मैं कहा रहता हूं,समय बताएगा,खेल देखो- गहलोत

  मैं कहा रहता हूं,समय बताएगा,खेल देखो- गहलोत

      तनोट माता के दर्शन कर गहलोत जयपुर पहुंचे

जयपुर, 25 सितंबर । मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तनोट माता के दर्शन कर सीधे जयपुर पहुंच गए है। जहां विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक होगी।

सवाल: सर तनोट माता से क्या मन्नत मांगी?

जवाब: हम तो यही मांगते हैं कि प्रदेश में खुशहाली बनी रहे हमेशा। इस बार अच्छा मानसून आया, प्राणीमात्र मानवमात्र जो है पृथ्वी पर सबका कल्याण हो ये मेरी प्रार्थना हमेशा रहेगी, जहां भी मैं जाता हूँ मंदिर में, मस्जिद में, गुरूद्वारे में, गिरजाघर में यही प्रार्थना करता हूँ, प्रदेश का मुख्यमंत्री हूँ मेरा ये दायित्व है कि प्रदेश के अंदर खुशहाली छाई रहे, हर प्रदेशवासी के चेहरे पर मुस्कराहट रहे ये मेरी ख्वाहिश रहती है, उसी रुप में हम लोगों ने प्रार्थना की है। 

सवाल: राजस्थान प्रदेश की जनता की ख्वाहिश है कि आप अध्यक्ष भी रहें और मुख्यमंत्री भी रहें

जवाब: देखिये मैं मुख्यमंत्री रहे और अध्यक्ष बने पहले भी यह बात स्पष्ट कर चुका हूँ मेरा बस चले, 40 साल से लगातार मैं पदों पर रहा हूँ, अब मैं बिना पद भी चाहे वो राहुल जी की यात्रा हो आज जो देश के हालात हैं उसमें मेरा सन्देश है प्रेम का, भाईचारे का, मोहब्बत का, विश्वास का, सद्भावना का वो माहौल बना रहे युवा वर्ग और छात्र वर्ग है उनके लिए विशेष ऐसी स्थिति बने जिससे कि नई पीढ़ी अच्छे संस्कार लेकर के बड़ी हो जिसमें प्रेम और भाईचारा मोहब्बत सब आ जाते हैं, तनाव और हिंसा जहाँ होते हैं वहां विकास रुक जाता है। और मैं समझता हूँ कि ये किसी भी कीमत पर नहीं होना चाहिए। आप देखते हो ये बात मैं बार-बार लगभग छः महीने से बोल रहा हूँ देश में तनाव है, हिंसा का माहौल है वो देशहित में नहीं है। प्रधानमंत्री जी को मैंने कहा है कि वो आह्वान करें देशवासियों को कि मैं चाहूंगा कि आपसे में लोग प्रेम, मोहब्बत, सद्भावना से रहें और हिंसा मैं बर्दाश्त उन्हीं करूंगा, उनका इतना कहना ही बहुत होता है। अभी हालात बड़े गंभीर हैं, एजेंसियों का दुरूपयोग हो रहा है, ईडी इनकम टैक्स का सीबीआई का, ज्यूडिशियरी दबाव में है, ऊपर से जैसा माहौल बनता है वैसा ही नीचे भी पहुंचता है इसलिए आप देखते हो कि क़ानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती जा रही है, महंगाई-बेरोजगारी बहुत बढ़ती जा रही है, कोई रोकने वाला नहीं, कोई कहने वाला नहीं, कोई एक्शन करने वाला नहीं, ऐसा माहौल खतरनाक होता है देश के लिए, हमारे नेताओं ने जान दे दी इंदिरा गांधी जी ने, राजीव गांधी जी ने, पर देश को एक रखा, अखंड रखा, सरदार बेअंत सिंह जी थे मुख्यमंत्री, वो मुख्यमंत्री रहते हुए बम से उड़ा दिए गए, पर नेस्तनाबूत कर दिया आतंकवाद को, तो ये भावना हमारे सब देशवासियों के दिल-ओ-दिमाग में है, अब भी देश एक रहे, अखंड रहे, जिसके लिए हमारे नेताओं ने, आजादी के पहले महात्मा गांधी के नेतृत्व में पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, अंबेडकर साहब ने बनाया संविधान, बड़े-बड़े नेता जो थे उस जमाने के अंदर, भगत सिंह, चंद्रशेखर, सुभाष चंद्र बोस, कितनी बात करें, लंबी लिस्ट है, पर कहने का मतलब है कि उस जमाने में ही बहुत बड़े त्याग-बलिदान-कुर्बानियां हुई हैं। अब भी मैं समझता हूं कि वक्त है कि हमारे देश का मान-सम्मान दुनियाभर के अंदर आज बढ़ा है क्योंकि 75 साल में यहां लोकतंत्र जिंदा रहा है, इसी कारण से नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री बन पाए हैं, अगर पाकिस्तान की तरह लोकतंत्र की हत्या होती बार-बार, सैनिकों का शासन होता, तो प्रधानमंत्री कैसे बनते? आज भी देखिए चीन में क्या सुन रहे हैं? नजरबंद हो गए वहां के प्रेसिडेंट, तो हमारे मुल्क में संविधान की मूल भावना लेकर चलेंगे, तो ऐसी नौबत कभी नहीं आएगी, अनेकता में एकता वाला मुल्क है, अलग-अलग जातियां, धर्म, वर्ग और भाषाएं हैं, समझ में आती ही नहीं हैं कि कौन क्या बोल रहा है, तब भी इस मुल्क को एक व अखंड रखा हुआ है, तो रखा है कांग्रेस पार्टी की जो नीतियां थीं, जो कार्यक्रम थे, जो सिद्धांत थे, जो संविधान की मूल भावना पर आधारित हैं वो इसलिए हम लोग रख पाए हैं इस प्रकार से, एक व अखंड रह पाए हैं, भगवान करे कि यही स्थिति आगे बनी रहे।

