पारदर्शी ,संवेदनशील पुलिस-प्रशासन प्रदान करना हमारा लक्ष्य- डीजीपी

 पारदर्शी ,संवेदनशील पुलिस-प्रशासन प्रदान करना हमारा लक्ष्य- डीजीपी

      

      दुष्कर्म के कुल प्रकरणों में से 41 प्रतिशत झूठे पाये जाते है

जयपुर 16 जनवरी। महानिदेशक पुलिस  उमेश मिश्रा ने सोमवार को पुलिस मुख्यालय के सभागार में गत वर्ष की पुलिस की उपलब्धियों, कार्यो, नवाचार, योजनाओं का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राज्य में जनता के सम्मान, जीवन एवं सम्पत्ति की सुरक्षा करना और जवाबदेह, पारदर्शी व संवेदनशील पुलिस-प्रशासन प्रदान करना हमारा लक्ष्य है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए साईबर अपराधी, मादक पदार्थ, अवैध हथियारों से जुड़े पेशेवर एवं आदतन अपराधियों तथा भू-माफियाओं पर कड़ी निगरानी एवं कठोर कानूनी कार्यवाही करना, हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है। साथ ही विशेषकर महिलाओं, बच्चों, कमजोर वर्गों की सुरक्षा एवं उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करने के लिए थानों में जन- केन्द्रित सुविधाओं, स्वागत कक्ष का विकास एवं जन सुनवाई के लिए निश्चित समय की व्यवस्था की गई। 

डीजीपी  मिश्रा ने कहा कि चुनौतियों का सामना करने के लिए जहां एक ओर पुलिसकर्मियों के तकनीकी कार्य- दक्षता में अभिवृद्धि के प्रयास किये जा रहे है वही दूसरी ओर उनके कल्याण के लिए साप्ताहिक अवकाश की व्यवस्था प्रारम्भ की गई है। वर्ष 2022 में कोविड महामारी की चुनौतियों से उभरते प्रदेश में पुलिस ने दोहरी भूमिका निभाते हुये संवेदनशीलता से आमजन में सकारात्मक पहचान बनाने के साथ ही अपराधियों की आंसूचना एवं प्रो-एक्टिव पुलिसिंग के माध्यम से अपराधियों पर शिकंजा कसा है। चाहे उदयपुर मे कन्हैयालाल की हत्या एवं उससे जुड़ी कानून व्यवस्था हो या जावर माईन्स के औड़ा गांव रेल्वे लाईन को अज्ञात अपराधी तत्वों द्वारा विस्फोटक से क्षति ग्रस्त करने की सनसनीखेज घटना हो या बीमा राशि के लालच मे षडयन्त्रपूर्वक दुर्घटना का रूप देकर अपनी पत्नी साले की हत्या करने का गंभीर मामला हो या फिर राजू ठेठ की हत्या का मामला हो, पुलिस ने त्वरित कार्रवाही करते हुए मामलों का शीघ्र खुलासा किया एवं आरोपियों की गिरफ्तारी की है।

परिवादी को न्याय दिलाने के लिए जून 2019 से "निर्बाध पंजीकरण" को राजस्थान सरकार ने महत्ता दी । इस नवाचार के अब सकारात्मक परिणाम भी मिले है। जैसे वर्ष 2018 में दुष्कर्म के 30.5 प्रतिशत मामले कोर्ट के माध्यम से दर्ज होते थे, जो अब घटकर मात्र 14.4 प्रतिशत रह गए है। पंजीयन आंकडा बढ़ने की आलोचना का पूर्वाभास होने के बावजूद भी हमनें निर्बाध पंजीकरण की नीति को दरकिनार करने की नहीं सोची बल्कि और अधिक मजबूत करने के लिये ही, इस हेतु वर्ष 2020 से 2022 तक 45 डि-कॉय ऑपरेशन किये कि थानों में निर्बाध एफ. आई. आर. हो रही है या नहीं, तथा साथ ही साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालयों में एफ.आई.आर. पंजीयन की सुविधा को सुदृढ़ किया गया, जिसके तहत जून 2019 से वर्ष 2022 तक 336 प्रकरण दर्ज किये गये है। जिसमें से 18 मामलों में एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करने वाले अधिकारियों पर विरूद्ध कार्रवाई की गई है।

