नई आबकारी नीति के विरोध में शुगर मिल कार्मिकों का विरोध प्रदर्शन

नई आबकारी नीति के विरोध में शुगर मिल के कार्मिक 33 जिलों में प्रदर्शन कर कलेक्टर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सोपेंगे।


जयपुर । राजस्थान स्टेट गंगानगर शुगर मिल्स एन्ड डिस्टलरी (म) कर्मचारी संघ के प्रदेश संयोजक विनोद अमन/प्रदेशाध्यक्ष मदन मोहन मिश्रा एवम् प्रदेश महामंत्री पंकज वर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष महेन्द्र सिंह राजावत ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि नई आबकारी निति 2022-23-24 में देशी मदिरा होल सेल विक्री का कार्य राजस्थान स्टेट गंगानगर शुगर मिल्स से छीन कर राजस्थान बेवरीज कॉर्पोरेशन को दिया गया है जिसका विरोध पूरे राजस्थान में संस्थान के कमर्चारी व श्रीगंगानगर के किसान मजदूर/कर्मचारी कर रहे हैं।

बुधवार को झोटवाड़ा मदिरालय/मुख्यालय नेहरू सहकार भवन व प्रदेशभर के मदिरालयों व डिपोज के कर्मचारियों द्वारा प्रदर्शन किया गया एवं प्रदर्शन कर जिलाध्यीश महोदय को ज्ञापन सौंपे गये जयपुर में कमर्चारी नेता विनोद अमन, मदन मोहन मिश्रा, महेन्द्र सिंह राजावत, पंकज वर्मा, पूरण मल मीणा, मदन लाल मीणा छोटूलाल प्रजापत, भागीरथ सिंह राठौड़, हनुमान सहाय मीणा, सीताराम मीणा, हजारी लाल मीणा, रामेश्वर सैनी, जितेन्द्र सिंह राठौड़ एवं मुख्यालय से एस.के. गुप्ता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, त्रिलोक साहू, कमलेश शर्मा, लक्ष्मण सिंह आदि नेताओं के द्वारा ज्ञापन सौंपा गया एवं सम्बोधन किया गया।

 ज्ञापन में राज्य के मुख्यमंत्री  एवम् आबकारी मंत्री से मांग कि राज्य के जनता मजदूर किसान एवम् राज्य के राजस्व के हितों को ध्यान में रखते हुए देशी मदिरा/आर.एम,एल, मदिरा एवम् विदेशी मदिरा/बीयर का सिगंल होलसेल का कार्य राजस्थान स्टेट गंगानगर शुगर मिल्स को दिया जावे। साथ ही राजस्थान ब्रेवरीज कॉरपोरेशन का विलय आर.एस.जी.एस.एम. में करते हुए देशी मदिरा/आरएमएल मदिरा का उत्पादन एवम् देशी मदिरा/आरएमएल मदिरा एवम् विदेशी मदिरा/बीयर का होलसेल बिक्री कार्य को एक ही संस्थान के द्वारा राजस्थान स्टेट गंगानगर शुगर मिल्स के माध्यम से करने पर कार्य सुगमता एवं सरलता से किया जा सकें जिससे राज्य के आबकारी ड्यूटी के अलावा अतिरिक्त राजस्व लगभग 300 करोड़ प्रतिवर्ष का लाभ राज्य सरकार को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। वही अगर सरकार यही कार्य राजस्थान बेवरिज कॉर्पोरेशन को देती है तो इसके संचालन में लगभग 136 करोड़ का व्यय सरकार को अलग से करना पड़ेगा तथा 136 करोड़ रूपये का प्रतिवर्ष राज्य सरकार के राजस्व में हानि होगी। वहीं दूसरी ओर श्रीगंगानगर चिनी मिल के किसानों को गन्ना का भुगतान जो कि प्रतिवर्ष 40 करोड़ (चिनी मिल का घाटा) का भुगतान सरकार को अपने राजस्व में से अलग से देना पड़ेगा। इस पॉलिसी में सबसे अधिक नुकसान किसानों को एवम् संस्थान में कार्यरत मजदूर को होना तय हैं।  

मुख्यमंत्री  से संस्थान के कर्मचारी गण विनम्र अनुरोध करते हैं कि नई आबकारी नीति 2022-23-24 में आंशिक संशोधन करवा जिससे किसान मजदूर राज्य का राजस्व के हितों की रक्षा हो सके। संघ के प्रदेशाध्यक्ष मदन मोहन मिश्रा ने बताया कि  23 फरवरी को 33 जिलों में उक्त नीति का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री को जिला कलेक्टर महोदय के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया।

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