राशन डीलरों का महासम्मेलन 27 को विद्याधर नगर में

राशन डीलरों का महासम्मेलन 27 दिसंबर को विद्याधर नगर में



प्रदेश भर के करीब 27000 राशन डीलर होंगे शामिल, 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और खाद्य मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास भी रहेंगे मौजूद


जयपुर । विगत कई सालों से अपनी वाजिब मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे प्रदेश के राशन डीलरों के चार प्रमुख संगठनों ने हाथ मिलाकर अपनी आवाज को बुलंद करने के लिए संयुक्त रूप से राशन डीलर समन्वय समिति का गठन किया है l इस नई समिति के तत्वाधान में आगामी 27 दिसंबर  को राजधानी जयपुर के विद्याधर नगर स्टेडियम में प्रदेश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा ऐतिहासिक राशन डीलरों का सम्मेलन आयोजित किया जाएगा । इस सम्मेलन में प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, खाद्य मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास खाद्य विभाग के सभी बड़े आला अधिकारियों को बुलाया गया है । सम्मेलन में विगत कई सालों से लंबित पड़ी राशन डीलरों की वाजिब मांगों को अविलंब प्रदेश सरकार से पूरा करवाने के लिए सामूहिक चर्चा की जाएगी । सम्मेलन में सामूहिक चर्चा के बाद वाजिब मांगों के लिए आगे के आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी । यह जानकारी राशन डीलर समन्वय समिति के प्रदेश  संयोजक डिंपल कुमार, समिति के प्रदेश सह संयोजक शिवराज चौधरी, समिति के प्रदेश सह संयोजक दिनेश खंडेलवाल जयपुर में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में दी । समन्वय समिति के इन पदाधिकारियों ने संवाददाता सम्मेलन में रविवार को बताया कि प्रदेश की गहलोत सरकार ने कोरोना काल में हर वर्ग, जाति और समाज के लोगों की सुध ली । सरकारी कर्मचारियों को भी राहत दी लेकिन विगत कई सालों से आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक परेशानी से जूझ रहे प्रदेश के करीब 27000 राशन डीलर परिवारों के लाखों सदस्यों को उनके हाल पर अकेला छोड़ दिया । गहलोत सरकार के इस दोगले व्यवहार को लेकर प्रदेश के राशन डीलर ही नहीं बल्कि उनके परिवार के सदस्यों में ही गहरी कुंठा है, आक्रोश है जिसके परिणाम स्वरुप विगत करीब 3 साल में राशन डीलरों के कई परिजन अकाल मौत के शिकार हुए । इन पदाधिकारियों ने बताया कि राशन डीलरों की लंबित मांगों को लेकर कई बार प्रदेश के मुख्यमंत्री, खाद्य मंत्री, मुख्य सचिव और खाद्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से भी मुलाकात करके बताया गया तथा कई बार ज्ञापन भी प्रस्तुत किए गए । विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वह भी वाजिब मांगों के बारे में बताया गया । सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई विधायकों ने विधानसभा के विभिन्न सत्रों में राशन डीलरों की वाजिब मांगों का मुद्दा उठाया लेकिन प्रदेश सरकार ने हमेशा ही झूठा आश्वासन देकर राशन डीलरों के गुस्से को शांत किया लेकिन अब राशन डीलर शांत नहीं बैठेंगे क्योंकि राशन डीलरों का धैर्य टूट चुका है और अब वे सरकार के खिलाफ आर-पार लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह से एकजुट और संघर्ष रखें ।

 विगत कई सालों से लंबित चली आ रही राशन डीलरों की प्रमुख मांगे:-


1.-राशन डीलरों का न्यूनतम मानदेय ₹30000 प्रति माह किया जाए ।


2.-राशन की दुकान मालिकों को न्यूनतम पेंशन प्रतिमाह ₹5000 दी जाए ।


3-राशन डीलरों से निर्धारित कार्य के अतिरिक्त कोई कार्य गैर पीडीएसए नहीं करवाया जाए।


4-राशन की दुकानों के लिए सरकार निशुल्क जमीन और निर्माण की सुविधा उपलब्ध करवाएं ।


5-पश्चिम बंगाल की तरह राजस्थान में भी 1 प्रतिशत सीजन का नुकसान राशन डीलरों को किया जाए ।


6.-राजस्थान सरकार ने 5000 नई दुकान खोलने की घोषणा पिछले बजट में की, प्रक्रियाधीन है l वर्तमान में 27000 उचित मूल्य दुकानदारों को ₹8000 प्राप्त हो रही है, 5000 दुकानें और खोली जाती है तो यह कुठाराघात होगा, वाधवा आयोग की रिपोर्ट खाद्य सुरक्षा एक्ट की व्यवस्था को ध्यान में नहीं रखा गया है ।


7.-पोस मशीन के मेंटेनेंस का पिछला बकाया राशि जून 2022 तक कटौती की जानी थी जो कि वर्तमान में लगातार कटौती हो रही है यह भी उचित मूल्य दुकानदारों पर कुठाराघात है ।


समन्वय समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि देशभर में राजस्थान स्टेट ही एक ऐसा स्टेट है जो सरकार से सुविधाएं लेने के मामले में अन्य राज्यों की तुलना में काफी पीछे है l राशन डीलरों के प्रति सरकार अपनी सोच बदले l प्रदेश के मुख्यमंत्री राशन डीलरों को प्रदेश की जनता से और खुद से अलग नहीं समझे और तत्काल हमारी सभी मांगों को पूरा करें अन्यथा इस बार हम सभी राशन डीलर और हमारे हजारों कार्यकर्ता आखरी सांस तक अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे, चाहे पुलिस हम पर डंडे बरसाए जेल भेजें हम पीछे हटने वाले नहीं हैं l हमने आजादी के बाद से ही प्रदेश की जनता और सरकार की तन मन से सेवा की है ।अब सरकार का भी फर्ज है कि राशन डीलरों और उनके कार्यकर्ताओं और परिजनों की पीड़ा को समझें।


 



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