पर्यावरण बचे तो प्राण बचे

पर्यावरण बचे तो प्राण बचे

                          (राजकुमार बरुआ) 


आजकल जिसको देखो तो उसके मुंह से पहला शब्द यही निकलता है गर्मी बहुत है, बात तो सच है गर्मी तो सचमुच में बहुत है गर्मियों की शुरुआत ही 40,42, डिग्री के साथ हो रही है इस तीन महीने की गर्मी में और कितने ऊपर पारा चढ़ेगा कोई कह नहीं सकता।


आज भारत देश की जनसंख्या लगभग 139 करोड़ हो रही है देश का कुल वन और वृक्षों से भरा क्षेत्र 80.9 मिलियन हेक्टेयर है जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 24.62 प्रतिशत है ‌ करोड़ों जनसंख्या वाले देश में हरियाली की निरंतर कमी होती जा रही है आज के भारत में वन क्षेत्रों का कम होना अति गंभीर समस्या है जो भविष्य के लिए काफी घातक सिद्ध होगी। आज का मनुष्य काफी आरामदायक जीवन जीने का आदी हो चुका है उसको अपने सिवा बाकी किसी की चिंता नहीं रहती है इसका दुष्परिणाम भी वह कोविड-19 की महामारी में देख चुका है और काफी गंभीर परिणाम की भरपाई भी उसने की है पर फिर भी मनुष्य तो मनुष्य है, जब तक उसकी जान पर ना बने जब तक वो हर परिस्थिति से अनभिज्ञ ही रहना चाहता है‌‌। मानव ने विकास के नाम पर जितना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है और अपनी आवश्यकताओं के लिए प्राकृतिक संसाधनों का उसने तेजी से उपभोग किया है उसके ही दुष्परिणाम भयानक रूप में अब सामने आने लगे हैं असल में भोग वादी व्यवस्था के असीमित विस्तार और राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में पर्यावरण को काफी नुकसान हुआ है वर्तमान उपभोक्तावाद के दौर में अधिक से अधिक प्राप्त करो और अधिक से अधिक उपभोग करो की मानसिकता ने हमारी सामाजिक और आर्थिक संरचना के लिए काफी घातक सिद्ध हो रही है याद रहे इस पृथ्वी पर कोई भी संसाधन असीमित नहीं उन्हें एक ना एक दिन समाप्त होना ही है इसलिए जरूरी है कि हम उतना ही उपयोग करें जितना यह धरती सहन कर सकती है वृक्ष हमें केबल ऑक्सीजन ही नहीं देते वह मनुष्य के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है जो मानव की उत्पत्ति के साथ ही मानव से जुड़ा हुआ है इस जुड़ाव के कारण ही मानव अपने जीवन को सुगम तरीके से जी पा रहा है एक वृक्ष हमें ऑक्सीजन और कई प्रकार की जहरीली गैसों से बचाता है एक विशाल वृक्ष का जीवन बहुत बड़ा होता है, जो मनुष्य को फल फूल पत्ती छाया और अपनी सूखी लकड़ियां भी देता है। आज के भौतिकवादी युग में इंसान पैसों की भाषा बहुत अच्छे से समझता है तो एक विशाल वृक्ष जिसकी आयु 50 साल मानी जाए तो वह आपको 50 साल में इतना कुछ देता है जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते हैं एक पेड़ आपको 17 से 18 लाख रुपए की ऑक्सीजन देता है 41 लाख रुपए के पानी की रीसायक्लिंग करता है 35 लाख रुपए के वायु प्रदूषण का नियंत्रण करता है 18 लाख रुपए के जमीन के कटाव खर्च पर रोक लगाता है हर साल 3 किलो कार्बनडायऑक्साइड सोखता हैं 300 पेड़ मिलकर खत्म कर सकते हैं एक वयस्क व्यक्ति द्वारा जीवन भर में फैलाए गए प्रदूषण को, यहां पेड़ पौधे जीवन भर खामोशी से आपके लिए काम करते रहते हैं जो प्राण रक्षक संसाधन आप पैसे देकर भी नहीं खरीद सकते वह भी आपको फ्री में उपलब्ध कराते हैं और आपसे यही अभिलाषा रखते हैं कि आप उनको नुकसान ना पहुंचाएं। भारत में वृक्षों को तो देव तुल्य माना गया है कई उत्सव में वृक्षों को लगाना जरूरी माना गया है आज भी कहीं जगह लोग अपने लोगों की यादों में वृक्षारोपण करते हैं कुछ लोग अपने जन्मदिन पर भी वृक्षों को लगाते हैं, भारत देश में धर्म और वृक्ष एक दूसरे के समकक्ष हैं हमारे यहां तो कहा भी गया है।

