मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर जनता को ‘लाल डायरी’ के राज बता देने चाहिये- सतीश पूनिया


     (लेख;-  डॉ. सतीश पूनियां , विधानसभा उपनेता प्रतिपक्ष)


कांग्रेस शासन में किसानों से कर्जमाफी के नाम पर वादाखिलाफी, पेपर लीक महाघोटाला, चरम पर भ्रष्टाचार

                                             

मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर जनता को ‘लाल डायरी’ के राज बता देने चाहिये- सतीश पूनिया 

                      

राजस्थान शांतिप्रिय, शौर्य, बलिदान और ऐतिहासिक किले-महलों के लिये पूरे देश-दुनिया में अपनी विशेष पहचान रखता है, जिस पर प्रत्येक राजस्थानी को गर्व है, लेकिन कांग्रेस शासन के यह जो पांच साल होने जा रहे हैं इनमें राजस्थान की छवि को पेपर लीक, भ्रष्टाचार, बिगड़ी कानून व्यवस्था ने बार-बार कलंकित किया है, जिससे हमें शर्मसार होना पड़ता है।

किसान कर्जमाफी के नाम पर वादाखिलाफी, महिला सुरक्षा, आदिवासियों और दलितों के साथ बढ़ते अत्याचार भी कांग्रेस सरकार की कमजोर शासन व्यवस्था की देन हैं।

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 में जालोर, हनुमानगढ़ इत्यादि जिलों में चुनाव प्रचार के दौरान रैलियों में वादा किया था कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनने पर सभी किसानों का 10 दिन में पूरा कर्जा माफ करेंगे, लेकिन राजस्थान के 60 लाख से अधिक किसान एक लाख 20 हजार करोड़ के कर्जा माफ होने का 1700 दिनों से अधिक बीत जाने के बाद भी इंतजार कर रहे हैं। 

किसान कर्जमाफी का कांग्रेस ने 2018 के घोषणापत्र में भी वादा किया था, यह वादा पूरा नहीं होना राजस्थान के अन्नदाता के साथ बड़ा विश्वासघात है। किसान कर्जमाफी नहीं होने से श्रीगंगानगर जिले के बृजलाल, सूरमाराम, राधेश्याम से लेकर प्रदेश के सैकड़ों किसान सुसाइड कर चुके हैं।

कर्जमाफी नहीं होने से राजस्थान में 19422 किसानों की जमीनें नीलाम हो गईं, यह राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में दिया गया जवाब है। प्रदेश 26 लाख किसानों पर कॉपरेटिव, रीजनल बैंको का और 24 लाख किसानों पर राष्ट्रीयकृत बैंकों से केसीसी व अन्य कृषि ऋण हैं, जो विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं। राजस्थान के प्रत्येक किसान पर औसतन 1.13 लाख रुपये कर्ज है। 

गहलोत सरकार ने राजस्थान के छोटे किसानों की जमीनों की नीलामी रोकने के लिए कानून बनाने का ऐलान किया था, जिसको लेकर किसान ऋण राहत आयोग का गठन करने की बात कही थी, लेकिन क्या हुआ इस घोषणा का राज्य सरकार को किसानों को अवगत करवाना चाहिये।

एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत राजस्थान के 70 लाख किसानों को 6 हजार रुपये प्रति वर्ष सीधे खातों में भेजकर किसानों को आर्थिक संबल दे रहे हैं।

हाल ही में 27 जुलाई 2023 को ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शेखावटी की धरती सीकर से 'पीएम किसान सम्मान निधि' के अंतर्गत राजस्थान सहित देशभर के करोड़ों कृषक भाईयों के बैंक खाते में सीधे 14वीं किस्त हस्तांतरित की व 1.25 लाख पीएम किसान समृद्धि केंद्र राष्ट्र को समर्पित किए। 

वहीं दूसरी ओर प्रदेश के किसानों के साथ कांग्रेस सरकार कर्जमाफी के नाम पर पौने पांच सालों से वादाखिलाफी कर रही है, जिससे किसानों के सामने संकट बढ़ता जा रहा है।

