"दाजी मानव जाति के लिए एक महान प्रेरक और आध्यात्मिक मार्गदर्शक हैं"-प्रधान मंत्री

प्रधान मंत्री ने विश्व के सबसे बड़े ध्यान केंद्र कान्हा शांति वनम, हार्टफुलनेस ऑर्गनाइजेशन में 40000 अभ्यासियों को किया संबोधित




"दाजी मानव जाति के लिए एक महान प्रेरक और आध्यात्मिक मार्गदर्शक हैं"



हैदराबाद, 2नवंबर । प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को शहर की अपनी यात्रा के हिस्से के रूप में हैदराबाद के बाहरी इलाके में श्री राम चंद्र मिशन और हार्टफुलनेस के विश्व मुख्यालय कान्हा शांति वनम पहुँचे। माननीय प्रधानमंत्री रविवार सुबह हेलीकॉप्टर से कान्हा शांति वनम पहुँचे। उन्होंने हार्टफुलनेस के आध्यात्मिक मार्गदर्शक और श्री राम चंद्र मिशन के अध्यक्ष श्रद्धेय दाजी के साथ इस सुविधा का एक संक्षिप्त दौरा किया। नरेंद्र मोदी कान्हा शांति वनम में दुनिया के सबसे बड़े ध्यान कक्ष में भी पहुँचे जिसमें एक समय में एक लाख लोगों के ध्यान करने की क्षमता है। प्रधान मंत्री का श्रद्धेय दाजी द्वारा अभिनंदन किया गया जिसके बाद श्रद्धेय दाजी ने स्वागत भाषण दिया। प्रधान मंत्री ने बाबूजी समारोह के 125 वर्ष पूरे होने पर स्मारक पट्टिका का भी अनावरण किया।




[वह पेड़ जो प्रधान मंत्री ने हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के हरित कान्हा पहल में लगाया:

बकुल या पैगोडा या इंडियन बुलेट ट्री वृश्चिक राशि और अनुराधा नक्षत्र से जुड़ा है जो प्रधान मंत्री मोदी का जन्म नक्षत्र भी है।

पेड़ में सुगंधित फूल हैं जो अटूट भक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह खाने योग्य फल भी पैदा करता है।

फूल और पौधे के सभी भागों का औषधीय महत्व है, जिनका उपयोग यकृत रोगों सहित विभिन्न बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है।]



इस अवसर को चिह्नित करने के लिए प्रधान मंत्री ने बकुल का पौधा लगाया, जिसे पैगोडा या इंडियन बुलेट ट्री भी कहा जाता है। पेड़ का महत्व इसके औषधीय, सांस्कृतिक और खगोलीय संबंध में निहित है। दुनिया के सबसे बड़े ध्यान केंद्र में एक साथ ध्यान करने के लिए देश और विदेश से 40,000 से अधिक लोग एक साथ आए और कई लोग वर्चुअल रूप से शामिल हुए।

अपने संबोधन में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “मेरी यहाँ की यात्रा लंबे समय से लंबित थी, लेकिन कान्हा शांति वनम की यात्रा करने का और यहाँ पूज्य दाजी के दृष्टिकोण के तहत प्रेरक कार्य देखने का समय अब ​​आया है। आज कान्हा शांति वनम दुनिया के सबसे बड़े ध्यान केंद्र के रूप में जाना जाता है। हम कल्पना कर सकते हैं कि यहाँ किस तरह की सकारात्मक ऊर्जा प्रसारित होती होगी।

कान्हा हमारे प्राचीन ऋषियों और योगियों के ज्ञान और परंपराओं का प्रसार कर रहा है जिन्हें 160 से अधिक देश योग और ध्यान के रूप में अपना रहे हैं - यह मानवता के लिए आपकी महान सेवा है। बाबूजी महाराज कहते थे कि चेतना का विकास हर किसी का अधिकार है। उनके उत्तराधिकारी चारी जी और अब दाजी एक मजबूत भारत के निर्माण के लिए परिवर्तन ला रहे हैं।