आमजन की परिवेदनाओं / समस्याओं को सर्वोच्च महत्व देते हुए सभी पुलिस थानो व पुलिस कार्यालयों में प्रति-दिन जनसुनवाई का समय निर्धारित किया गया एवं इसकी पालना सुनिश्चित कराने के लिए अभी तक 21 डि-कॉय ऑपरेशन किये गये ।

 ध्यान देने योग्य बात है कि एन. सी. आर. बी. स्वयं कहती है कि "अपराध में वृद्धि और अपराध पंजीकरण में वृद्धि दोनों को एक मानने की त्रुटि नहीं करनी चाहिए" अतः हमारे राज्य में अपराध के आंकडों में वृद्धि जनकेन्द्रीत योजनाओं व नीतियों के फलस्वरूप है। राज्य सरकार की पहल पर प्रारम्भ निर्बाध पंजीकरण की व्यवस्था से महिलाओं सहित कमजोर वर्गो का थानों में एफ.आई.आर. दर्ज कराने का हौसला बढ़ा है।

यह बहुत ही बडी बात थी और हिम्मत का काम था कि अपराध के आँकडो को कम रखने का लालच छोडकर जनता के हित के लिए "फी रजिस्ट्रेशन" को लागू किया गया। हमें पता था कि इससे अपराध के आंकडो के बढ़ने पर पुलिस की आलोचना होगी और सब कुछ जानते समझते हुए भी, हमनें यह निर्णय लिया, क्योंकि आँकडो की बाजीगरी में उलझकर हम जनता को उसके हक व न्याय से वंचित नही कर सकते।

एक गलत धारणा यह भी है कि राजस्थान दुष्कर्म के मामलों में भारत में प्रथम स्थान पर है। जबकि सच्चाई यह है कि पहला स्थान मध्यप्रदेश का और दूसरा स्थान राजस्थान का है। साथ ही राजस्थान के दूसरे स्थान पर होने का कारण "निर्बाध पंजिकरण" है ना की दुष्कर्म के घटनाओं की तुलनात्मक अधिकता । क्योंकि हमारे यहां कुल दर्ज प्रकरणों के 41 प्रतिशत अप्रमाणित पाये जाते है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत 8 प्रतिशत है।

तुलनात्मक दृष्टिकोण से देखे तो दुष्कर्म के मामलों में एन. सी. आर. बी. के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान राज्य का सजा प्रतिशत 47.9 जो कि राष्ट्रीय स्तर के सजा प्रतिशत 28.6 से काफी अधिक है। सजा प्रतिशत के अनुसार महिला अत्याचार के प्रकरणों में राज्य चौथे स्थान पर है। (बड़े राज्यों में)

 राज्य में महिलाओ के विरूद्ध दर्ज मामलो मे जहाँ वर्ष 2018 में औसत अनुसंधान समय 211 दिन था वह वर्ष 2022 में मात्र 69 दिन ही रह गया है।

पोक्सो एक्ट / बलात्कार के प्रकरणों में पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाही व गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान किया गया। जिसके परिणागस्वरूप पिछले चार वर्षो में न्यायालय से आरोपियों को ऐसे 12 प्रकरणों में मृत्युदण्ड की सजा, 466 प्रकरणों मे 20 वर्ष के कठोर कारावास से आजीवन कारावास की सजा एवं 750 प्रकरणों में अन्य सजा राई गई। वही वर्ष 2022 मे न्यायालय से आरोपियों को ऐसे 05 प्रकरणों मे मृत्युदण्ड की सजा, 209 प्रकरणों मे 20 वर्ष के कठोर कारावास से आजीवन कारावास की सजा एवं 209 प्रकरणों में अन्य सजा कराई गई ।

 वर्ष 2022 में भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत दर्ज प्रकरणों के पंजीकरण में वर्ष 2021 की तुलना में 11.61 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2022 में अदम वकू 31.83 प्रतिशत रहा, जबकि वर्ष 2021 में 30.44 प्रतिशत था ।

भा. द.सं. के प्रकरणों में जयपुर आयुक्तालय ( 21.75 प्रतिशत), बीकानेर रेंज (16.55 प्रतिशत), अजमेर रेंज (15.47 प्रतिशत), जोधपुर आयुक्तालय ( 13.95 प्रतिशत ) में ज्यादा वृद्धि एवं शेष 5 रेंजों में आंशिक वृद्धि ही रही है। वर्ष 2022 में डकैती के अपराधों में हमने 90 प्रतिशत सफलता अर्जित करते हुए 34.31 प्रतिशत बरामदगी की है एवं लूट के अपराधों में चालानी प्रतिशत 75.96 रहा एवं 76.47 प्रतिशत बरामदगी की गई है।  वर्ष 2022 में सीसीटीएनएस के अनुसार प्रकरणों की पैडेन्सी 16.57 प्रतिशत रही जो वर्ष 2021 के अन्त में प्रकरणों की पैडेन्सी से 7.23 प्रतिशत कम रही।