सवाल- भारत जोड़ो यात्रा चल रही है, राहुल गांधी प्रयास कर रहे हैं, आप भी प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस में अभी जो स्थिति बनी है राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर, आपकी क्या मंशा है, क्या होना चाहिए?

जवाब- देखिए राहुल गांधी जी की यात्रा बहुत ही शानदार चल रही है, क्या केरल के अंदर, तमिलनाडु के अंदर जो भीड़ सड़कों पर आ रही है, कोई सोच नहीं सकता है, इतना लोगों में जलजला है कि भई महंगाई भी है, बेरोजगारी भी है और शांति व प्यार का संदेश दे रहे हैं राहुल गांधी जी, बहुत शानदार यात्रा चल रही है और जहां तक आप कह रहे हो कि कांग्रेस अध्यक्ष की बात है, मैं कह चुका हूं कि मेरे लिए कोई पद, मैं 50 साल से राजनीति कर रहा हूं एनएसयूआई के वक्त से और 40 साल से मैं कोई न कोई पद पर हूं संवैधानिक पद पर, चाहे मेंबर ऑफ पार्लियामेंट रहा, चाहे केंद्र में मंत्री रहा 3 बार, चाहे में 3 बार पीसीसी प्रेसिडेंट रहा, 3 बार एआईसीसी का महामंत्री रहा और तीसरी बार मुख्यमंत्री हूं, इससे ज्यादा व्यक्ति को क्या मिल सकता है मतलब क्या चाहिए बताइए? तो मेरे दिमाग में बात ये है कि नई पीढ़ी को चांस मिले और सब मिलकर इस देश के अंदर नेतृत्व प्रदान करें और हम लोगों को जो है बहुत कुछ मिला है, हम चाहेंगे कि किस प्रकार से देश के अंदर एकता और अखंडता रहे, मैं बार-बार कह रहा हूं कि मुझे चिंता वो है कि तनाव की स्थिति जो है, हिंसा की स्थिति है वो मुझे चिंतित करती है, इसलिए मैंने कहा कि मेरे लिए पद महत्व नहीं रखता है। हां, ये बात है कि पार्टी ने मुझ पर सबने विश्वास किया सोनिया गांधी जी ने भी, उसके पहले इंदिरा जी ने, फिर राजीव गांधी जी ने और राहुल गांधी जी ने इतना मुझपर विश्वास किया है, तो मेरी ड्यूटी बनती है कि जो मुझे वो कहेंगे, वो मैं उनकी बात को स्वीकार करके फिर राजनीति करता हूँ।

सवाल- देश की और राजस्थान की जनता आपकी तरफ देख रही है, कैसे निभाएंगे दोहरी भूमिका?