पूज्य दाजी आज मानवता  के लिए जो कर रहे हैं वह असाधारण है। उनके अपार योगदान के कारण उन्हें पद्म सम्मान से भी सम्मानित किया गया। दाजी उन महान आत्माओं में से एक हैं जिनसे मैं मिला हूँ। एक ओर जहाँ उन्होंने पहले औषधि विज्ञान उद्योग में शानदार काम किया, वहीं दूसरी ओर वे आध्यात्मिकता के क्षेत्र में उदाहरण पेश कर आगे बढ़ रहे हैं। संपूर्ण मानव जाति के लिए एक महान विचारक और आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में दाजी आज कान्हा को जिस ऊँचाई पर ले जा रहे हैं, उसे देखकर मुझे बहुत खुशी हो रही है।

इतिहास हमारी विरासत और संस्कृति को कुचलने के प्रयासों का गवाह है। लेकिन आज भारत ध्यान, योग, आयुर्वेद और अन्य विज्ञानों के माध्यम से अपनी अंतर्निहित शक्ति के साथ फिर से उठ खड़ा हुआ है। विकसित भारत को हमारी विरासत, हमारी एकजुटता, हमारी कर्तव्यपरायणता और एक समृद्ध राष्ट्र पर हमारा गौरव प्रतिबिंबित करना चाहिए - जिसमें श्री राम चंद्र मिशन और हार्टफुलनेस और उसके स्वयंसेवक बहुत योगदान दे रहे हैं।

मैं मजबूत भारत के लिए चार स्तंभों में विश्वास करता हूँ - 1. नारी शक्ति 2. युवा शक्ति 3. श्रम शक्ति और 4. उद्यम शक्ति। ये चार स्तंभ यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी महिलाएँ, युवा, कर्मचारी, उद्यम और श्रमिक सशक्त हों। एक समय था जब नागरिक सरकार का दरवाजा खटखटाते थे, आज हम आपका दरवाजा खटखटा रहे हैं। हम एक ‘मेरा भारत’ मिशन भी लेकर आए हैं जो युवाओं को नशीली दवाओं या मादक द्रव्यों के सेवन के दलदल में जाने से रोकेगा। जैसे प्रकृति निस्वार्थ भाव से देती है, आइए हम भी निस्वार्थ भाव से काम करें और एक मजबूत भारत का निर्माण करें।''

हार्टफुलनेस के मार्गदर्शक और श्री राम चंद्र मिशन के अध्यक्ष श्रद्धेय दाजी ने कहा, “मोदी जी के रूप में हमारे पास एक वैश्विक नेता है और उनके दृष्टिकोण से ही भारत की शान बढ़ रही है। मेरे लिए जो बात सबसे ज्यादा प्रभावित करती है वह यह है कि हमें आगे क्या करना चाहिए - हमें बेहतर इंसान बनने के लिए आंतरिक सफाई लानी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों ने कई लक्ष्यों को आसन्न बताया है। लेकिन जब आप गहराई से सोचते हैं तो उन सभी समस्याओं का मूल कारण, जिन पर  तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है, वह है विचार प्रदूषण। योग और ध्यान आपको विचार प्रदूषण को साफ करने में मदद करेंगे और इसलिए 'हर दिन ध्यान, हर दिल ध्यान' एक ऐसी चीज है जिसे मैं हर किसी को सुझाता हूँ। आइए हम अपनी विरासत पर गर्व करें और एक-दूसरे पर गर्व करें।''