*देश कूप समा वापी,दशवापी समोहद्:।*

*दशह्द सम: पूत्रों,दशपुत्रो समो दुम:।*

मतलब- दस कुओं के बराबर एक बावड़ी होती है दस बावडियों के बराबर एक तालाब दस तालाब के बराबर एक पुत्र है और दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है।

भारत देश में किसी भी उत्सव में वृक्षों की पूजा और वृक्षों के द्वारा दी जाने वाली बहुमूल्य सामग्री का अपना ही महत्व जिसके बिना कोई भी तीज त्यौहार मनाना हमारे यहां संभव ही नहीं है। आज के युग में मनुष्य का भौतिकवादी होना भी पर्यावरण के लिए काफी नुकसानदायक सिद्ध हो रहा है जिसके कारण मनुष्य की आयु कम होते जा रही है और उसके रोग बढ़ते जा रहे हैं फिर भी हम लोग प्राकृतिक से जुड़े हुए तो हैं पर उस से दूरी बढ़ती जा रही है

हम आज भी अपनी व्यस्त दिनचर्या को जीते हुए किसी विशेष आयोजन और उत्सव पर पेड़ लगाने जैसा राम काज कर सकते हैं आप लोग कभी एक स्थान से दूसरे स्थान जाने के लिए रेल या अपनी निजी गाड़ियों का उपयोग करते हैं तो बारिश के मौसम में कुछ फलों के बीज या गुठली जंगलों में डाल सकते हैं जिससे वह फलदार और बड़े वृक्ष बने। गमलों में भी ऑक्सीजन और दूषित गैसों से बचाने वाले पौधे आप लगा सकते हैं धर्म के आधार पर तुलसी का पौधा बहुत ही पूजनीय है इसका तो हर घर में होना अति आवश्यक माना गया है सुबह शाम उसकी पूजा करना भी आपको प्रकृति से जोड़ कर रखता है और भी कई ऐसे पौधे हैं जो आप गमलों में लगा सकते हैं मनी प्लांट, स्पाइडर प्लांट, जरबेरा डेजी,ऐरीका पाम,स्नेक प्लांट। बड़े और पर्यावरण को संभालने वाले वृक्षों में कुछ वृक्ष प्रमुख हैं पीपल का पेड़ यह पेड़ जो वर्षों बरस तक जीवित रहता है और 60 से 80 फुट तक का एक विशाल वृक्ष बनता है जो कई रूपों में मानव की सेवा करता है नीम का पेड़ आयुर्वेद के हिसाब से नीम का पेड़ पेड़ ना होकर औषधियों का खजाना है बरगद का वृक्ष इसकी विशालता और सुंदरता तो देखते ही बनती है अशोक का वृक्ष छोटी जगह में भी इसको लगाकर आप ऑक्सीजन और जहरीली गैसों से बच सकते हैं अर्जुन का पेड़ हमेशा हरा भरा रहता है आयुर्वेद में इसके अनेकों फायदे बताए गए हैं ऐसे अनेक पेड़ पौधे हैं जो आपको शुद्ध जल वायु में रहने के लिए आवश्यक है। तो आओ हम सब मिलकर यह शपथ लें के हम अपने जीवन में अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाने का संकल्प लेते हैं जिससे हमारी आने वाली पीढ़ियों को सोपे हरी-भरी दुनिया और उन्हें शुद्ध जलवायु मिल सके और भविष्य में कोविड-19 चुनौतियों का सामना ना करना पड़े पर्यावरण से जुड़कर जीवन को बहुत सरल बनाते हुए हम अपनी पीढ़ी को पेड़ पौधों की सौगात देते हुए अपने जीवन को आसान बनाएं और हो सके तो आप किसी की शादी में बर्थडे में या किसी और उत्सव में जाते हैं तो पौधा देने की परंपरा डालें हमारे यहां तो वृक्ष मानव के नाम से विख्यात विश्वेश्वर दत्त सकलानी जी उत्तराखंड जैसे महामानव भी हुए हैं जिनमें अकेले ही 50 लाख से ज्यादा वृक्षों को लगाया है इसके लिए उन्हें 19 नवंबर 1986 को इंदिरा गांधी प्रियदर्शनी वृक्ष मित्र पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है क्यों ना हम भी उन्हीं का अनुसरण करते हुए वृक्षों को अपना मित्र बनाएं और अपने आयोजनों में वृक्ष लगाने की परंपरा डालें। आपका लगाया एक एक पेड़ आपकी आने वाली पीढ़ियों को देने वाला सबसे खूबसूरत उपहार होगा और आप हमेशा आपकी यादों को हरा भरा रखेगा।

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