'सुसाइड प्रिवेंशन और इंटरवेंशन स्टरेटजी’ टॉक शो आयोजित

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 

'सुसाइड प्रिवेंशन और इंटरवेंशन स्टरेटजी’ टॉक शो आयोजित



आत्महत्या बचाव स्टरेटजी की आवश्यकता है जो इससे जूझने में सरकारी विज़न और कमिटमेंट को दर्शा सके- अनुभा जैन



 मनुष्य आध्यात्म  योग ध्यान से जुड कर अपने तन और मस्तिष्क को स्वस्थ रखे तो समाज में सकारात्मकता का माहौल पैदा होगा- डा.के.एल.जैन


जयपुर/बैंगलोर। आत्महत्या जैसी सामाजिक समस्या से बचाव के लिये इसे सरकार द्वारा ग्लोबल सामाजिक स्वास्थ्य और पॉलिसी एजेंडा में प्राथमिकता दिया जाना चाहिये। साथ ही बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाते हुये इस क्षेत्र में अधिकाधिक जागरूकता बढ़ायी जानी चाहिये जो पहचाने सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक प्रभावों को भी।’ यह कहना था राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स व इंडस्टरीज की मानद संयुक्त सचिव व पत्रकार अनुभा जैन का जो अंतरराष्टरीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में वर्चुअल टॉक शो ‘सुयुसाइड प्रिवेंशन और इंटरवेंशन स्टरेटजी’ के अवसर पर बोल रही थीं।

 

ज्ञातव्य रहे कि टॉक शो का आयोजन वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स व इंडस्टरीज और मुंबई की एन.जी.ओ. सिस्टर्स लिविंग वर्क्स के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। अनुभा जैन ने टॉक शो की मुख्य वक्ता सिस्टर्स लिविंग वर्क्स एन.जी.ओ. की निदेशक मीनीक्षी.आर.नागवेकर, एन.जी.ओ. टरेनिंग कॉडिनेटर महिमा और पैनल में उपस्थित राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स व इंडस्टरीज के मानद महासचिव डा.के.एल.जैन से विषय पर गहराई से चर्चा की। सिस्टर्स लिविंग वर्क्स एन.जी.ओ. की निदेशक मीनीक्षी.आर.नागवेकर, एन.जी.ओ. टरेनिंग कॉडिनेटर महिमा ने आत्महत्या के कारण व निवारणों और एन.जी.ओ द्वारा किये जाने वाले बचाव कार्यों पर जानकारी दी।


विषय पर बोलते हुये डा.के.एल जैन ने कहा कि आज के समय में आत्महत्या का मुख्य कारण माता पिता द्वारा आर्थिक संसाधनों को पूरा करने के लिये नौकरी की व्यस्तता और बच्चों को पूरा समय नहीं दे पाना है। इस कारण बच्चों में हीन भावना व डर का माहौल पनप रहा है। बच्चों की परवरिश में माता पिता द्वारा सकारात्मक रूप से बिना कोई दबाव पैदा किये उनकी गलती पर उसे डांटने की जगह प्यार भरा वातावरण देते हुये सही दिशा देनी चाहिये। साथ ही आज मनुष्य आध्यात्म से जुड़ कर योग ध्यान कर अपने तन और मस्तिष्क को स्वस्थ रखे तो समाज में सकारात्मकता का माहौल पैदा होगा। बात करते हुये अनुभा जैन ने बताया कि ‘सुयुसाइड या आत्महत्या एक सामाजिक समस्या है और इसे स्टिगमा या एक ऐसे काले धब्बे के रूप में देखा जाता है जिस विषय पर चिंतन व चर्चा की बेहद आवश्यकता है। पर लोग इस पर बात करने से भी कतराते हैं। इसी संदर्भ में एक राष्टरीय सुयुसाइड या आत्महत्या बचाव स्टरेटजी की भी आवश्यकता है जो आत्महत्या से जूझने में सरकारी विज़न और कमिटमेंट को दर्शा सके। सुयुसाइड से बचाव के लिये स्वास्थ्य, कानून, कृषि, व्यापार, राजनीति आदि सभी क्षेत्रों को साथ एकीकृत रूप में कार्य करने की जरूरत है।’


कार्यक्रम में मुंबई, बैंगलोर, दिल्ली व राजस्थान से गणमान्य अतिथियों ने शिरकत की जिनमें यूनिसेफ की राजस्थान स्टेट रिसोर्स पर्सन वृंदा शर्मा, राजस्थान हाई कोर्ट के वकील पीयूश, हैप्पी पाइंट ग्रुप ऑफ स्कूल के निदेशक गिरधर माहेश्वरी, वी.एम.वेयर बैंगलोर के डायरेक्टर दिनेश जैन, बैंगलोर से ही डा.ममता सतीश, नाबार्ड बैंक मुंबई के  पूर्व महानिदेशक डा.प्रकाश बक्शी आदि शामिल थे। । अंत में प्रश्नोत्तर राउंड में लोगों ने अपने प्रश्न पैनल में उपस्थित मुख्य वक्ता व पैनलिस्टस से पूछे। धन्यवाद ज्ञापन पत्रकार राघव शर्मा ने अर्पित किया।

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