श्री राम चंद्र मिशन पिछले 78 वर्षों से वैश्विक समुदाय को निःशुल्क ध्यान सिखा रहा है। हार्टफुलनेस मेडिटेशन का उद्देश्य आधुनिक दुनिया में राज योग और ध्यान की प्राचीन भारतीय परंपराओं को अपनाना है, जिससे अभ्यासकर्ताओं को इसके लाभों का अनुभव करने और एक तेज़ गति वाली दुनिया में अपनी राह बनाते हुए करते हुए आंतरिक सद्भाव और संतुलन प्राप्त करने की क्षमता मिलती है। हार्टफुलनेस का तरीका अनोखा है क्योंकि यह प्राणाहुति या योगिक संचरण द्वारा समर्थित है, जो मानव परिवर्तन के लिए एक 1800 के दशक में श्री राम चंद्र मिशन के शुरुआती मार्गदर्शकों द्वारा पुनर्जीवित की गई दिव्य ऊर्जा है।

कान्हा शांति वनम का उद्घाटन 2020 में भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद द्वारा किया गया था। 2015 में अपने विकास की शुरुआत के बाद से कान्हा शांति वनम विशालता और प्रभाव दोनों में ही विकसित हुआ है। जो भूमि कभी भारतीय दक्कन पठार की विशेषता बंजर भूमि थी, वहीं पर कान्हा शांति वनम अब एक समृद्ध हरा-भरा स्थान है, जिसमें 10 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं और नर्सरी विकसित की गई है, जिससे यहाँ 280 गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों के पौधों सहित कुल 50 लाख पेड़-पौधे हैं। कान्हा दुनिया के सबसे बड़े ध्यान कक्ष के साथ एक ध्यान केंद्र के रूप में ही नहीं, बल्कि सीखने, योग, ध्यान, कल्याण, टिकाऊ जीवन, पारिस्थितिक संरक्षण और जल संरक्षण के लिए एक समग्र केंद्र के रूप में भी कार्य करता है। यह जीवन के सामंजस्यपूर्ण तरीके को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक और पारंपरिक दृष्टिकोणों का मिश्रण है। हाल के वर्षों में कान्हा शांति वनम ने खेल, संगीत, फिल्म, अकादमिक और उद्यमिता की दुनिया से बड़े नामों को आकर्षित किया है, और इसमें पुलेला गोपीचंद, पी.वी. सिंधु, रोहित शर्मा, कबीर बेदी और रिकी केज सहित कई अन्य लोग व्यक्ति शामिल हैंजो उत्साही अभ्यासकर्ता और समर्थक हैं।

हार्टफुलनेस के बारे में: हार्टफुलनेस, ध्यान के अभ्यासों और जीवन शैली में बदलाव का एक सरल संग्रह प्रदान करता है। इसकी उत्पत्ति बीसवीं शताब्दी के आरम्भ में हुई और भारत में 1945 में श्री राम चंद्र मिशन की स्थापना के साथ इसे औपचारिक रूप दिया गया, जिसका उद्देश्य था एक एक करके हर हृदय में शांति, ख़ुशी और बुद्धिमत्ता लाना। ये अभ्यास योग का एक आधुनिक रूप हैं जिनकी रचना एक उद्देश्यपूर्ण जीवन की दिशा में पहले कदम के रूप में संतोष, आंतरिक शांति और स्थिरता, करुणा, साहस और विचारों में स्पष्टता लाने के लिए की गई है। वे सरल और आसानी से अपनाए जाने योग्य हैं और जीवन के सभी क्षेत्रों, संस्कृतियों, धार्मिक विश्वासों और आर्थिक स्थितियों के लोगों के लिए उपयुक्त हैं, जिनकी उम्र पंद्रह वर्ष से अधिक है। हार्टफुलनेस अभ्यासों में प्रशिक्षण हजारों स्कूलों और कॉलेजों में चल रहा है, और 100,000 से अधिक पेशेवर दुनिया भर में कॉर्पोरेट निगमों, गैर-सरकारी और सरकारी निकायों में ध्यान कर रहे हैं। 160 देशों में 5,000 से अधिक हार्टफुलनेस केंद्रों का हजारों प्रमाणित स्वयंसेवी प्रशिक्षकों और लाखों अभ्यास करने वालों द्वारा संचालन किया जाता है।





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