किणने कैऊ अर कुण सुणे म्हारे मनड़े री बात

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 रेलों के अभाव में आर्थिक बोझ से टूट रहें सैनिक ओर प्रवासी राजस्थानी


बाड़मेर 22 जनवरी (राजू चारण)। बस भाई साहब बहुत हो चुका है,पब्लिक का अब एक ही सवाल। क्या अबकी बार भी बाड़मेर जिला मुख्यालय से समदड़ी - भीनमाल रेलमार्ग द्वारा दक्षिण भारतीय क्षेत्र में बसें हुए हमारी भारतीय सेना के जवानों और बाहरी राज्यों में मजदूरी करने के लिए बाड़मेर जिले से हजारों किलोमीटर दूर बसें हुए प्रवासी राजस्थानियों को बिना रेलगाड़ियों के ही नेताजी को जीताने के बाद जयपुर दिल्ली भेज दोगे, और जग हंसाई के लिए खुद को वही पिछले चुनाव की तरह इस बार भी बुद्धू बना लोगे ? हम तो कहते हैं,,, भई, बड़ी हिम्मत का काम हैं, एक दिन के लिए नेताजी के लंगरो में जाकर पगत मारकर पेट पर हाथ फेरकर चने और हलवापूरी खाकर नेताजी के अन्न का कर्ज उतारना और खुद को अगले पाँच सालों तक सिर्फ रेलगाड़ियों और हवाई सफर करने के लिए हवाई सपने देखने के लिए सिर्फ बुद्धू बनाना और बदले में नेताजी को पांच साल तक केन्द्र सरकार की राजाशाही सौपकर बडे़ लोगों के साथ आलीशान कार्यक्रम में या फिर आधुनिक होटलों में मलाई खाने के लिए दिल्ली तक भेजना।

हमारे जागरूक मतदाताओं को लुभाने वादे अकसर हर चुनाव में बड़े बड़े भौपुओ पर सुनने को मिलता है जैसे जैसलमेर से वाया बाड़मेर होकर  भाभर से रेलगाड़ियां उत्तर भारत के लिए आएगी, और आप लेह - लद्दाख ,जम्मू-कश्मीर , हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब से बीकानेर जैसलमेर के रास्ते बाड़मेर होते हुए गुजरात ओर दक्षिण भारत के अन्य राज्यों तक रेलगाड़ियों से बिना रेलगाड़ियों को बदले ही पहूंच जाओगे। इससे पश्चिमी राजस्थान के सीमांत जिलों के लोगो का कश्मीर से कन्याकुमारी तक का विधुत से चलने वाली रेलगाड़ियों से सीधा सफर आसान हो जाएगा। फिर आप बडे़ बडे़  बिजनेस करने, गंभीर बीमारियों में रोगियों का ईलाज करवाने, रिस्तेदारीयां निभाने और युवा पीढ़ी के लोग परिवार सहित भ्रमण आदि के लिए आसानी से सस्ते दामो पर सफर कर सकेंगे, वो भी लम्बी दूरी की रेलगाड़ियों से। रेल जो सीधे आपके बाड़मेर जैसलमेर से चलकर गुजरात होकर दक्षिण भारत के कोकेन रेल्वे डिवीजन द्वारा कईं छोटे बड़े शहरों से होकर सीधे कन्याकुमारी तक पहूंचेगी। इन लम्बी दूरी की रेलगाड़ियों को हम ही आपके लिए लाऐंगे। इसलिए आप हमारी पार्टी को अपना अमूल्य वोट दिजिए, हमारी सरकार बनते ही, हमारी पहली प्राथमिक्ता यही रहेगी कि हम आपके लिए जैसलमेर - बाड़मेर - भाभर के रास्ते रेल लाईन बिछाऐंगे और आपको सब्जबाग दिखाएंगे। 