एक वर्ष से अधिक अवधि के लम्बित प्रकरणों का निस्तारण राजस्थान पुलिस की प्राथमिकता रही है। पुलिस मुख्यालय से नियमित रूप से पर्यवेक्षण कर वर्ष 2022 में कुल 7735 एक वर्ष से अवधि के लम्बित प्रकरणों का निस्तारण करवाया गया।

पुलिस थानों में परिवादियों के लिए सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने हेतु स्वागत कक्षों का निर्माण किया गया है। अभी तक कुल 915 थानों में से 841 थानों में स्वागत कक्ष का निर्माण हो चुका है एवं 02 थानों में निर्माण कार्य प्रगति पर है (कुल 843 पुलिस थानों में स्वागत हेतु भूमि उपलब्ध ) । आज तक जब हम किसी से थाने के अन्दर पुलिस व्यवहार की बात करते है तो सबसे बड़ी शिकायत यहीं सुनने को मिलती है कि, परिवादी के साथ अत्यन्त शुष्क व्यवहार किया जाता है एवं पूरी सहानभूति एवं संवेदनशीलता के साथ उनकी बात नहीं सुनी जाती है। कुछ लोग तो ऐसे व्यवहार से इतने आहत हो जाते है कि वे अपनी मौलिक शिकायत को छोड़कर, थाने में हुए व्यवहार की ज्यादा शिकायत करने लगते हैं। इसी पीड़ा के स्थाई समाधान के लिए सभी थानों में स्वागत कक्षों का निर्माण कराया जा रहा है। परिवादी अब थानें में नही बल्कि स्वागत कक्ष में अधिकार के साथ प्रवेश करेगा।

 इसी क्रम में राजस्थान पुलिस को यह भी निर्देशित किया गया है कि थानाधिकारी से पुलिस अधीक्षक तक समस्त अधिकारी दोहपर 12 बजे से 1.30 पीएम तक अनिवार्य रूप से जन सुनवाई करेंगे, समस्त पुलिस अधिकारी शिकायत प्राप्त होने पर त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही करेगें साथ ही कार्यवाही के दौरान सभी पुलिसकर्मियों का आचरण सौम्य एवं संवेदनशील होगा । इस हेतु वर्ष 2022 में 21 Decoy Operation किये गये। राज्य में आमजन को सौहार्दपूर्ण, सुविधाजनक तथा संतोषप्रद सेवायें प्रदान करने के उद्देश्य से समस्त जिलों के प्रत्येक वृत्त में एक-एक पुलिस थाने को आदर्श पुलिस थाने के रूप में विकसित कर राज्य में कुल 229 आदर्श पुलिस थानों को चयनित किया गया हैं।

 " निर्बाध पंजीकरण" की नीति के फलस्वरूप महिलाओ एवं बच्चियों को अपनी शिकायत थानो में दर्ज कराने में काफी सुविधा हो रही है।

• एक गलत धारणा यह भी है कि राजस्थान दुष्कर्म के मामलों में भारत में प्रथम स्थान पर है। जबकि सच्चाई यह है कि पहला स्थान मध्यप्रदेश का और दूसरा स्थान राजस्थान का है। साथ ही राजस्थान के दूसरे स्थान पर होने का कारण "निर्बाध पंजिकरण" है ना की दुष्कर्म के घटनाओं की तुलनात्मक अधिकता। इसमें पेंडिंग प्रतिशत में राष्ट्रीय औसत 29.3 है जबकि राजस्थान की 12.9 है। वहीं सजा प्रतिशत राष्ट्रीय औसत 28.6 तथा राजस्थान का 47.9 है।