केन्द्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने के बाद भी राज्य सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बाजरा की खरीद नहीं कर पाई, जबकि सीमावर्ती राज्यों में बाजरा की खरीद की गई, एक तरफ मोदी सरकार श्रीअन्न (मिलेटस) को बढ़ावा देने में जुटी हुई है, जिससे राजस्थान के किसानों को सर्वाधिक लाभ हो रहा है तो वहीं कांग्रेस सरकार किसानों से कर्जमाफी के नाम पर छलावा कर रही है।

 कांग्रेस शासन में कृषि कनेक्शनों पर मनमर्जी वीसीआर भरने के कारण किसानों पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ता रहा है, जिससे किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।

कृषि कनेक्शन में पिछले साढ़े 4 साल में राज्य सरकार ने पेंडेंसी मामले नहीं निपटाए, जिन किसानों ने डिमांड नोटिस भर दिए उन्हें सालों तक कनेक्शन नहीं मिले, जिससे फसलों की सिंचाई पर विपरीत प्रभाव पड़ा।

केन्द्र की मोदी सरकार अपने प्रत्येक बजट में कृषि को बहुत अधिक महत्व दे रही है, भाजपा की सरकार आने से पहले 2014 में कृषि बजट 25 हजार करोड़ रुपए से भी कम था, अब मोदी सरकार ने देश का कृषि बजट बढ़कर 1 लाख 25 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा कर दिया है।

फसलों की एमएसपी को बढ़ाकर मोदी सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिये प्रतिबद्ध है और इसी नतीजा है कि किसान उन्नत होने के साथ-साथ आज भारत कई तरह के कृषि उत्पादों को निर्यात कर रहा है। 

मुख्यमंत्री कहते हैं कि 85 प्रतिशत घोषणायें और जनघोषणा पत्र के 70 प्रतिशत वादे पूरे कर दिये, जबकि 70 प्रतिशत से अधिक वादे और घोषणायें साढ़े चार सालों से अधूरी हैं,  जिसकी सबसे बड़ी वजह कांग्रेस सरकार की अंतरकलह व झगड़ा है।

सरकार सिर्फ घोषणाओं से नहीं चलती है, इसके लिये सॉर्स ऑफ इनकम, निवेश, सरकारी व निजी क्षेत्र में रोजगार, सुदृढ़ कानून व्यवस्था, गरीबों का उत्थान, उन्नत आधुनिक कृषि, सुगम परिवहन, सबको इलाज- सबको शिक्षा, युवाओं-किसानों को सहूलियत इत्यादि कार्यों को विजन, प्रतिबद्धता और समयबद्धता के साथ करने की जरूरत होती है, लेकिन राज्य सरकार ने ऐसा नहीं किया।

मुख्यमंत्री घोषणाजीवी बनने के स्वयं के रिकॉर्ड बना रहे हैं, यही इनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है, वादाखिलाफी, सड़कों में गडढे, गैंगवार, माफियाराज जैसे हालात प्रदेश में बने हुये हैं।

कांग्रेस सरकार के भीतर आवाज दबाई जाती है और सदन के अंदर भी, इस बात का प्रमाण यह है कि कांग्रेस सरकार का कोई मंत्री या विधायक मुख्यमंत्री के खिलाफ बोलते हैं तो उन्हें मंत्री को पद से हटा दिया जाता है और विधायकों पर राजद्रोह के मुकदमे दर्ज करा दिये जाते हैं, पीसीसी चीफ और डिप्टी चीफ मिनिस्टर को भी बर्खास्त कर दिया जाता है, यह कांग्रेस के आंतरिक लोकतंत्र की हकीकत है।

देशभर में डीजल-पेट्रोल पर सर्वाधिक वैट राजस्थान में हैं, विधानसभा में इस बारे में जब सवाल पूछा जाता है तो राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री जवाब देते हैं कि सरकार की डीजल-पेट्रोल पर वैट कम करने की कोई मंशा नहीं है।

राजस्थान में लगभग 19 पेपर लीक हो गए, फेस सेविंग के लिये मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि पेपर लीक रोकने के लिये कानून को और सख्त किया गया है, जिसमें आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है, लेकिन बार-बार पेपर लीक से लाखों युवाओं और उनके परिवारों के सपने तोड़े गये, उनकी राज्य सरकार कैसे भरपाई करेगी, स्पष्ट करे? 

