सरकार .. नहीं बदली है पानी की समस्याएं बाड़मेर शहर में

 सरकार .. नहीं बदली है पानी की समस्याएं बाड़मेर शहर में

                                (राजू चारण)

बाड़मेर 23 फरवरी । जिले में गर्मियों के मौसम की शुरुआत आजकल लोगो का जीवन यापन करने के लिए काफी जद्दोजहद करते हुए ग्रामीण ओर शहरी क्षेत्रों में अक्सर देखा जा सकता है लेकिन जिला प्रशासन की सही मोनिटरिंग नहीं होने के कारण आजकल शहरी क्षेत्रों की जनता में भारी रोष व्याप्त है, लोगों की आपसी बातचीत में पिछली सरकार बदलने के बाद भी हमारे अधिकारियों की कामकाज की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं की आने वाली गर्मियों के मौसम में कैसे हालात होगा।

जलदाय विभाग के सरकारी जल वितरण रजिस्टर का अवलोकन करने पर पानी का वितरण ठेकेदारो के पास में सम्पूर्ण स्टाफ के होने के बावजूद भी एक ही व्यक्ति के द्वारा दान जी की होदी क्षेत्र में जलापूर्ति करने के कारण और संदेह बढ जाता है, ग्रामीणों ने बताया की सम्बंधित अधिकारियों को तयशुदा हिस्सा शायद जलमाफियो द्वारा दिया जाता है इसलिए  सरकारी पानी को ही जलमाफियो द्वारा शहर में नहरी मीठा पानी के नाम पर खुल्लेआम बेचकर मालामाल हो रहे हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ लोगों ने बताया कि इस आदमी को एक बार हटाकर दिखाओगे तो फिर क्षेत्र में जलापूर्ति की कोई  समस्या नहीं होगी नहीं तो फिर गर्मियों के मौसम में भुगतने के लिए तैयार रहो ।

गौरतलब हैं कि दान जी की होदी क्षेत्र की टंकी में चार पांच पाइपलाइन से लगभग एक दो दर्जन जल सप्लाई शुरू करने पर कनेक्शन धारकों के घरों तक पानी पहूंचाने वाली पानी लाईन के बीच में अवेध जल कनेक्शन हो चुके हैं किन्तु अवेध जल कनेक्शन वालो का रसूखदार होने के कारण जलदाय विभाग द्वारा न तो अवैध कनेक्शन काटे जा रहे हैं, न ही अवैध कनेक्शन लेने वालो के खिलाफ किसी प्रकार की कार्यवाही की जा रही हैं। नतिजतन शहर के आसपास में पिछले तीन चार बरसों से अवैध जल कनेक्शनों से रोके गए पानी से रसूखदार परिवारों द्वारा ट्रेक्टर टंकीयो से पानी भरकर सरकारी नहरी पानी को मिलीभगत कर सरकारी पीने के पानी का खुलेआम दुरूपयोग किया जा रहा हैं। साथ ही अवैध रूप से बागवानी, नीजि स्तर पर बगीचे, लगाए जाकर शेष पानी को व्यर्थ में बहाया जाता हैं। पीने के पानी को बूंद बूंद तरसते ग्रामीणों ने कई बार जलदाय विभाग व जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पानी सप्लाई दुरूस्त करवाने की मांग की। साथ ही रात्रि चौपालों  व जिला स्तरीय जनसुनवाई में भी परिवाद पेश कर पीने का पानी मुहैया करवाने की विनती की गई किन्तु जिला प्रशासन ने इन प्यासे ग्रामीणों को राहत पहूंचाने की रतिभर भी कोशिश नहीं की। पानी नही पहूंचने की शिकायत कई मर्तबा जलदाय विभाग में मौजूद अधिकारियों को की गई। किन्तु मिलीभगत ओर रसूखदार होने की वजह से जलदाय विभाग के ठेकेदारो वाले कार्मिक व अधिकारीयों इनके विरूद्ध किसी प्रकार की कार्यवाही करने से कतराते रहते है।

सबसे दुखद पहलू यह हैं कि जलदाय विभाग में लिखित शिकायत पेश की गई , शिकायत रजिस्टर को भी सम्बंधित अधिकारियों ने शायद ही कभी देखा हों। वहीं राज्य सरकार के सरकारी पोर्टल सुगम पर  दर्जनों शिकायते दर्ज करवाई गई है। साथ ही जिला मुख्यालय पर जनसुनवाई के दौरान कई बार शिकायत पेश करने के बावजूद भी जलदाय विभाग द्वारा किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई। उल्टे सरकारी मशीनरी का आपसी सामंजस्य नहीं होने के कारण हमेशा जनता की ही कमियों को निकालने में लगे रहते हैं।

जलदाय विभाग के कर्मचारी हमेशा लाईन खराब होना बताकर, कोई जवाब नही दिया बताकर, जलदाय विभाग ने बहानेबाजी करते हुए अपने फर्ज की इतिश्री कर लेते हैं। इधर पीने के पानी की भयंकर किल्लत से जूझ रहे शहरी क्षेत्र के सैकड़ों परिवारों को वहीं सरकारी पाइपलाइन का अवैध कनेक्शन धारकों से पानी खरीदकर पीना पड़ रहा हैं, जो कि 500- 1000 रूपये प्रति टंकी मिलता हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के लिए तरस रहे परिवार गरीब व किसान वर्ग से हैं। जिनके लिए पानी खरीदकर पीना बूते से बाहर की बात है। बावजूद इसके अधिकारीयों की लापरवाही, हठधर्मिता, व अपनो की प्यास के आगे मजबूर ग्रामीण प्यास बुझाने के लिए हर रोज कुआ खोदकर पानी निकालने जैसे हालातों से दुखी हो चुके है।

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