अस्थमा दिवस

                       अस्थमा दिवस

       सही आहार और व्यायाम से अस्थमा को कम करें



-  दुनिया में हर 10 अस्थमा रोगियों में से एक भारत में है

- गर्भवती महिलाओं में हार्मोन्स के बदलने से हो सकता है अस्थमा

- मौसम में बदलाव है बच्चों में अस्थमा विकसित होने का कारण



रोजाना बढ़ते प्रदूषण और बिगड़ती जीवन शैली के कारण दुनिया भर में अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। अस्थमा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल अस्थमा दिवस मनाया जाता है और इस बार अस्थमा दिवस की थीम अस्थमा केयर फॉर ऑल रखी गई है। यदि इसे एक आंकड़े से समझा जाए तो विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जहां पहले अस्थमा मरीजों का आंकड़ा 1/20 था, वहीं यह अब 1/10 हो गया है यानी कि दुनिया में हर 10 अस्थमा रोगियों में से एक भारत में है। भारत में अस्थमा से ग्रसित अधिकतर युवा वर्ग के लोग देखे जा रहे हैं, इसके मुख्य कारण बढ़ता प्रदूषण, अनियमित जीवनशैली, एलर्जी और धूम्रपान है।

नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर की श्वांस एवं एलर्जी रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवानी स्वामी ने बताया कि अस्थमा के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए टीकाकरण बहुत आवश्यक है। अस्थमा के रोगियों के लिए मुख्त्यतः दो टीकाकरण हैं: इन्फ्लुएंजा (फ्लू) वैक्सीन और न्यूमोकोकल वैक्सीन (गंभीर अस्थमा वाले लोगों और 65 वर्ष से अधिक उम्र के अस्थमा वाले किसी भी व्यक्ति के लिए)। टीकाकरण न केवल आपके परिवार की रक्षा करता है, बल्कि इस से लगवाने के बाद लोगों में अस्थमा अटैक भी कम होता है। डॉ. शिवानी कहती हैं कि टीकाकरण के साथ हमें आहार और दिनचर्या पर ध्यान देना चाहिए ताकि हम भविष्य में किसी भी बड़ी बीमारी से बच सकें।

 जयपुर के श्वांस एवं एलर्जी रोग विशेषज्ञ डॉ. डी.सी. गुप्ता का कहना हैं कि अस्थमा फेफड़ों तक हवा ले जाने वाली एयरवे ट्यूब्स में सूजन के कारण होता है। मौसम में बदलाव होने से बच्चों में एलर्जी और अस्थमा के लक्षण धीरे-धीरे विकसित हो रहे हैं। मध्यम आयु वर्ग के कुल लोगों में 5 से 10 फीसदी लोगों को एलर्जी और अस्थमा है, वहीं बच्चों और युवाओं में इसका अनुपात 8 से 15 फीसदी तक है। दिव्यांग बच्चों में अस्थमा का अधिक खतरा होता है। बच्चों में अस्थमा या एलर्जी की समस्या पारिवारिक, मौसमी बीमारी, प्रदूषण, ठंडी हवा, फ्लू या कोल्ड जैसे इंफेक्शन, मोटापा,  संतुलित आहार का सेवन न करना आदि शामिल हैं। वहीं, गर्भावस्था में महिला के धूम्रपान करने से भी बच्चे को भविष्य में अस्थमा होने का खतरा रहता है।

साथ ही डॉ. डी.सी. गुप्ता ने बताया कि हमें बच्चों को अस्थमा जैसी बीमारियों से दूर रखने के लिए कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए जैसे कि धूम्रपान न करें, बच्चों का वजन हेल्दी और मेंटेन रखें, बच्चों को अधिक से अधिक शारीरिक गतिविधियों में शामिल करें, बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर डॉक्टर से परामर्श करते रहें, ठंडी हवा में बच्चे को न जाने दें आदि। अगर आप इन बातों का ध्यान रखेंगे तो बच्चे बहुत जल्द ही ठीक हो सकते हैं।

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