मुख्यमंत्री पेपर लीक मामलों की सीबीआई जांच करवाने से क्यों पीछे हटते हैं, क्या इसका मतलब यह नहीं है कि पेपर लीक माफियाओं में कांग्रेस सरकार में बैठे हुए तमाम लोग भी शामिल हैं, जिसमें राजीव गांधी स्टडी सर्किल से जुड़े कई लोग भी पेपर लीक में लिप्त पाये गये।

आरपीएससी जैसी प्रतिष्ठित संस्था में भी भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें जम चुकी हैं, पेपर लीक महाघोटाला में आरपीएससी के सदस्य का शामिल पाया जाना यह बड़े संकेत हैं कि आरपीएससी को कांग्रेस सरकार ने भ्रष्टाचार का अडडा बना दिया है, इसकी निष्पक्ष जांच हो तो दूध का दूध, पानी का पानी हो जाए।

अब तक पेपर लीक में लगभग 63 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पेपर लीक मामले में गहलोत सरकार ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन को क्लीन चिट दे दी। 

जितने आरोपियों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया, उनमें से काफी तो जमानत हैं, इस पूरे प्रकरण की क्या स्थिति है, इस बारे में राज्य सरकार को प्रदेश की जनता को अवगत कराना चाहिये और नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री को सभी बड़े पेपर लीक सरगनाओं का भी पर्दाफाश करने की हिम्मत दिखानी चाहिये, चाहे वह सरकार में बड़े पदों पर बैठे लोग ही क्यों ना हों।

पिछली कांग्रेस सरकार में राज्यमंत्री रहे कांग्रेस के एक नेता को आरपीएससी की भर्ती परीक्षा में पास करवाने के बदले 18.50 लाख रुपए की घूस लेते हुए पकड़ा जाता है।

पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार पैर पसार चुका है, 78 प्रतिशत लोगों को काम के बदले रिश्वत देनी पड़ती है, फिर ऐसे में मुख्यमंत्री क्यों हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, क्या यह ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ जैसी स्थिति नहीं है।

राजस्थान भ्रष्टाचार में नंबर वन है, योजना भवन में करोड़ों रुपए और सोना बरामद होता है,  खनन घोटाले से लेकर और शिक्षकों को अपने तबादलों के लिए रिश्वत देनी पड़ती है, यह बात मुख्यमंत्री की मौजूदगी में शिक्षकों ने एक सम्मेलन में उनके द्वारा पूछने पर कही थी। 

क्या राज्य सरकार के मुखिया ने एक बार भी प्रदेश के उन युवाओं के बारे में सोचा कि पेपर लीक होने के बाद उसके मन पर क्या गुजरी होगी, उनके परिवारों पर क्या बीत रही होगी? 

यह हम सबको झकझोर देने वाली घटना है, जो राज्य के मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करती है, दिसंबर 2022 में हनुमानगढ़ के छात्र कन्हैयालाल ने कीटनाशक पीकर सुसाइड कर लिया, कन्हैयालाल ने एक बार रीट का पेपर दिया था, उसके अच्छे नंबर आये और उसे विश्वास था कि इस बार उसे नौकरी मिल जाएगी, लेकिन परीक्षा रद्द हो गई, इसके बाद उसने वनपाल की परीक्षा दी तो उसे भी निरस्त कर दिया गया,  वह फिर से रीट एग्जाम की तैयारी कर रहा था, लेकिन डिप्रेशन में था।

