भीलवाड़ा का है आनंद गिरि,

भीलवाड़ा का है आनंद गिरि


लगे हिस्ट्रीशीटर होने के गंभीर आरोप

महन्त नरेंद्र गिरी ने सुसाइड नोट में लगाये चरित्र हनन  के आरोप 


जयपुर, 21 सितंबर। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के मामले में उनके शिष्य आनंद गिरि को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। 


आनंद गिरि का नाता राजस्थान के भीलवाड़ा से है। वह आसींद क्षेत्र के सरेरी गांव के रहने वाले हैं। उसका असली नाम अशोक है। 12 साल की उम्र में वह अपना गांव छोड़ हरिद्वार चला गया था।

महन्त नरेंद्र गिरी ने सुसाइड नोट में आनन्द गिरी पर आरोप लगाते हुए लिखा है कि एक दो दिन में कम्प्यूटर के माध्यम से मोबाइल से मेरी फोटो लगाकर किसी लड़की या महिला के साथ गलत काम करते हुए मेरे फोटो वायरल कर देगा तो मैं किस किस को सफाई देता फिरूगां। एक बार तो बदनाम हो जाऊंगा। में जिस पद पर हूँ वह गरिमा मयी पद है। 

1997 में आनंद गिरि अपना घर छोड़ हरिद्वार चला गया। उस समय वह गांव और परिवार में अशोक के नाम से जाना जाता था। 

इसके बाद वह हरिद्वार में महंत नरेंद्र गिरी की शरण में गया। 2012 में महंत नरेंद्र गिरि के साथ अपने गांव भी आया था। नरेंद्र गिरि ने उसको परिवार के सामने दीक्षा दिलाई और वह अशोक से आनंद गिरि बन गया।संत बनने के बाद वह दो बार गांव आया है। पहली बार दीक्षा लेने के लिए और इसके बाद अभी 5 महीने पहले। जब उसकी मां का देहांत हो गया था। इस दौरान गांव के लोगों ने आनंद गिरि का काफी सत्कार किया था।

परिवार के लोगों ने बताया कि आनंद गिरि जब सातवीं कक्षा में पढ़ता था, तब ही गांव छोड़ हरिद्वार चला गया था। वह ब्राह्मण परिवार से हैं। पिता गांव में ही खेती करते हैं। 

आनंद गिरि परिवार में सबसे छोटा है। उसके तीन भाई हैं। एक भाई आज भी सब्जी का ठेला लगाते हैं। दो भाई का सूरत में कबाड़ का काम है। 

सरेरी गांव आनंद गिरि को एक अच्छे संत के रूप में जानता है। उसे शांत और शालीन स्वभाव का बताया जाता है। 

आनंद गिरि शक के दायरे में इसलिए हैं, क्योंकि नरेंद्र गिरि से उसका विवाद काफी पुराना था। 

इसकी वजह बाघंबरी गद्दी की 300 साल पुरानी वसीयत है, जिसे नरेंद्र गिरि संभाल रहा था। 

कुछ साल पहले आनंद गिरि ने नरेंद्र गिरि पर गद्दी की 8 बीघा जमीन 40 करोड़ में बेचने का आरोप लगाया था। इसके बाद विवाद गहरा गया। आनंद ने नरेंद्र पर अखाड़े के सचिव की हत्या करवाने का आरोप भी लगाया था। 

आज एक और महंत ने इस आनंद गिरि पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 

उत्तर प्रदेश के नोएडा में ब्रह्मचारी कुटि के स्वामी ओम भारती ने आनंद गिरि को लेकर खुलासा किया है। स्वामी ओम भारती ने बताया कि आनंद एक हिस्ट्रीशीटर है, लॉकडाउन के दौरान उसने नोएडा के सेक्टर 82 में मौजूद ब्रह्मचारी कुटि पर कब्जा करने की कोशिश की थी।

स्वामी ओम भारती ने अखाड़ा परिषद के महंत नरेंद्र गिरि से संपर्क किया, तब जाकर आनंद गिरि ने अपना दावा वापस लिया था।

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