जवाब- मैं ये कब कह रहा हूं भई? ये तो मीडिया ने उड़ा दिया शुरू से ही कि अशोक गहलोत राजस्थान का मुख्यमंत्री पद छोड़ना नहीं चाहता है, जबकि ये बात कभी दिमाग में नहीं रही मेरे, मैं तो अगस्त में ही कह चुका हूं, अगस्त के अंदर कह चुका था हाईकमान को कि अगला चुनाव जीतना बहुत आवश्यक है कांग्रेस को, राजस्थान का चुनाव जीतना बहुत आवश्यक है, बड़ा राज्य राजस्थान ही बचा है कांग्रेस के पास में, अगर राजस्थान में जीतेंगे तो कांग्रेस का सब राज्यों में जीतना प्रारंभ होगा वापस, पुनर्जीवित, एक प्रकार से मजबूती आएगी कांग्रेस के अंदर, ये बात मैं अगस्त में कह चुका हूं, ये मेरा अध्यक्ष बनना तो अभी नाम चलने लगा है, उससे पहले मैं कह चुका हूं सोनिया जी को भी, हमारे जनरल सेक्रेटरी इन्चार्ज माकन जी को भी, ये बात अभी तक किसी को मालूम नहीं, पहली बार मैं बोल रहा हूं आपके सामने, तो मैं जब उनको कह चुका हूं पहले ही कि अगला चुनाव उसके नेतृत्व में लड़ा जाए जिससे कि चुनाव जीतने की संभावना बढ़ जाए, चाहे वो मैं हूं या मुझसे ज्यादा कोई दूसरा है तो उसका चयन कर लो और सरकार बनाओ, चुनाव जीतना हमारे लिए आवश्यक है, ये बात मैं अगस्त में कह चुका हूं, 9 अगस्त को कह चुका हूं, इसलिए मेरे लिए ये जो अफवाहें चलाते हैं न, इस देश में तो मीडिया किंग मेकर बन जाता है, अनफॉर्चूनेटली मीडिया को जमीनी हकीकत मालूम रहती नहीं है, दिल्ली की मीडिया को तो बिलकुल ही नहीं रहती है, वो ऐसे अभियान चलाते हैं कि किंग मेकर की भूमिका में आ जाते हैं वो लोग, उसका क्या इलाज करें, जमीनी हकीकत से आप राजनीति करोगे, या पत्रकारिता करोगे, मीडिया में अगर आप तथ्यों के आधार पर बात करोगे और मेहनत भी करोगे, मेहनत तो करते नहीं हैं, जो बात आ गई है, उसके आधार पर आप अपनी घोषणा करने लग जाते हो, वो खतरनाक है देश के लिए, मीडिया को चौथा स्तंभ कहा गया है, मीडिया का पूरा महत्व डेमोक्रेसी के अंदर है, उस महत्व को आज का मीडिया कमजोर कर रहा है मेरी दृष्टि के अंदर।

सवाल- शिक्षा को, स्वास्थ्य को और कृषि को आपने फोकस किया, अब खेल और युवा जो हैं वो आपके अगले बजट में फोकस में हैं, उसके लिए राजस्थान में सब आपकी तरफ देख रहे हैं कि राजस्थान अग्रणी राज्यों में कैसे आए?

जवाब- अब जो अगला मुख्यमंत्री बने, उसको मैं ब्रीफ कर दूंगा आपकी भावनाओं को कि किस प्रकार से युवा और छात्र जो हैं उनको फोकस करके आप बजट पेश करो, पिछली बार अब तक मुझसे हो सका, मैंने कोई शिक्षा में, स्वास्थ्य में, सड़कों में, पानी में, बिजली में, सोशल सिक्योरिटी के अंदर, पेंशन दे रहे हैं हम लोग 1 करोड़ लोगों को, स्वास्थ्य का बीमा शानदार कर दिया, जो हिंदुस्तान में कहीं नहीं है, तो जो मेरी कलम चली वो गरीब के लिए चली, आम आदमी के लिए चली है, उसी रूप में मैंने आज तक जिंदगी बिताई है, गांधी जी ने कहा था कि अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कुराहट कैसे आए, वो फैसला आप करो, वो फैसला मैं आज तक करता आ रहा हूं। अब मैं चाहता हूं कि बिना पद भी कम से कम कुछ तो मैं नौजवानों में जाऊं, छात्रों में जाऊं, उनसे बातचीत करूं, उनको गांधी जी के जो सिद्धांत थे, नीतियां थीं, उनका जीवन था, बताऊं उनको मैं, अच्छे संस्कारित हों राजस्थान के नौजवान, छात्र, युवा, ये मेरी ख्वाहिश है, वो मैं अगर मौका मिल गया मुझे तो मैं वो काम भी करूंगा।

सवाल- राजस्थान में सिर्फ अशोक गहलोत जी हैं, अशोक गहलोत के बाद अगर आपको कोई लगता है कि आप इस पद पर नहीं रहें या अध्यक्ष बनेंगे तो कौन होगा?

