उत्तराखण्ड त्रासदी से पीडितो की मुख्यमंत्री से गुहार

       उत्तराखण्ड त्रासदी से पीडितो की मुख्यमंत्री से गुहार 



मृत आश्रितों को नौकरी से वंचित किये जाने  पर पुनर्विचार की मांग 


जयपुर । उत्तराखंड त्रासदी  में प्राकृतिक आपदा में राजस्थान के करीब ५११ निवासियों की मृत्यु हुई थी और कई लोग लापता हो गये, जिनका अभी तक पता नही चल सका है तथा उनके पीडित परिजन आश्रित प्रत्येक दिन उनकी वापस आने की आस में राहें तक रहे है तथा आंसू गिरा रहे है व अध्याधिक याद आने पर केदार नाथ धाम बार-बार जाकर ढुढकर वापस आ जाते है। लेकिन आंसू व यादों के अन्तिम देही दर्शन भी आश्रितों को नसीब नही हो पाये ओर प्रकृति में लीन हो गये तथा उनके आश्रित अनाथ हो गयें। उत्तराखण्ड त्रासदी पीड़ित परिवार जन अनाथ आश्रित संघर्ष समिति के संयोजक दिनेश कुमार शर्मा एवं उप संयोजक मुकेश कुमार ने एक होटल में प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि करीब १० वर्ष पूरे होने को आये सभी परिजन अनाथ आश्रित दर दर की ठोकर खाने को मजबुर हो रहे है। तत्कालीन व वर्तमान सरकार के मुख्यमंत्री  अशोक गहलोत ने त्रासदी समय उत्तराखण्ड जाकर हालात का जायजा भी लिया था तथा उत्तराखण्ड से  लौटने के बाद पीडित परिवारों को संबल देने के लिए ऐतिहासिक संवेदनशील निर्णय लेते हुए २६ जुलाई २०१३ को राहत पैकेज जारी किया था।

इस पैकेज में अनुग्रह सहायता राशि के अतिरिक्त आश्रितों में एक आश्रित को दयात्मक नौकरी का प्रावधान कर नियुक्तियां देना प्रारम्भ कर दिया था तथा तीन आश्रितों को नौकरी दि जा चुकी थी। बाकी आश्रितों के मृत्यु प्रमाण पत्र उत्तराखण्ड सरकार से देरी से आये थे तथा दिसंबर २०१३ में सरकार बदल गई तथा भाजपा सत्ता में आई तो उसने शिव श्रद्धालुओं के अना आश्रितों को दिये गये नौकरी के आदेश व प्रावधान को खत्म कर दिया गया था।

तत्कालीन व वर्तमान मुख्यमंत्री गहलोत ने त्रासदी पीडित परिवारों को राहत प्रदान करने के लिए संवेदनशील रूप से उत्तराखण्ड राहत पैकेज में संवेदना की दयात्मक नौकरी के प्रावधान को  २६.१०.२०२१ को पुनः बहाल करते हुए पीडितों के आश्रितों को फिर से नौकरी देने का फैसला किया था व सरकार के प्रमुख शासन सचिव ने राजस्थान के पीडित आश्रितों में से एक आश्रित को नौकरी दिये जाने का आदेश समस्त जिला कलेक्टरो को  ०१.११.२०२१ दिया गया तथा समस्त जिला कलेक्टरों ने प्रत्येक पीडित आश्रित से आवेदन लिये गये तथा सभी पीडित आश्रितों को नौकरी दिये जाने का कहा गया।

सभी अनाथ आश्रित पीडितजन अपने अपने काम धन्धे छोडकर नौकरी की आशा में आवेदन जमा करा दिये।

गौरतलब है कि  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के संवेदनशील निर्णय में आश्रितों मे से एक आश्रित को नौकरी दिये जाने के आदेश के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों व कार्मिक विभाग द्वारा आश्रितों के आवेदन आने के करीब १० माह बाद केदारनाथ त्रासदी पीडितों के नाम अलग स्पेशल नियम के

अधिसूचना  ०८ अगस्त २०२२ को जारी की गई जिसमें पीडित आश्रितों पर अनुकंपा नियुक्ति नियम १६६६ नियम ५ लगाकर अधिकांश आश्रितों को नौकरी से वंचित कर दिया गया तथा शेष मे कई पीडित आश्रितों को दो से अधिक संतान व अधिक उम्र में व पुरे कुटुम्ब में एक को भी नौकरी नही दिए जाने संबंधित नियम बनाकर नौकरी से बंचित कर दिया गया। जबकि वर्ष २०१३ में बिना किसी अधिसूचना तीन आश्रितों को नौकरी दि जा चुकी है। कार्मिक विभाग ने उत्तराखण्ड राहत पैकेज की पालना नही की है।

बल्कि आश्रितों को वंचित करने के उद्देश्य से अधिसूचना जारी की है। जबकि मामला करीब १० वर्ष पुराना है। इस संवेदनशील निर्णय की जन घोषणा ( त्रासदी पीडित आश्रितों) का लाभ प्रत्येक पीडित परिवार तक नही मिल पाया है जबकि मुख्यमंत्री  बार बार अपनी घोषणा में "दुःख के समय सरकार प्रत्येक पीडित परिवार के साथ खडी है" बोल रहे है।

 इस प्रकार  मुख्यमंत्री  जिनके शासन काल को त्रासदी पीडित "राम राज' मानते है व पीडित व्यक्तियों का इनके शासन काल में  सुध लिया जाता है उनके आदेश के विपरित जाकर अधिकारियों द्वारा अधिसूचना के नाम पर अधिकांश आश्रितों को वंचित कर दिया है तथा पीडितों के घाव फिर से हरे किये गये। तथा एक अनाथ को नौकरी देकर दूसरे अनाथ को नौकरी नही देकर विसंगति पैदा की गई है। जिससे सभी अनाथ त्रासदी परिवार न्याय की गुहार के लिए कई विधायकों को मुख्यमंत्री नाम का ज्ञापन दिया है तथा कांग्रेस सरकार के कार्यकर्ता सदस्यों से मिला गया है ज्ञापन पहुंचाया गया है कि इस दया की नौकरी में समान नीति भाव से एक आश्रित को नौकरी का लाभ दिया जबकि इस भयावह महात्रासदी में सभी आश्रितों ने अपने परिवार को खोया है तथा अनाथ हो गये है ।

 सरकार से हमारी यही मांग है कि हमारी बात हमारे  मुख्यमंत्री तक पहुँचे हमारी पीडा भी सुनी जाये व प्रत्येक पीडित विधिक वारिसों को नौकरी दी जाये हमारे परिजन कोई सरकारी कर्मचारी नही थे जिससे की अधिकारीगण हमारे ऊपर मृत राज्य कर्मचारी सेवा नियम लगा रहे है। हम तो अनाथ त्रासदी पीडित है माता-पिता दोनो ही इस दुनिया में एक साथ हमें छोडकर चले गये है तथा प्रकृति में लीन हो गये है । यदि हमारे को सरकार से न्याय नही मिलता है तो हम त्रासदी पीडितजन अनाथ सभी वंचित लोग राजस्थान के हर जिले में हमारे दो पहियों वाहनों से साईकिलो से सरकार का संवेदनहिनता का परिचय देगें। और पूर्वजो का याद में श्रद्धा सुमन लेकर राजघाट जायेगे और महात्मा गांधी जी के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए प्रार्थना करेगे कि सभी वंचित वर्ग का न्याय हो सरकार ऐसी हो ।

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