राज्यों और केंद्र के बीच अलग-अलग कीमत के पीछे क्या तर्क है. चाहे वह केंद्र हो या राज्य, दो कीमतें क्यों हों. केंद्र निर्माता के साथ बातचीत करे। 

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि हम वैक्‍सीन की 50 फीसदी डोज लेंगे और 50 फीसदी राज्य लेंगे.इससे समानता बनी रहेगी. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा कि रेमेडेसिविर जैसी दवाओं को कब उपलब्ध कराया जाएगा, कल झारखंड को बंगलादेश से लानी पड़ीं.SC ने यह भी पूछा कि रेमेडेसिविर के आवंटन के पीछे क्या प्रणाली है और बेड पर केंद्र और राज्यों के बीज जिम्मेदारी किस तरह बांटी गई है ? केंद्र पर सवालों की बौछार करते हुए शीर्ष कोर्ट ने पूछा कि मरीजों के अस्पताल में भर्ती करने की क्या प्रक्रिया है. अहमदाबाद में सिर्फ 108 एंबुलेंस में आने वाले मरीजों को भर्ती किया जाता है, इसके अलावाअस्थायी कोविड सेंटर बनाने की क्या तैयारी है, जो लोग इंटरनेट नहीं जानते या पढ़े लिखे नहीं है, उनके लिए वैक्सीन की क्या व्यवस्था है, श्मशान में काम करने वाले कर्मियों का टीकाकरण की क्या योजना है, जरूरी दवाओं के लिए पेटेंट की व्यववस्था होग और यह कैसे सुनिश्चित किया जाएगा कि वैक्सीन को लेकर एक राज्य को दूसरे पर प्राथमिकता नहीं मिलेगी?सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश देते हुए कहा है कि सोशल मीडिया पर ऑक्सीजन, बेड, दवाओं आदि की पोस्ट करने वालों पर कार्रवाई नहीं होगी. कोई भी सरकार किसी नागरिक द्वारा सोशल मीडिया पर डाली जानकारी पर कार्रवाई नहीं करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों व डीजीपी को आदेश देते हुए कहा है कि अगर अफवाह फैलाने के नाम पर कार्यवाही की तो अवमानना का मामला चलाएंगे। (ndtv.in) 



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