पहली आदिवासी महिला द्रोपदी मुर्मू बनेगी देश की राष्ट्रपति

 पहली आदिवासी महिला द्रोपदी मुर्मू बनेगी देश की राष्ट्रपति


 इस बार बदलेगा इतिहास

आज़ाद भारत में 72 साल से चली आ रही परम्परा टूटेगी

                     
दिल्ली ।(छाया शर्मा)। देश के नए राष्ट्रपति  (presidential election) के चयन को लेकर तारीखों का ऐलान हो गया है और तमाम राजनीतिक दल राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारों के नाम तय करने में लगे हैं। केंद्र में भारतीय जनता पार्टी अगर अपने एनडीए गठबंधन और अन्य पार्टियों से बातचीत कर रही है तो विपक्ष की और से बवाल शुरू हो गया है।

पिछले हफ्ते ममता बनर्जी  ने विपक्षी दलों की ओर से साक्षी को उम्मीदवार बनाने के लिए दिल्ली में एक बड़ी बैठक की है।

लेकिन क्या इस बार नया राष्ट्रपति स्वतंत्र भारत के इतिहास को बदल पाएगा….जो अब तक पिछले 14 राष्ट्रपति नहीं...

1947 में आजादी से लेकर 2014 तक देश के हर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का जन्म आजादी से पहले हुआ था। लेकिन मई 2014 में प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी 1947 के बाद पैदा हुए और शीर्ष पद पर रहने वाले पहले नेता बने।

मोदी स्वतंत्र भारत में जन्म लेने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री हैं। परन्तु अब तक जितने भी नेता राष्ट्रपति बने है उनका जन्म 1947 से पहले हुआ था।

19वीं सदी में पैदा हुए 4 राष्ट्रपति...

राष्ट्रपति  रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति हैं और अब तक जितने भी राष्ट्रपति बने हैं, सभी का जन्म देश की आजादी से पहले हुआ था। मौजूदा राष्ट्रपति कोविंद ऐसे नेता हैं जिनका जन्म देश की आजादी से थोड़ा पहले हुआ था।

उनका जन्म 1 अक्टूबर 1945 को हुआ था, उनके जन्म के लगभग 2 साल बाद देश को लंबे संघर्ष के बाद आजादी मिली। लेकिन देश को अब भी उस पहले प्रेसिडेंट का इंतजार है जो देश की आज़ाद फ़िज़ा में पैदा हुआ था।

अब बात करते हैं देश के राष्ट्रपति  के जन्म से जुड़े खास आंकड़ों की। देश के 14 पूर्णकालिक राष्ट्रपतियों में से 4 राष्ट्रपति ऐसे थे जिनका जन्म 19वीं सदी में यानी 1900 से पहले हुआ था।
पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को हुआ था। जबकि देश के दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था।

5 सितंबर 1888 को, पहले राष्ट्रपति के जन्म के लगभग 4 साल बाद। राधाकृष्णन के जन्मदिन पर देश हर साल शिक्षक दिवस भी मनाता है।

देश के तीसरे से राष्ट्रपति जाकिर हुसेन का जन्म 1897 में हुआ था। जबकि चोथे राष्ट्रपति का जन्म जो की वीवी गिरी थे, 10 अगस्त 1894 को हुआ था

20वीं सदी में जन्म लेने वाले पहले राष्ट्रपति...

फखरुद्दीन अली अहमद देश के पांचवें राष्ट्रपति बने और वह 20वीं सदी में पैदा हुए पहले नेता थे जो राष्ट्रपति बने। उनका जन्म 13 मई 1905 को हुआ था।

देश के सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति की बात करें तो वे केआर नारायणन हैं। नारायणन 25 जुलाई 1997 को 77 साल 5 महीने 21 दिन की उम्र में राष्ट्रपति बने।
इसी तरह निर्विरोध राष्ट्रपति चुनी गई नीलम संजीव रेड्डी देश की सबसे कम उम्र की नेता है।
1940 के बाद पैदा हुए नेताओं में रामनाथ कोविंद अकेले ऐसे नेता हैं जो राष्ट्रपति बने।

कौन हैं द्रौपदी मुर्मू?

द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा में हुआ था। वह दिवंगत बिरंची नारायण टुडू की बेटी हैं। मुर्मू की शादी श्याम चरम मुर्मू से हुई थी।
द्रौपदी मुर्मू ओडिशा में मयूरभंज जिले के कुसुमी ब्लॉक के उपरबेड़ा गांव के एक संथाल आदिवासी परिवार से आती हैं।
उन्होंने 1997 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। द्रौपदी मुर्मू 1997 में ओडिशा के राजरंगपुर जिले में पार्षद चुनी गईं।
1997 में ही मुर्मू बीजेपी की ओडिशा ईकाई की अनुसूचित जनजाति मोर्चा की उपाध्यक्ष भी बनी थीं।
मुर्मू राजनीति में आने से पहले श्री अरविंदो इंटीग्रल एजुकेशन एंड रिसर्च, रायरंगपुर में मानद सहायक शिक्षक और सिंचाई विभाग में कनिष्ठ सहायक के रूप में काम कर चुकी थीं।
द्रौपदी मुर्मू ने 2002 से 2009 तक और फिर 2013 में मयूरभंज के भाजपा जिलाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।
द्रौपदी मुर्मू ओडिशा में दो बार की बीजेपी विधायक रह चुकी हैं और वह नवीन पटनायक सरकार में कैबिनेट मंत्री भी थीं। उस समय बीजू जनता दल और बीजेपी के गठबंधन की सरकार ओडिशा में चल रही थी।
ओडिशा विधान सभा ने द्रौपदी मुर्मू को सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया।
द्रौपदी मुर्मू ने ओडिशा में भाजपा की मयूरभंज जिला इकाई का नेतृत्व किया था और ओडिशा विधानसभा में रायरंगपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था।
वह झारखंड की पहली महिला राज्यपाल भी रह चुकी हैं। झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने मुर्मू को शपथ दिलाई थी।
द्रौपदी मुर्मू ने जीवन में आई हर बाधा का मुकाबला किया। पति और दो बेटों को खोने के बाद भी उनका संकल्प और मजबूत हुआ है।
द्रौपदी मुर्मू को आदिवासी समुदाय के उत्थान के लिए काम करने का 20 वर्षों का अनुभव है और वे भाजपा के लिए बड़ा आदिवासी चेहरा हैं।

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