24 दिसंबर 2022 को उसका सीनियर टीचर भर्ती में जनरल नॉलेज का पेपर था, परीक्षा से पहले उसने खुदकुशी कर ली यह पेपर भी लीक हो गया, कन्हैयालाल ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था सॉरी पापा मेरे पास अब कुछ नहीं बचा, मैं जा रहा हूं। हजारों युवाओं ने अवसाद में जाकर सुसाइड कर लिया।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में वर्ष 2019 4531 युवाओं ने सुसाइड किया, 2020 में 5658 और 2021 में 5553 युवाओं के सुसाइड के मामले सामने आये।

राज्य सरकार के मुताबिक राजस्थान में 16 लाख 54106 बेरोजगार युवा पंजीकृत हैं, जिन्हें बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया था, लेकिन बेरोजगारी भत्ते के लिये इंटर्नशिप अनिवार्य करने से काफी संख्या में  बेरोजगार युवा भत्ते लेने से दूर होते चले गये, क्योंकि यह युवा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले हैं, जो तैयारी करने के साथ-साथ प्रतिदिन चार घंटे की इंटर्नशिप अनिवार्य करने से बेरोजगारी भत्ते से वंचित हो गये। 

राज्य सरकार का बेरोजगार युवाओं का आंकड़ा भी झूठा है, इस आंकड़े से तीन गुना युवा प्रदेश में बेरोजगार हैं। कांग्रेस सरकार के वादे भी झूठे और आंकड़े भी झूठे। 28 प्रतिशत से अधिक बेरोजगारी दर के साथ राजस्थान बेरोजगारी दर में देशभर में टॉप पर है।  

कांग्रेस सरकार ने तीन बजटों में 01 लाख 78 हजार भर्तियां निकालने की घोषणा की थी,  पिछले बजट में भी नई भर्तियों की घोषणा कर दी, लेकिन चार सालों में एक लाख पदों पर भी भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। भर्तियां पूरी नहीं होने की सबसे बड़ी वजह बार-बार परीक्षाओं के पेपर लीक होना है और परीक्षायें रदद् होना है।

राजस्थान में 04 लाख से अधिक संविदाकर्मी हैं, जिन्हें कांग्रेस ने 2018 के अपने घोषणापत्र में सरकार बनने पर नियमित करने का वादा किया था, लेकिन एक लाख 10 हजार से संविदाकर्मियों को राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट रूल्स, 2022 के दायरे में लाकर फिक्स वेतन तय किया है, ना तो इस नियम के तहत इन्हें नियमित किया है, ना ही शेष बचे 03 लाख संविदाकर्मियों को नियमित किया। 

पिछले दिनों ही जयपुर में अपनी मांगों को पूरा करने की मांग कर रहे संविदाकर्मियों पर लाठीचार्ज किया गया, कांग्रेस शासन में जो अपना हक मांगता है उसे बदले में लाठियां मिलती हैं, किसानों से लेकर कर्मचारियों तक को प्रताड़ित किया गया।

मुख्यमंत्री ने राज्य के उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली के लिये 100 यूनिट के साथ स्थायी शुल्क, अरबन सेस व इलेक्टिसिटी डयूटी माफ करने की घोषणा की थी, लेकिन लाखों उपभोक्ताओं से फ्यूल सरचार्ज के नाम पर वसूली हो रही है।

पिछले चार सालों में 10 बार से अधिक फ्यूल सरचार्ज बढ़ाकर उपभोक्ताओं पर भार डाल रही कांग्रेस सरकार महंगा कोयला व महंगी बिजली का तर्क देकर फ्यूल सरचार्ज और बढ़ाकर राज्य की जनता पर  भार डाल रही है।

प्रदेशभर में राहत कैंप के नाम पर 100 यूनिट तक बिजली फ्री देने के रजिस्ट्रेशन सरकार ने करवाये, लेकिन छह गुना तक फ्यूल सरचार्ज के नाम पर सरकार आमजन को आर्थिक भार का झटका दे रही है।

