शांति की स्थापना हेतु लोकतंत्र बचाना जरूरी - थानवी

 अ भा शांति और एकजुटता संगठन की जनरल कौंसिल 


"आजादी के 75 वर्ष और भारतीय गणतंत्र के समक्ष
 चुनौतियां"विषय पर सैमीनार के साथ हुआ उद्घाटन 
 शांति की स्थापना  हेतु लोकतंत्र बचाना जरूरी - थानवी 

                              (आशा पटेल) 

 जयपुर। अखिल भारतीय शांति और एकजुटता संगठन की जनरल कौंसिल की बैठक 16 अप्रेल को  पिंकसिटी प्रैस जयपुर में शुरू हुई।
"आजादी के 75 वर्ष और भारतीय गणतंत्र के समक्ष चुनौतियां"विषय पर सैमीनार के साथ बैठक का उद्घाटन हुआ।  सैमीनार की अध्यक्षता डॉ.चन्द्रभान, विधायक बलवान पूनिया और रणबीर सिंह के अध्यक्ष-मंडल ने की।
अखिल भारतीय शांति और एकजुटता संगठन की जनरल कौंसिल की ओर से आयोजित सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रसिद्ध पत्रकार और हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ओम थानवी ने कहा कि आज शांति स्थापना के लिए देश में लोकतंत्र को बचाना जरूरी है। इसके लिए सच बोलने का साहस करना होगा। उन्होंने मीडिया के कॉर्पोरेटीकरण पर कहा कि वह राजनीतिक हिंसा का प्रवक्ता बनकर नफरत फैला रहा है। 
विषय प्रवर्तन करते हुए पल्लव सेन गुप्ता ने कहा कि वर्तमान राजसत्ता संविधान के मूल मूल्यों की विरोधी है।
नेहरू अध्ययन केंद्र के पूर्व निदेशक प्रो. सतीश राय ने लोकतंत्र के लिए धर्मनिरपेक्षता और भाईचारे को बचाना जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत पर हमले हो रहे हैं, जनता एकजुट होकर इसको बचाएगी। उन्होंने कहा कि आर एस एस अपनी सांप्रदायिकता के द्वारा भारत के संघीय ढांचे को चुनौती दे रहा है। 
महात्मा गाँधी समाज विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो.बी.एम.शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि दक्षिणपंथी ताकतों ने देश की आजादी के नायकों और इतिहास को विकृत करने की कोशिश तेज कर दी है।
एप्सो के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंडल के सदस्य प्रो.बृज कुमार पांडेय ने कहा कि इस अवसरवादी सत्ता के विरुद्ध जनांदोलन की जरूरत है।  रंगकर्मी इप्टा के  रणबीर सिंह ने कहा कि देश में फासीवादी ताकतें बहुसंख्यक राज्य की स्थापना का प्रयास कर रही हैं। एप्सो की नेशनल काउंसिल के महासचिव आर.अरुण कुमार ने भारत में बढ़ती निरंकुशता की ओर संकेत करते हुये इसके खिलाफ व्यापक जनसंघर्ष चलाने का आह्वान किया। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के विधायक बलवान पूनियाँ ने कहा कि आज कई जगह ऐसे जनप्रतिनिधि भी सत्तारूढ़ हैं,जिन्होंने शायद कभी संविधान को पढ़ा ही नहीं।
  डा.चंद्रभान ने स्वाधीनता संघर्ष के अध्ययन पर जोर दिया।  कार्यक्रम का मंच संचालन प्रो.राजीव गुप्ता ने किया।

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