 यह भी उल्लेखनीय है कि हमारे राज्य में दर्ज दुष्कर्म के कुल प्रकरणों में से 41 प्रतिशत झूठे पाये जाते है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर झूठे प्रकरणों का प्रतिशत मात्र 8 ही है। इससे पता चलता है कि अन्य कई राज्य दुष्कर्म जैसे गम्भीर मामलों में या तो प्रकरण दर्ज नही करते या दर्ज करने के बजाय उन शिकायतों को परिवाद के रूप में जांच करने लगते है। इसका लाभ कई बार राक्षसी प्रवृत्ति के अपराधियों को मिलता है एवं कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों के नष्ट हो जाने का भी खतरा बना रहता है । राजस्थान में पुलिस को स्पष्ट निर्देश है कि प्रकरण दर्ज होने मे कोई ढील नही होनी चाहिए। झूठा प्रकरण होगा तो इसमे एफआर दी जायेगी और झूठा प्रकरण दर्ज करवाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाही की जायेगी। वर्ष 2022 में पिछले वर्ष की तुलना में झूठे मुकदमें करवाने वालो के खिलाफ कार्यवाही में कुल 68 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामले में राजस्थान का 12वां स्थान है। पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु है। पेंडिंग मामले में राष्ट्रीय औसत 24.9 है जबकि राजस्थान की 10.4 है। वही सजा प्रतिशत राष्ट्रीय औसत 32.0 है जबकि राजस्थान की 48.0 है।

महिला अत्याचार के प्रकरणों में पेंडिंग अनुसंधान 9.6% है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह पेंडेंसी 31.7% है। महिला उत्पीड़न के मामले के निस्तारण में राजस्थान का देश में सर्वोच्च स्थान है। सीसीटीएनएस के अनुसार महिला अत्याचार के प्रकरणों में निस्तारण समय 72 दिन, दुष्कर्म में 69 पोक्सो एक्ट में 68 और sc-st मामलों में 80 दिन है। महिलाओं के खिलाफ अपराध में सजा दर प्रतिशत भारत में 26.5 प्रतिशत है। इसमें उत्तर प्रदेश में 59.1, राजस्थान में 45.2, दिल्ली में 38.4, मध्यप्रदेश में 33.5 और गुजरात में 5.0 है।

महिला सुरक्षा के क्षेत्र में नवाचार भी किए जा रहे हैं। 41 पुलिस जिलों में विशेष महिला अपराध अनुसंधान इकाई कार्यरत है। महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए लैब का निर्माण एवं 1392 पुलिस अधिकारी एवं 181 न्यायपालिकाओं के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया।

आवाज अभियान के अंतर्गत महिलाओं एवं बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ युवा पुरुष वर्ग को महिला विषय पर संवेदनशील बनाया गया। सभी 43 पुलिस जिलों में महिला हेल्प डेस्क संचालित कर डेस्क के सुदृढ़ीकरण के लिए 8.5 करोड रुपए स्वीकृत किए गए।

 1 जनवरी 2020 से महिला शक्ति आत्मरक्षा प्रशिक्षण योजना प्रारंभ की गई। महिलाओं एवं बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए साल 2022 तक कुल 852669 महिलाओं और बालिकाओं को प्रशिक्षित किया गया। महिला गरिमा हेल्पलाइन की स्थापना कर टोल फ्री नंबर 1090 पर शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था की गई। 41 पुलिस जिलों में यह हेल्पलाइन संचालित की जा रही है। हेल्पलाइन में प्राप्त 9355 शिकायतों में से 9158 शिकायतों का निस्तारण किया गया। एक ही छत के नीचे मेडिकल विधिक एवं पुलिस सहायता के लिए वन स्टॉप क्राइसिस मैनेजमेंट सेंटर, सहायता के लिए महिला पेट्रोलिंग यूनिट तथा स्थानीय पुलिस से संवाद बनाए रखने के लिए सुरक्षा सखी का चयन किया गया 2022 तक कुल 17911 सुरक्षा सखियों का चयन किया गया है।

केस ऑफिसर स्कीम के अंतर्गत साल 2022 में चयनित 263 प्रकरणों में सजा प्रतिशत 58.70 रहा। साल 2015 से 2018 तक सजा प्रतिशत 56.97 तथा साल 2019 से 2022 तक 59.88 था। केस ऑफिसर स्कीम में साल 2019 से 2022 तक चयनित हार्डकोर अपराधियों के विरुद्ध दर्ज 32 प्रकरणों में सजा करवाई गई। जघन्य ने अपराध मॉनिटरिंग यूनिट द्वारा साल 2020 से अब तक कुल 161 प्रकरण चयनित किए गए सजा प्रतिशत 88.46 रहा।