राहत कैंप दिखावा मात्र हैं, जिनके नाम पर करोड़ों रुपये सरकार ने पानी की तरह बहाये, राहत कैंप में लाभार्थियों को जो कार्ड बांटे गये, उनमें बड़े स्तर धांधली की बातें सामने आ रही हैं, जिसमें हाल ही में मुख्यमंत्री की वर्चुअल बैठक में झालावाड़ में एक महिला लाभार्थी का मामला सामने आया, जिन्हें योजनाओं के पूरे कार्ड नहीं दिये गये, तो पूरे प्रदेश के क्या हालात होंगे, आप हम सब अंदाजा लगा सकते हैं।

                           बिपरजॉय तूफान से बाड़मेर, जोधपुर, पाली, जालौर, सिरोही तथा अजमेर इत्यादि जिलों में क्षतिग्रस्त मकान, जनहानि और पशुधन की हानि का जल्द सर्वे करवाकर मुआवजा देने की मांग भाजपा लगातार कर रही है, लेकिन राज्य सरकार आंखें मूंदे बैठी है।

पिछले महीने जून में मैंने बिपरजॉय प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर वहां  पीड़ित लोगों से मुलाकात कर हालात देखे थे, जिसको लेकर 24 जून,2023 को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बिपरजॉय तूफान से हुये नुकसान का सर्वे करवाकर मुआवजा देने की मांग थी,  अभी तक सरकार ने पीड़ितों को आर्थिक संबल नहीं दिया है।

कांग्रेस शासन में अपराधों की लंबी फेहरिस्त है, 10 लाख,  92 हजार से अधिक मुकदमे दर्ज हुये हैं पौने 5 सालों में, यह राजस्थान की धरती पर पहली बार हुआ है, जिससे शांतिप्रिय राजस्थान कलंकित हुआ। राजस्थान में 10 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनायें यह देश में एक नंबर पर हैं।

कांग्रेस सरकार तुष्टीकरण के मामले में भी टॉप पर है,  रामनवमी, हिन्दू नववर्ष पर जुलूसों पर प्रतिबंध लगाये गये और पीएफआई को हिजाब के मामले में तुष्टीकरण कर रैली की इजाजत दी गई।

राजस्थान में सांप्रदायिक तनाव की तमाम घटनायें घटित हुई हैं, छबड़ा, भीलवाड़ा, करौली, जोधपुर, उदयपुर, चित्तोड़गढ़, नोहर, अलवर, मालपुरा, जयपुर इत्यादि स्थानों पर बहुसंख्यकों को प्रताड़ित करने की यह वारदातें कांग्रेस शासन में ही हुई हैं। कानून व्यवस्था संभालने में अशोक गहलोत मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के रूप में पूरी तरह विफल साबित हुये हैं।

बहन-बेटियों एवं जन सुरक्षा का वादा करने वाली कांग्रेस सरकार के शासन में राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराध चरम पर हैं, महिला अत्याचार के एक लाख 51 हजार से अधिक मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। 6337 दुष्कर्म की घटनायें इसी कांग्रेस शासनकाल में हुई हैं।

राजस्थान में आर्थिक अपराध 16.01 प्रतिशत, बच्चों के खिलाफ अपराध 27 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के खिलाफ 61.06 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के खिलाफ 23 प्रतिशत, महिलाओं के खिलाफ 71 प्रतिशत  अपराध बढ़े हैं।

राजस्थान की प्रत्येक पंचायत समिति में नंदी गौशाला खोलने और   अंबेडकर भवन बनाये जाने की घोषणा वित्तीय वर्ष 2019-20 में की गई थी, लेकिन इस मामले में नाममात्र के काम ही धरातल पर उतर पाये हैं, ज्यादातर कागजों में हैं।

राज्य सरकार ने पूरे राजस्थान में 172 जनता क्लीनिक खोलने की घोषणा की थी, जिनमें से 80 प्रतिशत खोले ही नहीं गये हैं, जो खोले गये हैं, उनमें भी स्टाफ व दवाइयों की पूर्ति नहीं है।

