कोरोना वायरस की दूसरी लहर क्या है!

  कोरोना वायरस की दूसरी लहर क्या है! 


जानिए पहली लहर से कितनी अलग है कोरोना वायरस की दूसरी लहर

देश भर में कोरोना संक्रमण के नए रिकॉर्ड बनते जा रहे हैं. भारत में कोरोना की इस लहर को पहले से ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है. यह तो तय ही है कि कोरोना की यह दूसरी लहर पहली लहर से बहुत अलग है, लेकिन अभी तक लोगों  को यह ठीक से नहीं पता है कि दोनों लहरों में क्या फर्क है.

इस बार के वेरिएंट कुछ अलग
कोरोना वायरस का नया संस्करण यानि कि सार्सकोव-2 शुरू से ही म्यूटेट हो रहा है. इसके अब तक बहुत सारे वेरिएंट्स आ चुके हैं यह भी बताया गया है कि यह पहले से शक्तिशाली हो रहा है.  कुछ वेरिएंट ज्यादा जानलेवा हैं तो कुछ केवल संक्रमण में तेज हैं और प्रभाव में शुरुआती वेरिएंट की तरह ही हैं. इतना ही नहीं पिछले एक साल में कोरोना वेरिएंट के लक्षणों में भी इजाफा हुआ है.

कौन सा वेरिएंट है ये
तो दूसरी लहर के कोरोना वायरस के स्ट्रेंस में क्या नया है. विशेषज्ञों के मुताबिक नया कोरोना वायरस ब्राजील और केंट का वेरिएंट हैं. इसके बारे में माना जाता है कि यह ज्यादा लक्षण दिखाता और शरीर के अंगों में ज्यादा घातक वार करता है. देश में कोरोना संक्रमण से ग्रसित होने वाले मरीजों में कुछ अतिरिक्त लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं.क्या हैं नए लक्षण
नए लक्षणों में लोगो के पेट में दर्द, उल्टी, जी मचलना, यहां तक कि सर्दी जैसे लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं जबकि बुखार, बदन में दर्द, खांसी, सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण तो पहले के जैसे कायम ही हैं. यहां तक कि कुछ मरीजों में तो आम कोरोना लक्षण दिखाई भी नहीं दे रहे हैं.

ज्यादा मरीज आ रहे हैं
बहुत से डॉक्टर अब सलाह देने लगे हैं कि लोगों को अब संपूर्ण लक्षण ना भी दिखें तो भी कोविड टेस्ट करा लेना चाहिए. गौरतलब है ज्यादातर मामले  या तो हलके हैं या फिर असिम्प्टोमैटिक या अलाक्षणिक हैं. लेकिन अब वायरस के घातक हो जाने से ज्यादा गंभीर मरीज सामने आ रहे हैं.  डायबिटीज, दिल के मरीज, हाइपरटेंशन वाले कोरोना संक्रमितों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत ज्यादा होती है.

व्यवस्था पर दोहरा असर
ऐसे हालातों में स्वास्थ्य व्यवस्था पर दोहरा दबाव पड़ रहा है. एक तरफ जहां जांच करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है, तो वहीं दूसरी तरफ अस्पताल में बढ़ते मरीजों का दबाव एक चुनौती बनता जा रहा है. वहीं डॉक्टरों के लिए भी फेफडों,  रेस्पेरोटरी सिस्मट, पेट आदि कई समस्याओं का इलाज भी करना पड़ रहा है.

पेट की समस्याओं में इजाफा
इस नई लहर के वेरिएंट के साथ नए लक्षणों सबसे प्रमुख पेट की समस्याएं हैं. अब कोविड मरीजों में ये समस्याएं पहले से ज्यादा हो रही हैं. डॉक्टरों का कहना है कि फेफड़ों के अलावा अब डाइजेस्टिव सिस्टम भी कोरोना के नए वेरिएंट का सबसे तगड़ा शिकार है. डायरिया, पेट दर्द, उल्टी, जी मचलना जैसी पेट संबंधी कई समस्याएं अब कोविड मरीजडों में आम होती जा रही हैं.

बढ़ता वायरल लोड
वायरल लोड मरीज के खून में सार्वकोव-2 की मात्रा बताता है. कोविड-19 के जांच में इसका ही परीक्षण किया जाता है. वायरल लोड का ज्यादा होने की कई वजह हो सकती हैं, लेकिन आमतौर पर ज्यादा संख्या का मतलब वायरस का फैलना होता है. कोविड-19 के नए मामलों में पहली लहर के मुकाबले ज्यादा वायरल लोड आ रहा है.

कोविड-19 की दवा ने जगाई शुरुआती परीक्षणों में उम्मीद

वैसे तो अभी कोरोना वैक्सीन के प्रभावी हैं, लेकिन नए वेरिएंट के मामलों में इनकी प्रभावोत्पादकता पर लोगों को संदेह है. अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि ये वेरिएंट वैक्सन की बनाई एंटीबॉडी को बायपास कर ही जाती हैं. इसके लिए हमें थोड़ा इंतजार करना होगा. वहीं अभी बचाव और रोकथाम के प्रयासों के तौर पर मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की अहमित और बढ़ती दिख रही है. (news18.com)

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