जवाब- जब पंडित नेहरू थे न तब भी लोगों ने यही कहा कि आफ्टर नेहरू कौन? आफ्टर नेहरू सब आए हैं, देश चलता है, मैं नहीं रहूंगा तो भी ये प्रदेश चलेगा, सरकारें बनेंगी, बिगड़ेंगी, सब बातें होंगी, आप निश्चिंत रहो, प्रदेश की चिंता हम लोगों को है।

सवाल- कांग्रेस में जो गुटबाजी हो रही है, आप राष्ट्रीय स्तर पर जा रहे हो, तो प्रदेश के संगठन को संभालने में क्या भूमिका निभाएंगे?

जवाब- देखिए मैं कहां जा रहा हूं, कहां नहीं जा रहा हूं, वो तो समय बताएगा, अभी तो मैं कह रहा हूं कि मेरी इच्छा है कि मैं कहीं नहीं जाऊं और राजस्थान के अंदर रहूं मैं सेवा करने के लिए, जरूरी नहीं है कि मुख्यमंत्री के पद पर ही रहूं, मैंने कहा कि मैं अंतिम सांस तक राजस्थान प्रदेशवासियों की सेवा करूंगा, चाहे मैं कहीं रहूं, किसी पद पर रहूं या नहीं रहूं, मेरे लिए महत्व नहीं रखता है, मैं बार-बार बोल रहा हूं आपके सामने।

सवाल- कहीं न कहीं आपकी इच्छा राजस्थान में रहने की है इसलिए आपने बयान भी दिया था कि मैं थासूं दूर नहीं, लेकिन नेतृत्व जो है आपको राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना चाहता है, आपकी क्या इच्छा है?

जवाब- नेतृत्व ने तो कह दिया है कि हम न्यूट्रल हैं, सोनिया जी ने कहा है हम लोग न्यूट्रल हैं, जिसको खड़ा होना हो एआईसीसी अध्यक्ष पद के लिए, वो खड़ा हो, तो नेतृत्व के लिहाज से सब कांग्रेसजन बराबर हैं और कोई अध्यक्ष बनता है या बना हुआ है, पहली ड्यूटी उसकी होती है कि सबको साथ लेकर चले, जब जाकर कांग्रेस मजबूत होती है, अध्यक्ष के लिए लाइकिंग-डिसलाइकिंग बिल्कुल नहीं होती है और न होनी चाहिए, आगे वाला कोई करें अध्यक्ष के साथ में उसकी मर्जी है, वो तो कर सकता है, पर कम से कम अध्यक्ष खुद नहीं करे, आगे वाला कोई उसके साथ में करता है तो वो क्या कर सकता है।

सवाल- विधायक दल की बैठक है आज, तो उसमें क्या निर्णय हो सकता है?

जवाब- हमारी परंपरा रही है शुरू से ही कि हमेशा हम लोग जब कभी विधायक दल की बैठक लेते हैं चुनाव के वक्त में या मुख्यमंत्री के चयन के लिए, तो 1 लाइन में प्रस्ताव जरूर पास होता है कि भई हम अधिकार देते हैं कांग्रेस प्रेसिडेंट को, ये हमारी परंपरा रही है और आज भी मैं समझता हूं यही होगा, सब मिलकर एकजुट होकर बात करेंगे, यही हमारी ताकत भी है कांग्रेस की, कांग्रेसजन हमारी कांग्रेस प्रेसिडेंट में सब एक स्वर में विश्वास करते हैं, आज भी आपको विश्वास की झलक ही मिलेगी, ज्यादा आपको किंतु-परंतु सोचने की जरूरत है नहीं पड़ेगी।

सवाल- हम लोग भी आएं दिल्ली सर आपके साथ...

जवाब- वो तो समय बताएगा कि मैं किस पद पर जाऊं या नहीं जाऊं, कहां रहूं या राजस्थान में रहकर काम करूं, मैंने कहा आपको कि युवाओं के लिए, छात्रों के लिए और जो देश के हालात हैं, उनको बताने के लिए राजस्थानवासियों को जिससे कि राजस्थान का तो कम से कम माहौल अच्छा बना रहे। तो मैं चाहूंगा कि मैं राजस्थान के भी अंदर जिंदगी बिताई है, राजस्थान के लोगों ने मुझे सबकुछ सम्मान दिया है, प्यार दिया है, मोहब्बत दी, विश्वास दिया, स्नेह दिया राजस्थानवासियों ने, चाहे मैं चुनाव में कभी सरकार बना पाया या नहीं बना पाया अलग बात है, पर राजस्थानवासियों ने मेरे लिए सबकुछ किया, मेरी ड्यूटी बनती है कि मैं बार-बार कहता हूं, अंत तक मैं ये ही बात बोलूंगा कि राजस्थान के लोगों के सुख-दुःख में, उनकी समस्याओं में, मैं कैसे उनका मददगार बन सकता हूं।

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