*अपराध नियंत्रण एवं विशेष कार्रवाई* 

अपराध शाखा द्वारा विशेष कार्रवाई एन.डी.पी.एस. एक्ट की 22 कार्रवाई कर 41 आरोपी गिरफ्तार कर 3136 किलो गांजा, 41 किलो अफीम, 5 किलो चरस व अन्य ड्रग्स बरामद किया गया। इसी प्रकार मिलावटी खाद्य पदार्थ मे 5 कार्रवाही, अवैध शराब मे 3 कार्रवाही व अवैध लकडी परिवहन मे 1 कार्रवाही कर गिरफ्तारी व जब्ती की गई तथा 5-5 हजार रूपये के 3 ईनामी बदमाश गिरफ्तार किये।

DST टीम द्वारा संगठित अपराधों के खिलाफ जिलों द्वारा वर्ष 2022 में 724 प्रकरण दर्ज कर 1074 मुलजिमों को गिरफ्तार किया।  वर्ष 2022 में सम सामयिक घटनाओं / माननीय न्यायालय एवं गृह विभाग के निर्देशानुसार कानून व्यवस्था व शांति बनाये रखने, अपराधो की रोकथाम / अपराधियों की धरपकड़ आदि के लिये अपराध शाखा द्वारा 33 नवीन स्थाई आदेश/निर्देश/ एडवाईजरी / परिपत्र जारी किये गये।

प्रदेश मे सक्रिय अपराधियों / गैंगस्टर से प्रभावित होकर सोशल मीडिया पर अनुयायी बनने वाले युवाओं को सही दिशा मे लाने के लिए सोशल मीडिया प्रकोष्ठ के अधीन सभी जिलो मे परामर्श प्रकोष्ठ का गठन किया जाकर निगरानी की जा रही है। वर्ष 1962 मे गठित किये गये श्वान दल मे वर्तमान मे 29 श्वान उपलब्ध है, जिन्हे वर्ष 2022 में 370 प्रकरणों मे नियोजित किया गया जिनमें से 53 प्रकरणो मे कामयाबी मिली है।

 साईबर अपराधों की रोकथाम डिजिटल इकोसिस्टम की साइबर खतरों से सुरक्षा सुदृढ़ करने एवं आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से 50 करोड़ रूपये की लागत से सेंटर फॉर साइबर सिक्योरिटी की स्थापना की जायेगी । राज्य के 32 राजस्व जिलों में साईबर क्राईम पुलिस थाने खोले गये है। स्टाफ प्रशिक्षित कर तैनात किया जाना प्रक्रियाधीन है।

 *साम्प्रदायिक तत्वों के विरूद्ध कार्रवाई* 

राज्य का पुलिस प्रशासन प्रदेश में साम्प्रदायिक सौहार्द की स्थिति बनाये रखने के लिए सदैव कटिबद्ध है। इस वर्ष 03 स्थानों पर साम्प्रदायिक घटना/ तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई, जिन्हें पुलिस व प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई कर स्थिति को नियंत्रित किया गया ।

साम्प्रदायिक मामलों के कुल 5 हजार अपराधियों को पाबन्द करवाया एवं 100 को गिरफ्तार किया गया। साथ ही इससे जुडे हुए आदतन अपराधियों का हमने डाटाबेस तैयार किया है। यहां यह उल्लेखनिय है कि राज्य में कोई भी धार्मिक उत्सव बिना किसी व्यवधान के कराने में हमारी सरकार सफल रही है ।

आमजन तक सोशल मीडिया के माध्यम से पहुँच बनाते हुये पुलिस ने 1 लाख 36 हजार लोगों को अपने आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप (24955 ) मे जोडकर लगभग 1702 अफवाहों का खण्डन किया है। उक्त वाट्स एप ग्रुपों पर 3969 आसूचना प्राप्त हुई ।

*सड़क सुरक्षा* 

सड़क दुर्घटनाओं में राज्य के उदयपुर, जयपुर ग्रामीण, अजमेर, सीकर, नागौर, भीलवाड़ा, बाड़मेर, भरतपुर, पाली एवं बीकानेर जिलों में सर्वाधिक वृद्धि हुई ।

 सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों की संख्या में राज्य के श्रीगंगानगर, भिवाड़ी, जयपुर उत्तर, बून्दी, जोधपुर ग्रामीण, सिरोही, राजसमन्द, नागौर, टोंक, दौसा एवं झुन्झुनू में सर्वाधिक कमी हुई। ई-चालानों के निस्तारण के लिए जयपुर में ई- न्यायालय का प्रारम्भ। राष्ट्रीय राजमार्गो पर स्थित 81 थानों में BLS का प्रशिक्षण दिलाया गया। 25 नये डिजिटल इन्टरसेप्टर वाहन राज्य के 17 जिलों को आंवटित किये गये। राष्ट्रीय राजमार्गो पर स्थित 2023 गांवों को यातायात नियमों के बारे में जागरूक किया गया।

 मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिला भिवाड़ी, जयपुर ग्रामीण, जयपुर यातायात, अजमेर, सीकर, चूरू, बीकानेर, जोधपुर ग्रामीण, जोधपुर यातायात एवं पाली में 612 कि.मी. रोड़ सेफ्टी ऑडिट की गई है एवं तत्कालीन रूप से खामियों को दूर करने के लिए रमबल स्ट्रीप, आईकैट्स, साईन बोर्ड, अवैध कट्स, क्रेक सिलिंग एजमार्किग आदि कार्य करवाये गये है तथा राज्य के अन्य राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्ग पर कुल 4500 कि.मी. रोड़ सेफ्टी ऑडिट करवाई गई है।

 *पुलिसकर्मियों का सशक्तिकरण, प्रोत्साहन, कल्याण एवं नवीन संसाधन* 

साल 2018 से 2022 तक हेड कांस्टेबल से पुलिस निरीक्षक तक कुल 451 पुलिसकर्मी कार्मिकों को विशेष पदोन्नति दी गई साल 2018 में 39, 2019 में 122, 2020 में 27, 2021 में 84 एवं 2022 में 179 कार्मिकों को विशेष पदोन्नति दी गई है। वर्ष 2022 में 303 पुलिस अधिकारियों / कर्मचारियों की मृत्यु हो जाने पर उनके आश्रितों को सहायता स्वरूप कुल 1 करोड़ 6 लाख रूपये की राशि स्वीकृत की गई ।

पुलिसकर्मियों की वर्दी संबंधी मांग को मानते हुये 7000 रूपये वर्दी भत्ता स्वीकृत किया है। मुठभेड में जान गवाने पर पुलिस कर्मियों को राजस्थान पुलिस कल्याण निधी से अब 1 लाख से बढाकर 5 लाख रूपये कर दिये है।

पुलिस कालिस्टेबल से पुलिस इस्पेक्टर स्तर के पुलिसकर्मियो के रोडवेज बसों के स्थायी पास की राशि में 300 रूपये प्रति माह अनुदान राज्य सरकार की और से देने का निर्णय किया है। अब पुलिसकर्मी को स्थायी पास 500 रूपये प्रतिमाह के स्थान पर 200 रूपए प्रतिमाह उपलब्ध है।

 प्रदेश के सभी पुलिस थानो को पुलिस निरीक्षक स्तर पर अपग्रेड किये जाने के संबंध मे माननीय मुख्यमंत्री महोदय की बजट घोषणा की अनुपालना मे गृह विभाग राजस्थान सरकार द्वारा, दिनांक 19.05.2022 को उप निरीक्षक के पदो के क्रमोन्नयन से निरीक्षक के 473 पद बढ़ाये जाने हेतु विभागीय प्रस्तावानुसार उप निरीक्षक के 473 स्वीकृत पद समाप्त कर निरीक्षक के 473 नवीन पदों का सृजन दिनांक 28.02.2023 तक अस्थायी रूप से किये जाने की प्रशासनिक एवं वित्तिय स्वीकृति जारी की गई।

पुलिस आधुनिकीकरण योजना के अन्तर्गत Smart Police Equipment श्रेणी में Mobile Investigation Unit ( वाहन ) क्रय की जाकर जघन्य/गंभीर (हत्या, बलात्कार, पोक्सो, डकैती, नकबजनी, अज्ञात शव, एनडीपीएस एक्ट, बडी दुर्घटना आदि) अपराधों के घटनास्थल पर अनुसंधान मे सहयोग, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, नाप-तौल, जब्ती, बयान रिकॉर्डिंग, साक्ष्य संकलन / विश्लेषण आदि के लिये सभी जिलों में 71 Mobile Investigation Unit (वाहन) आवंटित कर निर्देश जारी किये गये है।

पुलिस कर्मियो को साप्ताहिक अवकाश दिये जाने के संबंध में प्रायोगिक रूप से परीक्षण (ट्रायल) किया जा रहा है। एसओजी शाखा में एनडीपीएस यूनिट एवं नकल विरोधी सैल का गठन किया गया ।

                     

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