केन्द्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना को कांग्रेस सरकार ने राजस्थान में लागू ही नहीं किया, राज्य सरकार की चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना को समन्वय नहीं होने से निजी अस्पताल सही तरीके से लागू नहीं कर पा रहे हैं।

2018 में कांग्रेस की सरकार बनी और सरकार बनने के दौरान राजभवन में दो-दो मुख्यमंत्रियों के नारे लगे, यह वही सरकार है जो 52 दिन बाड़े में बंद रही और प्रदेश की जनता को अपने हाल पर छोड़ दिया।

कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार के शासन में कोई वर्ग ऐसा वंचित नहीं रहा जिसको तकलीफ नहीं हुई हो, राजस्थान का 70 लाख से ऊपर किसान आज भी कर्जामाफी की वादाखिलाफी के दंश को झेल रहा है।

अलवर में हरीश जाटव की मॉब लिंचिंग में हत्या कर दी जाती है, योगेश जाटव की हत्या कर दी जाती है और झालावाड़ में कृष्णा वाल्मीकि की हत्या कर दी जाती है।

मेवात में लव जिहाद और लैंड जिहाद को पनपाने का काम किया गया और राजस्थान की कांग्रेस सरकार गूंगी बहरी होकर देखती रही।

कांग्रेस सरकार के मंत्रिमंडल के सदस्य ही जब सरकार पर सवाल खड़े करते हैं तो सरकार नैतिक रूप से अपना जनमत खो चुकी है, क्योंकि यह उधार का और जुगाड़ का जनमत था, जो बीएसपी और निर्दलीयों के समर्थन से हासिल हुआ, जबकि कांग्रेस तो 99 पर सिमट गई थी।

इस्तीफों से लेकर बाडाबंदी का जो दौर राजस्थान की जनता ने देखा है, 5 साल प्रदेश की जनता ने कांग्रेस सरकार का कुशासन भुगता है।

राजधानी जयपुर में भूख से बिलखती अबला जब एंबुलेंस के चालक से रोटी मांगती है तो उसकी अस्मत लूट ली जाती है, थानागाजी से लेकर ओसियां तक दुष्कर्म की घटनाएं राजस्थान की कानून व्यवस्था के ध्वस्त होने का प्रमाण हैं।

कांग्रेस शासन में भ्रष्टाचार के नये संस्करण ‘लाल डायरी’ से मुख्यमंत्री  क्यों डर रहे हैं,  जबकि राजस्थान की जनता लाल डायरी का राज जानना चाहती है।

मुख्यमंत्री अपनी कुर्सी और सरकार बचाने के जिस खेल में पांच साल से लगे हैं उसमें कोढ़ में खाज का काम हुआ कि ‘लाल डायरी’ बीच में आ गई।

उस ‘लाल डायरी’ के बारे में जनता जानना चाहती है, राजेंद्र गुढा को सदन में बोलने दिया जाना चाहिये था, जो विधानसभा सदस्य का अपना अधिकार है।

आरोप लगाने वाला साबित करे या जिस पर आरोप लगे हैं वह साबित करे, दोनों ही पक्षों की उन चीजों को राजस्थान की जनता जानना चाह रही है।

हमारे पार्टी के वरिष्ठ विधायक मदन दिलावर के साथ सदन में जो अलोकतांत्रिक व्यवहार किया गया, वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

भाजपा हमेशा की तरह आक्रामक रूप से सरकार की इस बदनीयती का मुकाबला सदन और सदन के बाहर भी करेगी।

कांग्रेस सरकार के पांच साल राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में ‘काले अक्षरों’ में लिखे जाएंगे।

भ्रष्टाचार, बिगड़ी कानून व्यवस्था, पेपर लीक, किसानों और युवाओं से वादाखिलाफी आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार की हार के प्रमुख कारक होंगे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम, जनकल्याणकारी योजनाएं और बूथ-पन्ना तक संगठन की मजबूती राजस्थान में भाजपा को विजयश्री दिलायेंगे।

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