इन चिकनी चुपड़ी बातों में आकर पश्चिमी राजस्थान की जनता ने लाखों की तादात में अपने बेशकिमती वोट समय-समय पर राजनीतिक पार्टीयों को देकर राज्य और देश का मुखिया का राजाशाही ताज पहना दिया। लेकिन जैसे ही इनकी ताजपोशी हुई वेैसे ही बेवकूफ जनता से किये वादे को इन राजनीतिक पार्टियों ने अपनी कुर्सी के पास में रखीं हुईं कचरे की टोकरी में डाल दिया। अब इन नेताओं की चतुराई और पश्चिमी राजस्थान की जनता की बेवकूफी को देखिए... पांच साल बितते ही यह नेता फिर मदारी की तरह बड़ा मजमा लगाने के लिए वापस आपकी चौखट पर आते हैं, फिर रेलगाड़ियों और हवाई सेवा आपके लिए लाएगें का वादा करते है, फिर बेवकूफों से वोट लेकर राजा बनकर अगले पांच साल तक राज करते हैं। और पांच साल पूरे होने पर फिर उसी वादे के साथ वापस मैदान में आ जाते हैं और पश्चिमी राजस्थान की बेवकूफ जनता फिर से हलवे पूरी और शराब की महफीलों मे मुफ्त का माल खाकर अपनी मति भ्रष्ट करके फिर से अपना बेशकिमती वोट देकर हलवे पूरी का अहसान उतार कर आ जाते है। 

हैं न कमाल की बात, और कमाल के हमारे परिश्चमी राजस्थान के सरहदों पर बसने वाले जागरूक मतदाता लोग,,, जो रेल सेवाओं का वादा करके जीतने वालों को बार बार वोट देकर खुद बुद्धू बनना मंजूर कर लेते हैं किन्तु इन जीते हुए नेताओं के हलक में हाथ डालकर उनके पेट से रेलगाड़ियों को नही निकाल सकते। डरते है बेचारे, कहीं हमारे विरोध या रेलगाड़ियों को मांगने से कहीं नेताजी नाराज न हो जाए और नेता जी क्रोधित होकर कहीं इनकी नीजी सम्पतियों पर बुलडोजर न चलवा दे, जैसा आज-कल आप देख रहे हैं। इसी डर के कारण जैसलमेर से भाभर तक चलने वाली रेलगाड़ियों को इन नेताओं के वादो की टोकरी में दफन पड़ी है।

देश के पिछली सरकारों के रेल बजट में बाड़मेर जैसलमेर को गुजराज के भाभर से जोड़ने वाली रेल लाईन के लिए मंजूरी की कई बार घोषणाए भी की गई। बाड़मेर जैसलमेर के चौराहों पर इस खुशखबरी पर हमारे बाड़मेर जैसलमेर लोकसभा क्षेत्र में पार्टी के छोटे बड़े नेताओं ने जनता को बेवकूफ बनाने के लिए अहिंसा सर्किल और रेल्वे स्टेशन के आगे सैकड़ों बार खूब पटाखे फोड़े, मिठाईया भी जमकर बांटी, लेकिन चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आज दिन तक भाभर से चलकर बाड़मेर जैसलमेर के लिए रेलगाड़ी या फिर कोई पटरी नही बिछाई और नहीं जनता के लिए कोई दक्षिण भारत के कन्याकुमारी से बाड़मेर वाया कोकेन रेल्वे लम्बी दूरी की रेलगाड़ियों सहित अन्य कोई रेल सेवा भी नही आई। जनता, इंतजार से उबकर रेल के लिए विद्रोह न कर दे इसके लिए रेल कहां से गुजरेगी, कौन कौनसे स्टेशन होंगे, इस बात का सर्वे भी हुआ और बाड़मेर जिले के हमारे मित्रों द्वारा समाचार पत्रों के मुखपृष्ट पर भी खूब फोटो छपे। लोगो ने इन रूटमेप की खबरों को सहेज कर अपनी अलमारी में रख लिया। लेकिन इंतजार की हद भी देखो, रेलगाड़ियां तो क्या पटरी भी अभी तक नही आई।

बस, अब एक ही सवाल। क्या अबकी बार भी बिना रेलगाड़ियों के ही नेताजी को जीताकर जयपुर दिल्ली भेज दोगे, और जग हंसाई के लिए खुद को बुद्धू बना लोगे। हम तो कहते हैं,,, भई, बड़ी हिम्मत का काम हैं, एक दिन के लिए नेताजी के लंगर में जाकर हलवापूरी खाकर नेता जी के अन्न का कर्ज उतारना और खुद को बुद्धू बनाना और बदले में नेताजी को पांच साल तक केन्द्र सरकार सौपकर मलाई खाने के लिए जयपुर होकर दिल्ली भेजना।

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